लीला देवी दुनिया को सिखा रही हैं अंधेरों से लड़ना

गांव और देहात जैसी जगहों पर बच्चों की पढ़ाई के बीच सबसे बड़ी बाधा बनती है बिजली, और हमारे देश में आज भी ऐसे ना जाने कितने ही गांव हैं, जहां बिजली, पानी, जैसी मूलभूत सुविधाएं आज भी उपलब्ध नहीं हैं। इसी के चलते बिजली की समस्या से निपटारा पाने के लिए राजस्थान और उत्तर प्रदेश की महिलाओं ने एक ऐसी पहल की है। जिसके चलते गांवों में बिजली की कमी की वजह से अब बच्चों को पढ़ाई से वंचित नहीं रहना पड़ेगा।

दरअसल, सौर ऊर्जा के सहारे इन दो राज्यों की महिलाएं मिलकर गांवों में उजाला करने के साथ ही, अच्छी कमाई भी कर रही हैं। तिलोनिया की लीला देवी पूरी दुनिया की महिलाओं की जिंदगी में सौर-ऊर्जा से रोजगार की रौशनी फैला रही हैं। आपको बता दें कि, उत्तर प्रदेश के मैनपुरी में एक स्वयं सहायता समूह ने ऐसा सोलर लैंप बनाया है। जिसे रियायती दरों पर स्कूलों में छात्र-छात्राओं को बेचा जाएगा।

सोलर लैंप बनाना की ट्रेनिंग देती हैं, लीला देवी

जयपुर से 90 किलोमीटर दूर किशनगढ़ के पास बसा तिलोनिया गांव, जहां एक ऐसा कॉलेज है, जहां पर दर्जनों ऐसी महिलाएं हैं, जिन्होंने कभी स्कूल का मुंह तक नहीं देखा। लेकिन इसके बावजूद भी वो विदेशों से आई महिलाओं को सोलर लैंप बनाना सिखा रही हैं। बेयरफुट कॉलेज तिलोनिया में मन्ना और लीला देवी महिलाओं को सोलर लैंप बनाने की ट्रेनिंग दे चुकी हैं, तो वहीं लीला देवी तो, विदेशों तक जाकर लोगों को सोलर पैनल बनाना सिखा रही हैं। सोलर लैंप बनाने की ट्रेनिंग लेने वाली महिलाएं ऐसे देशों के दूरस्थ गांवों से हैं, जो अब तक सामाजिक रुप से काफी पिछड़े हुए हैं या वो गांव जिनमें अब तक बिजली नहीं पहुंची है।

इन सोलर लैंपों से जहां स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं की किस्मत चमक रही है। तो वहीं छात्रों को भी रात में पढ़ने के लिए रोशनी का सहारा मिल जाएगा। मैनपुरी की 23 पंचायतों में इन महिलाओं ने मिलकर सोलन लैंप बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है… ये लैंप 1 से 12 तक के छात्रों को उनकी क्लासज में ही उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके लिए उन्हें महज 100 रुपये खर्च करने होंगे। आपको ये भी बता दें कि, इस महिला स्वयं सहायता समूह का चालीस हजार सोलर लैंप बनाने का लक्ष्य है।

मास्टर ट्रेनर बनकर बदल रही जिंदगियां

इस कॉलेज में मन्ना और लीला जैसी करीब 35 महिलाएं है, जो मास्टर ट्रेनर बनकर न केवल खुद की जिंदगी में बल्कि सामाजिक रुप से पिछड़ी इन विदेशी महिलाओं के जीवन में भी उजाला ला रही है। राजस्थान का एक छोटा सा कस्बा है तिलोनिया, जहां अफ्रीकी देशों की उन गरीब महिलाओं को सोलर टेक्नीशियन बनने के लिए तैयार किया जा रहा है, जिनके इलाकों में बिजली की काफी कटौती होती हैं।

इन महिलाओं को ट्रेनिंग देने वाली उनकी ही जैसी महिलाओं में से एक हैं मामूली पढ़ी-लिखी लीला देवी, जो करीब 15 सालों से दुनिया के लगभग 90 देशों के लोगों को सोलर पंप बनाने के साथ, उनका रख-रखाव, और मरम्मत करना भी सिखा चुकी हैं.. आपको बता दें कि, लीला देवी पहले कढ़ाई का काम करती थी.. और बस उन्ही दिनों उन्हें सोलर लैंप बनाना आ गया.. लीला देवी का कहना है कि, सप्लाई से मिलने वाली बिजली भले ही चले जाए,, लेकिन सौर ऊर्जा का इस्तेमाल अपने हाथ में होता हैं… और इसके इस्तेमाल से आफ बिजली बिल देने से भी बच सकते हैं… और जहां बात आती हैं, गरीब, और पिछड़ें इलाकों की वहां तो सौर ऊर्जा किसी चमत्कार से कम नहीं हैं.. मन्ना और लीला देवी जिस तरह से गांवों और पिछड़ें इलाकों को रौशन करने में अपना योगदान दे रहे हैं.. उसी तरह हमें भी इस पहल में अपना सहयोग देना चाहिए सौर ऊर्जा का इस्तेमाल न सही लेकिन बिजली का दुरूपयोग को होने से हम लोग जरूर रोक सकते हैं।

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