रवीश कुमार बदलेंगे जलवायु परिवर्तन की दशा और दिशा!

कहीं पानी की किल्लत तो कहीं बढ़ते प्रदूषण से बिगड़ते हालात आज शायद ही पूरे भारत में ऐसा कोई राज्य होगा जहां इन सबकी समस्या न होती हो. ऐसे में इन सब चीजों में दोष किसको दें. जब हम सब इनके जिम्मेदार हैं. आज भारत की जलवायु में लगातार बदलाव हो रहा है. जाहिर है, इसका मुख्य कारण पेड़ों की लगातार हो रही कटाई ही है, क्योंकि हमने विकास के नाम पर क्या जंगल, क्या बाग, क्या बगीचे हर जगह विकास की धार इस तरह लगाई है की आज वो शहर का रूप ले चुके हैं. यही वजह है की हर साल गर्मी का पारा भी शायद मई जून और जुलाई के महीने में कुछ इस तरह तांडव मचाता है की शायद हर इंसान उस से बेहाल हो जाता है.

हालांकि अब लोगों को भी शायद समझ आने लगा है कि, पेड़ों की अहमियत हमारे जीवन में कितनी है. तभी तो उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में आज पेड़ों को बचाने और उन्हें लगाने के लिए जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है. हालांकि इसमें कोई बड़ी बात नहीं है, क्योंकि इस तरह के अभियान तो हर रोज चलाए जाते हैं. लेकिन लोगों से लेकर सरकारों में कोई बदलाव नहीं आता. क्योंकि यही सरकार विकास के नाम पर खुद ही पेड़ों को काटती है और पेड़ों को बचाने की उनकी मुहिम मिट्टी में मिल जाती है.

कुशीनगर के “सावित्री संस्थान” में जिम्मेदारी की मशाल लेकर चलते रवीश कुमार

हालांकि बदलते जलवायु और दिनों दिन चढ़ते सूरज के पारे के बीच पर्यावरण को संरक्षित करने के लिए कुशीनगर जनपद के रवीश कुमार इसे बदलने के लिए मशाल लेकर चल रहे हैं. आपको बता दें कि पर्यावरण को सरंक्षित करने के लिए अब तक रविश कुमार 1 लाख से ज्यादा पेड़ों को सामाजिक संदेश देते हुए अब तक फ्री में बांट चुके हैं. रविश कुमार एक प्राइवेट अस्पताल चलाते हैं. जो कुशीनगर के हाटा तहसील के अंतर्गत तितला चौराहे पर सावित्री संस्थान के नाम से पहचाना जाता है. इसको लेकर रवीश कुमार कहते हैं कि, “आज पर्यावरण का मुद्दा सबसे गंभीर चिंता वाला विषय बन गया है. यही वजह है कि जीवन को बचाने के लिए पेड़ पौधे जरूरी हैं. जिस तरह लोग रुपये अपने रुपए को बढ़ाने के लिए बैंक में फिक्स डिपॉजिट करते हैं और पंद्रह से बीस वर्षों में उनका धन चार गुना हो जाता है. ठीक उसी तरह यदि पेड़ लगाएं तो आर्थिक लाभ तो होगा ही साथ में पर्यावरण भी शुद्ध होगा है.”

अस्पताल के अलावा गांवों में घूम-घूम कर लगाते हैं, चौपाल

आपको बता दें किरवीश कुमार सुबह सात बजे गांवो में घूम घूम एक चौपाल लगाते हैं और फ्री में पौधे का वितरण करते है, साथ ही अपने अस्पताल में आने वाले ओ पी डी में मरीज को इलाज के बाद जहा पौधे देते हैं वही अस्पताल में भर्ती मरीजों को डिस्चार्ज के समय भी पौधे देते है, रविश की एक बड़ी बात यह है कि इनकी पहल में अब कुशीनगर प्रशासन भी आगे आ गया और जहाँ पौधे की जरूरत होती है. वहां रवीश कुमार पहुंच कर अपनी सेवा देते हैं.

आज जो पर्यावरण हमारी बड़ी लापरवाही और स्वार्थ के कारण खतरे में है. उसको बचाने के लिए यह पहल रविश कुमार की सबसे अनोखी पहल है. जाहिर है वक्त रहते हमको भी पर्यावरण के प्रति संवेदनशील होने की जरूरत है. वरना इसी तरह हर साल सूरज का पारा चढ़ता रहेगा और दिनों दिन बढ़ते प्रदूषण के चलते आने वाले समय में हमारा घरों से निकलना दूभर हो जाएगा. साथ ही पानी गिरता जलस्तर जहां लोगों की सबसे भयावह समस्याओं में से एक ही ठीक उसी तरह जलवायु परिवर्तन भी सबसे बड़ी समस्या में से एक ही.

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