लॉकडाउन में अपने गांव लौटे मजदूरों ने बदली नदी की काया

कोरोना जैसी बीमारी में लगा लॉकडाउन जहां अनेकों के लिए काल बन गया तो अनेकों के लिए वरदान से कम साबित नहीं हुआ. जहाँ पर्यावरण से लेकर प्रदूषण तक इस दौरान काफी सुधार देखने के मिला. वहीं ऐसे न जानें कितने लोग हैं जिन्होंने बेरोजगार होना पड़ा. न जानें कितने लोगों ने इसी मजबूरी के चलते पलायन किया तो कितनी ही लोग ऐसे रहे जो पूरी तरफ से लगे लॉकडाउन में अपने घरों से दूर रहे. हालांकि इस लॉकडाउन ने बहुत से लोगों की जिंदगी बदल दी.

चाहे बात शहर की हो, गांव की हो, किसी इंसान की हो सभी पर लॉकडाउन का असर पड़ा है. इसी तरह उत्तर प्रदेश के बारांबकी जिले के एक गांव में ये लॉकडाउन वरदान बन गया. लॉकडाउन में फंसे लोगों और लॉकडाउन में अपने गांव वापस लौटे मजदूरों और आम इंसानों की मदद से यहां के लोगों ने वो कर दिखाया. जिसकी कल्पना शायद ही लोग करते हैं. यहां रुके गांववालों और एक IAS के साथ मिलकर यहां सूख चुकी एक नदी को पुनर्जीवित कर दिया. यही नहीं इस काम ने जहाँ लगभग 800 लोगों को रोजगार दिया. तो अनेकों घरों को भूखे मरने से बचा लिया.  

कल्याणी नदी को किया पुनर्जीवित

कल्याणी नदी

हर इंसान जानता है कि, लॉकडाउन में अनेकों लोग अपने घरों को वापस लौट गए. अनेकों लोगों के रोजगार छिन गए. इसी तरह बाराबंकी के एक गांव मवैया की भी कहानी है. जिस समय पूरे देश में लॉकडाउन लगा था. उस समय जहां यहां के कई लोग मजबूरन यहीं फंस गए तो, अनेकों ऐसे लोग रहे जो इस दौरान शहरों से वापस अपने गांव लौटे. जिसका फायदा यहां के डीएम ने उठाया और गांववालों के साथ मिलकर नदी को पुनर्जीवित करने का काम शुरू कर दिया. डीएम ने ये काम मनरेगा स्कीम के तहत शुरू किया.

कल्याणी नदी

प्रोजेक्ट पर काम करते हुए जहाँ डीएम की मदद से फेज 1 के लिए 59 लाख रुपये सैंक्शन किए गए. वहीं लगभग ढ़ाई किलोमीटर से ज्यादा का हिस्सा मवैया गांव में पड़ने वाला लोगों ने मिलकर साफ किया. साथ ही अपने पास के गांव हैदरगढ़ में भी डेढ़ किलोमीटर तक इस सूख चुकी नदी को पुनर्जीवित करने के लिए काम किया. गौरतलब है कि, एक समय तक जहां ये नदी लोगों के खेत की सिंचाई का जरिया थी. वहीं लोगों के जरिए नदी में आने वाले कूड़े और अपशिष्टों के चलते इसकी चौड़ाई कम हो गई थी. जिसके चलते ये नदी पूरी तरह सूख गई थी.

लॉकडाउन ने पहुंचाई मदद

कल्याणी नदी

हालांकि जहां इस लॉकडाउन लोगों ने मिलकर इस पर काम किया. वहीं जानकारी के मुताबित ये काम पिछले साल होने वाला थआ. हालांकि गांव में लेबरों की कमी के चलते ये काम टल गया था. लेकिन लॉकडाउन के चलते जहां अधिकतर लोग वापस लौट आए. वहीं अधिकतर लोगों ने इस प्रोजेक्ट पर काम करना भी शुरू किया.

डीएम डॉक्टर आदर्श सिंह के चलते जहाँ गांव में पहुंचे इन मजदूरों को एक रोजगार मिल पाया. वहीं गांव में लौटे बेरोजगार लोगों को दो वक्त का खाना नसीब हो सका. कुल 60 दिनों के अंदर गांव के लोगों ने मिलकर इस गांव की पूरी काया पलट दी. कुछ समय पहले तक जिस नदी के पूरी तरह सूख जाने के आसार थे. आज वही नदी कल-कल करती बह रही है.

कल्याणी नदी

कल्याणी नदी को साफ करने के साथ-साथ, गांव के लोगों में ये जागरुकता भी फैलाई जा रही है कि, वो इसके प्रति जिम्मेदार हों और अपनी नदियों को बचा सकें. इस नदी की कुल लंबाई लगभघ 170 किलोमीटर है.

वक्त है कुछ ऐसा ही करने दिखाने का, अपनी सोच बदलने का, ताकि हम अपना आने वाला कल बेहतर कर सकें.

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