रोबोट टीचर वाला स्कूल, यहां बच्चों की क्लास लेती हैं मैडम ईगल 2.0

टीचिंग दुनिया के सबसे बड़े कामों में से एक है। कहते हैं — शिक्षक कोई साधारण व्यक्ति नहीं होता, प्रलय और निमार्ण दोनों ही उसकी गोद में खेलते हैं। मतलब शिक्षक ही भविष्य का निर्माण करता है और वो ही विनाश का कारण भी बन सकता है। क्योंकि टीचर का धन ज्ञान होता है। लेकिन दुनिया जैसे-जैसे बदल रही है टीचर और साथ में टीचिंग में कई तरह के बदलाव देखने को मिल रहे हैं। अब दुनिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंश और रोबोटिक मशीन्स का है तो टीचिंग और टीचर के प्रोफेशन में भी एआई और रोबोट्स की अब एंट्री हो चुकी है। कल तक टीचर इंसान होते थे, लेकिन स्मार्ट क्लास और स्मार्ट टीचिंग के जमाने में अब ‘रोबोंट’ टीचर बन गए हैं। जी बिल्कुल सही सुना आपने, रोबोट अब स्कूलों में टीचिंग कर रहे हैं और बच्चों को भी अपने इस नए टीचर के संग बड़ा मजा आ रहा है।

बैंगलूरू के स्कूल में नियुक्त की गई है रोबोट टीचर

आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के जमाने में हमने अभी तक रोबोट को वेटर के तौर पर, वर्कर के रूप में देखा है और टीवी एंकर के रूप में भी देखा है। लेकिन अब आपको रोबोट टीचर के रूप में दिखेंगे। इसकी शुरूआत भी हो चुकी है बैंगलूरू के ‘इंडस इंटरनेशनल स्कूल’ से। इस स्कूल में हमारे नार्मल टीचर जी के अलावा रोबोट मैंम को भी एप्वाइंट किया गया है।….. मशीनों और रोबोट को लेकर हमेशा से एक सवाल उठता है और वो ये कि मशीने लोगों की जगहें ले लेंगी और इस तरह लोगों का रोजगार खत्म हो जाएगा? लेकिन इंडस स्कूल में रोबोट मैंम की तैनाती के बाद ऐसा कुछ हुआ नहीं है।

robot Teacher

असल में रोबोट मैंम टीचर साहेब के लिए एक सपोर्टर बन कर आई हैं। इससे होता ये हैं कि रोबोट बच्चों को वो पढ़ाती हैं जो नेट पर मिलता है और टीचर बच्चों को वो पढ़ाते हैं जो नेट पर नहीं हैं। वहीं जब रोबोंट मैंम पढ़ा रही होती हैं तो टीचर सर बच्चों की निगरानी भी कर लेते हैं कि… वे ध्यान दे रहे हैं या नहीं। रोबोट और इंसान टीचर का यह नया कॉसेप्ट बच्चों को भी काफी भा रहा है। वे मानते हैं कि इससे पढ़ाई और इंटरेस्टिंग बन गई है और समझने में भी काफी मदद मिलती है।

इंडस इंटरनेशनल स्कूल में ने कक्षा 7, 8 और 9 के छात्रों को फीजिक्स, केमेस्ट्री, बायोलॉजी के साथ जियोग्राफी व हिस्ट्री आदि सब्जेक्ट पढ़ाने के लिए इन रोबोटर्स मैंम को सहायक टीचर के रूप में रखा है। इंसानों की तरह दिखने वाले इन ह्यूमनॉइड रोबॉट को नाम दिया गया है ईगल 2.0। यह रोबोट टू-वे कम्युनिकेशन में भी सक्षम है। ये बच्चों से सवाल पूछ सकता है, उनके जवाब सुनता है और अगर जवाब गलत हुआ तो उसपर अपनी प्रतिक्रिया भी आराम से देता है।

कैसे तैयार किया गया है रोबोट टीचर को ?

‘इंडस इंटरनेशनल स्कूल’ में जिस रोबोट को टीचिंग का काम सौंपा गया है, उसे कहीं बाहर से बनवाकर नहीं मंगाया गया। बल्कि इसे भारत में ही 17 लोगों की टीम ने मिलकर तैयार किया है। वहीं इस ह्यूमनॉइड रोबोट में लगे मोटर को अमेरिका से मंगाया गया है। यह वहीं मोटर है जिसके इस्तेमाल से चर्चित मानव रोबोट सोफिया के को बनाने में प्रयोग किया गया था। स्कूल प्रशासन कि माने तो फिलहाल ऐसे तीन ह्यूमनॉइड रोबोट्स को बनाया गया है। 8 लाख की लागत इसे बनाने में आई है। इंडस इंटरनैशनल स्कूल के ट्रस्टी लेफ्टिनेंट जनरल अर्जुन रे बताते हैं कि ये रोबोट्स टीचर के अच्छे सहयोगी बनकर सामने आए हैं और बच्चों को भी काफी कुछ सीखने को मिल रहा है।

robot Teacher

इस रोबोट को तैयार करने वाली टीम की माने तो रोबोट को तैयार करने के बाद उनका अगला काम कंटेंट तैयार करना था। जिसमें उनकी टीम ने काफी मेहनत की है। यानि यह रोबोट एक नॉर्मल टीचर की तरह है जिसके पास जो बच्चों को पढ़ाने से पहले खुद पूरी तरह से तैयार होता है। वहीं रोबोट और टीचर के बीच तालमेल को बैठाने के लिए इस टीम ने लेशन प्लानिंग तक की है। जिसमें इस बारीकी तक काम हुआ है कि टीचर क्या बताएंगे और रोबोट मैंम क्या बताएंगे।

स्कूली स्तर पर टेक्नॉलोजी का यह ऐसा पहला नमूना है। यानि भारत ही नहीं पूरी दुनिया में यह पहला ऐसा स्कूल है जहां के बच्चे रोबोट मैंम और टीचर से एक साथ पढ़ाई कर रहे हैं। इस स्कूल ने पढ़ाई और टीचिंग के क्षेत्र को एक नया मुकाम ही नहीं दिया है, बल्कि दुनिया को एक संदेश भी दिया है कि अगर हम चाहें तो मशीन और इंसानों के बीच बेहतर तालमेल बैठाकर तरक्की के नए रास्ते खोल सकते हैं।

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