वेद और गांधीवादी विचारधारा ने दो विदेशी महिलाओं को दिलाया पद्म श्री

26 जनवरी के देश हर साल जहाँ एक तरफ पूरा भारत गणतंत्र दिवस मनाता है, वहीं दूसरी ओर हर साल इसी दिन सरकार पद्म श्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण के पुरस्कारों का ऐलान करती है कि, देश के इस बार किन-किन लोगों को इन पुरस्कारों से सम्मानित किया जा रहा है. इस बार भी भारत सरकार ने पुरस्कारों को लेकर 141 लोगों का नाम ऐलान किया. जिन्हें ये पुरस्कार दिए जाने हैं. जिसमें सात पुरस्कार पद्म विभूषण, 16 पद्म भूषण और कुल 118 पद्म श्री अवॉर्ड शामिल है. जबकि इस बार किसी को भी भारत रत्न नहीं दिया गया. इन सबके अलावा इस बार कुल 33 महिलाओं को पद्म पुरस्कार से सम्मानित करने की भी घोषणा की गई, जिसमें से 12 पुरस्कार ऐसे हैं जोकि फॉरेनर्स को दिए जाने हैं.

इन्हीं 12 फॉरेनर्स के बीच दो ऐसे हैं, जोकि एक ही देश ब्राजील की हैं. जिनकी चर्चा हर ओर है और वजह है, उनका काम

ग्लोरिया अरियेरा

ग्लोरिया अरियेरा

रियो डि जेनेरो की रहने वाली ग्लोरिया अरियेरा को भारत सरकार ने पुरस्कार देने के लिए चयनित किया है. ब्राजील की रहने वाली अरियेरा वेदांत दर्शन और संस्कृत पढ़ाती हैं. ग्लोरिया अरियेरा पिछले काफी समय से अपने देश के कई शहरों में घूम-घूम कर वेदांत दर्शन और संस्कृत पढ़ा रही हैं. साल 1974 में भारत आई ग्लोरिया अर्श संदीपनी साधालय में वेद पढ़ने के लिए आई थी. ये वेदशाला मुंबई में है. जहां उन्होंने चार सालों तक वेद सीखा. जिसके बाद उन्होंने भारत के उत्तरकाशी और फिर ऋषिकेश के आश्रमों में पढ़ाई की. उसके बाद साल 1979 में वापस ब्राजील लौट गई. जिसके बाद से अब तक ग्लोरिया वहां के लोगों को वेद की अहमियत सीखाने के साथ-साथ वेद का ज्ञान दे रही हैं.

ग्लोरिया आज के समय में रियो डि जेनेरो में विद्या मंदिर के नाम से एक NGO भी चलाती हैं. अब तक ग्लोरिया संस्कृत के कई ग्रंथों को पुर्तगाली की भाषा में अनुवादित कर चुकी हैं. यही वजह है कि, सरकार ने उन्हें पुरस्कार देने के लिए चयनित किया है.

लिया डिस्किन

ग्लोरिया अरियेरा

ग्लोरिया के अलावा लिया डिस्किन को भारत सरकार ने उनके काम के लिए पुरस्कार देने के लिए चयनित किया है. क्योंकि डिस्किन पिछले तीस साल से ब्राजील में महात्मा गांघी के दर्शन को लोगों के बीच फैला रही हैं. मूलरूप से डिस्किन अर्जेटीना की रहने वाली हैं. हालांकि पिछले काफी सालों से वो ब्राजील में रह रही हैं. इन सबके अलावा डिस्किन एथिक्स और कल्चर पर कई किताबें लिख चुकी हैं. साथ ही महात्मा गांधी की जीवनी- ‘सत्य के साथ मेरे प्रयोग’  को भी डिस्किन अपने यहां की भाषा पुर्तगाल में ट्रांसलेट कर चुकी हैं. डिस्किन पिछले कई सालों से महात्मा गांधी के विचारों और दर्शन को ब्राजील के लोगों के बीच वितरित कर रही हैं. यही वजह है कि, देश की मौजूदा सरकार ने उन्हें पद्म श्री पुरस्कार दे सम्मानित करने की घोषणा की है.

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