लालटेन की रौशनी में लिख दी 20 किताबें, जानिए हेमा साने की कहानी

बिजली या इलेक्ट्रिसिटी कितनी जरूरी चीज है यह किसी को बताने की शायद जरूरी नहीं है। इसका महत्व हम सब जानते हैं, एक पल के लिए भी अगर बिजली की स्पलाई कट हो जाए तो हमारी जान निकलने लगती है और उसपर भी हमारे घर की कटे और बगल वाले की स्पलाई आ रही हो तो ज्यादा दिक्कत होती है। इस 21वीं सदी में शायद ही कोई ऐसा इंसान दिखे जो बिना बिजली के जिंदगी की सोच भी सके। आज कल तो गांव से लेकर शहर तक हर जगह लगभग लगभग 20 से 22 घंटे बिजली तो रहती ही है, ऐसे में दिया, लालटेन और कैंडल के दिन भी अब लद से गए हैं। बिजली का एक पल के लिए भी कटना हमें छटपटाने पर मजबूर कर देता है।

लेकिन अब तो हम 20 से 22 घंटे औसतन बिजली की सप्लाई मिलने से इसके यूज टू हो गए हैं। 24 घंटे बिजली में रहने की आदत डाल चुके हम लोगों का काम शायद ही बिजली के बिना हो सके। आज शायद ही कोई यह सोचना चाहें कि बिना बिजली के भी एक जिंदगी हो सकती है, क्योंकि यह हमारी जिंदगी में सांस लेने जितनी जरूरी हो चुकी है। इस बात का अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि हमारे देश में हर एक व्यक्ति एक साल में औसतन 1,122mwh  बिजली का इस्तेमाल करता है। ऐसे में बिना बिजली के लाइफ कैसी होगी, इस बारे में भी हम सोचने की हिम्मत तक नहीं कर पाते।

लेकिन दुनिया इलेक्ट्रिसिटी डिपेंडेंट भले ही हो चुकी हो, आज भी ऐसे लोग हैं जिनके लिए बिजली कोई मायने नहीं रखती और ऐसी ही एक महिला की कहानी आज हमारी दी इंडियननेस स्टोरी है। दुनिया में बिजली आए या जाए इनको कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि वो दिनभर में बिजली का इस्तेमाल 0 प्रतिशत करतीं हैं। वे साल में बिजली से जलने वाला एक बल्ब भी नहीं यूज करतीं। आज के दौर में भी बिना बिजली के एक शानदार जीवन जीने वाली ये महिला हैं ‘हेमा साने’। हेमा की उम्र 80 साल हैं और पिछले कई दशकों से वो बिना बिजली के ही अपनी जिंदगी शानदार तरीके से जी रही हैं। इन्हें देखकर आप सोच सकते हैं कि ये कोई साधारण महिला है, लेकिन हेमा बॉटनी की प्रोफेसर रह चुकी हैं, उनकी लिखीं कई सारी किताबे आज ग्रेजुएशन कर रहे बच्चों की सब्जेक्ट बुक है।

Hema Sane ने बिना बिजली के बिता दिए 80 साल

पुणे के बुधावार पथ में एक छोटे से घर में रहने वाली हेमा साने बताती हैं कि वे अपने जन्म के समय से यहां रहती हैं और तब से लेकर अब तक बिजली की जरूरत ही नहीं पड़ी। वो कहती हैं – लोग मुझे फूल कहते हैं, लेकिन इससे क्या फर्क पड़ता है, यह मेरे जीने का तरीका है, मैने किसी को इस तरह से जीने के लिए कोई एडवाइस नहीं दिया। वे कहती हैं कि बिजली वाली जिंदगी काफी अलग तरीके की है। बिजली न हो तो आदमी छटपटाने लगता है, टीवी, वीडियो गेम्स और मोबाइल गेम्स न मिलें तो बच्चे एक पल के लिए बैठते तक नहीं। 

बॉटनी की प्रोफेसर रहीं हेमा साने ने मोमबत्ती की रोशनी में अपनी ग्रेजुएशन और पीएचडी की डिग्री हासिल की है। वे अपनी जिंदगी में इस तरह से रच बस गईं हैं कि, उन्हें उम्र के इस पड़ाव पर भी बिजली जैसी किसी चीज की जरूरत तक नहीं पड़ती। वे बताती हैं ’उन्होंने अपनी पीएचडी की पूरी थीसिस एक छोटे से गर्म लैम्प की रोशनी में लिखी, उन्हें सारी रात उस गर्म लैम्प के आगे बैठना पड़ता था।

हेमा साने भलें ही 80 बरस की हों, लेकिन इस उम्र में भी उनके अंदर काम करने की जो कुशलता है उसे देखकर किसी भी युवा व्यक्ति को उनसे जलन होने लगे। वे सुबह उठकर पहले तो अपने बाड़े की सफाई करती हैं, फिर कपड़े धोने के बाद वे कुंए से दिनभर के काम के लिए पानी निकालती हैं।

Hema Sane
बिना बिजली के पूरी जिंदगी व्यतीत कर बनी मिसाल

Hema Sane- बिजली की गती से दौड़ने वाली दुनिया के लिए मिसाल है हेमा

हेमा साने के आस-पास रहने वाले लोग उनसे काफी प्रेरित हैं। वे कहते हैं कि एनवायरमेंट के प्रति उनका कमिटमेंट काफी ज्यादा है। वे हमे भी इस बारे में कहती हैं कि रिर्सोसेज को हमे प्रिजर्व करना चाहिए। वहीं कुछ लोग कहते हैं कि हेमा साने उनके लिए बिना बिजली वाली गूगल की तरह हैं, उनके पास अथाह ज्ञान है। हेमा साने के यहां दिनभर लोगों का आना जाना लगा रहता है। इसमें उनसे पढ़ने आने वाले बच्चों से लेकर मेहमानों तक होते हैं जो उनसे कुछ न कुछ सीखने के लिए आते रहते हैं।

आपको बता दें कि हमारे देश में बिजली को बनाने में कई रिर्सोसेज का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर होता है और इससे खतरा हमारे वातावरण को ही होता है। आज भी हमरे देश में बनने वाली बिजली का 56 प्रतिशत हिस्सा कोयले से तैयार होता है। इससे वातावरण को तो नुकसान होता ही है साथ भविष्य में इसके भंडार के खत्म होने का डर भी रहता है।

ऐसे में इस उम्र में भी बिना बिजली के अपनी जिंदगी एक सहज तरीके से गुजारने वाली प्रोफेसर हेमा सच में आज की बिजली की गती से दौड़ने वाली दुनिया के लिए एक अलग मिसाल हैं। दौड़ती भागती जिंदगी को वो थोड़ा ठहरकर जीने और रिर्सोसेज का अंधाधुंध इस्तेमाल किसी भी लिहाज से नहीं करने की प्रेरणा देती हैं। ताकि हमारी आने वाली पीढ़ी भी एक अच्छी लाइफ जी सके।

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