शौर्य और सौंदर्य की प्रतिमूर्ति थीं रानी कमलापति

भोपाल में आज भी रानी कमलापति के वीरता के किस्सों की अक्सर चर्चाएं होती हैं। सिर्फ वीरता ही नहीं बल्कि उनकी खूबसूरती भी ऐसी थी कि हर कोई बस देखता रह जाए। फिल्म पद्मावत तो आपने देखी होगी जिसमें खिलजी रानी पद्मावती की खूबसूरती का दीवाना हो गया था और आखिर में रानी पद्मावती को जौहर करना पड़ा था। ये कहानी तो सबको पता है मगर रानी कमलापति के बारे में बहुत ही कम लोग जानते हैं। रानी कमलापति को भी अपनी खूबसूरती के चलते ही जल समाधि लेनी पड़ी थी।

रानी कमलापति भोपाल की अंतिम गोंड आदिवासी शासक थीं। 16वीं सदी में भोपाल गोंड शासकों के अधीन था। उस समय गोंड राजा सूरज सिंह शाह के बेटे निजाम शाह से रानी कमलापति का विवाह हुआ था। सन 1710 में भोपाल की ऊपरी झील के आसपास का क्षेत्र भील और गोंड आदिवासियों ने बसाया था। तत्कालीन गोंड सरदारों में निजाम शाह सबसे मजबूत माने जाते थे। रानी कमलापति ने अतिक्रमणकारियों का किया डटकर सामना था। आदिवासियों में रानी कमलापति के वीरता के किस्सों की अक्सर चर्चाएं होती हैं। गौरतलब है कि मुगल साम्राज्य के पतन के बाद भोपाल से 50 किलोमीटर दूर बने गिन्नौरगढ़ की छोटी रियासत वजूद में आई। राजा निजाम शाह यहां के शासक थे। यहीं से रानी कमलापति की कहानी शुरू होती है। निजाम साहब गोंड राजा थे। कहा जाता है कि उनकी 7 पत्नियां थीं। इनमें से एक थी रानी कमलापति। वो राजा की सबसे प्रिय पत्नी थीं। रानी खूबसूरत होने के साथ-साथ बुद्धिमान भी थीं। आज का भोपाल उस समय का एक छोटा सा गांव हुआ करता था जिस पर निजाम शाह की हुकूमत थी। बताया जाता है कि निजाम शाह को उनके ही भतीजे आलम शाह ने जहर देकर मरवा डाला था। खुद को बचाने के लिए रानी कमलापति अपने बेटे नवल शाह के साथ गिन्नौरगढ़ से भोपाल के रानी कमलापति महल में आ गई थीं। भोपाल आकर रानी ने राजा के मित्र मोहम्मद खान से मदद मांगी। बताया जाता है कि मोहम्मद खान ने 1 लाख रुपये में राजा के कातिल की हत्या करवा दी लेकिन वादे के मुताबिक रानी रुपये नहीं दे पाईं। बदले में उन्होंने अपनी रियासत का कुछ हिस्सा मोहम्मद खान को दे दिया।

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो मोहम्मद खान ने इसके बाद रानी कमलापति की खूबसूरती से प्रभावित होकर उसके सामने विवाह का प्रस्ताव रखा, लेकिन रानी कमलापति ने इंकार कर दिया। लेकिन मोहम्मद खान किसी भी तरह से रानी कमलापति को पाना चाहता था। इस बीच मोहम्मद खान और रानी कमलापति बेटे नवल शाह के बीच युद्ध भी हुआ। इस युद्ध में 16 वर्षीय नवल शाह का निधन हो गया। इस युद्ध के दौरान घाटी में इतना खून बहा कि वो पूरी तरह से लाल हो गई। आज उसी जगह को लालघाटी के नाम से जाना जाता है। इसके बाद भोपाल पर मोहम्मद खान का एकाधिकार हो गया, युद्ध में बेटे की मौत का संदेश पाते ही रानी ने महल की तरफ बांध का सकरा रास्ता खुलवा दिया, जिससे तालाब का पानी महल में आने लगा।

माना जाता है कि रानी ने ऐसा इसलिए किया ताकि दुश्मन उनके शरीर को छू भी ना सके। कुछ ही समय में पूरे महल में पानी भर गया, इमारतें डूबने लगीं। रानी ने अपनी सारी दौलत और कीमती सामान सहित पानी में ही समाधि ले ली। इस महल की बाकि दो मंजिलें अभी भी संरक्षित हैं, जहां सैलानी घूमने आते हैं। 300 साल पहले बने सात मंजिला कमलापति महल का कुछ हिस्सा पानी में डूबा हुआ है। इसके बाद 1989 से ये महल भारतीय पुरातत्व संरक्षण के अधीन है।

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