यशस्वी जायसवाल: सपने जो जिद पर पूरे होते हैं

‘सपना, वो नहीं है जिसे आप रात में सोते समय देखते हो, सपना तो वह होता है जो आपको सोने नहीं देता है। पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम की कही ये बातें लाखों भारतीयों को अपने सपने पूरा करने की ताकत देती हैं। शायद कलाम साहब ने जो बाते कहीं थी, उसी बात से इत्तेफाक रखने वाले एक लड़के को हम सबने मंगलवार को टीवी पर  अंडल—19 वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ खेलते हुए देखा। इस लड़के की बल्लेबाजी की देशभर में वाहवाही हुई। 4 फरवरी के इस मैच में पाकिस्तान के 173 का पीछा करने उतरी भारतीय टीम की सलामी जोड़ी यशस्वी और दिव्यांश ने मिलकर नॉटआउट 176 जोड़ दिए और मैच को भारत के नाम कर दिया। इस मैच में एक बार में कई रिकॉर्ड तो बने ही लेकिन सबसे ज्यादा जिसकी चर्चा हुई वो थे यशस्वी जायसवाल। जिन्होंने इस मैच में नाबाद 105 रन बनाएं। भारत ने 10 विकेट से यह मैच जीता।  

क्रिकेटर बनने के सपने ने यशस्वी को सोने नहीं दिया

yashasvi jaiswal

यशस्वी की चर्चा इस बात से तो हो ही रही है कि, उनके शतकीय पारी के कारण भारत ने इतनी शानदार जीत हासिल कि, बल्कि उनकी चर्चा ज्यादा उनके संघर्षो को लेकर हो रही है। दरअसल जिस लड़के को लोगों ने अपनी टीवी स्क्रीन पर पाकिस्तान के गेंदबाजों को धोते हुए देखा.  उस लड़के ने इंटरनेशनल मैच के ग्राउंड तक का सफर तय करने के लिए गोलगप्पे तक बेचे हैं। यशस्वी जायसवाल नाम के यूपी के भदोही के रहने वाले इस लड़के ने अपनी छोटी उम्र में ही क्रिकेटर बनने का सपना देखा और फिर इस सपने ने उसे कभी ठीक से सोने नहीं दिया। पापा छोटी सी दुकान चलाते थे और भदोही में कोई क्रिकेट कोचिंग कराने वाली जगह भी नहीं थी ऐसी स्थिति में ज्यादात्तर सपने दम तोड़ देते हैं, लेकिन सपने पूरे करने की जिद थी तो पापा ने मुंबई में रहने वाले एक रेश्तेदार के यहां भेज दिया। लेकिन कुछ दिन बाद ही रिश्तेदारों से बनी नहीं और यशस्वी वहां से निकल कर मुंबई के कालबा देवी में एक डेयरी में काम करने की शर्त पर रहने लगे।

लेकिन जल्द ही यह जगह भी उसे छोड़नी पड़ी क्यों कि उसे दिन भर क्रिकेट से फुर्सत नहीं मिलती और रात में लौटते ही उसे नींद लग जाती… तो काम कारने का तो कोई चांस ही नहीं बनता था। बस फिर क्या था, डेरी वाले ने भी कुछ दिन बाद उसे अपना बोरिया बिस्तर बांध लेने को कह दिया। लेकिन 11 साल  के यशस्वी ने जल्द ही आज़ाद मैदान के पास अपना नया ठिकाना खोज लिया। यहां मुस्लिम यूनाइटेड क्लब में ग्राउंड्स मैन के संग उसने रहने का इंतज़ाम तो कर लिया, लेकिन समस्या यह थी कि रहने के लिए और खाने के लिए पैसे कहां से आएंगे। इस सब के बीच सबसे बड़ी बात यह रही कि यशस्वी ने अपने साथ हुई अभी तक की सारी घटना को भी सीक्रेट रखा हुआ था। उसके मम्मी पापा को तो यहीं लगता था कि बेटा रिश्तेदार के यहां रहता है, लेकिन ऐसा था नहीं। यशस्वी की मानें तो अपने दर-दर भटकने की बात उन्होंने अपने पैरेंटस को इसलिए नहीं बताई क्योंकि उन्हें डर था कि घर पर पता चला तो उनका क्रिकेट के ग्राउंड तक पहुंचने का रास्ता बंद हो जाएगा।

जब पैसे बचाने के लिए बेचन पड़े गोलगप्पे

yashasvi jaiswal

जब इंसान के अंदर भूख होती है तो उसका दिमाग भी उस भूख को खत्म करने के लिए कई तरह के आइडियाज देने लगता है। यशस्वी को इस समय दो तरह की भूख थी पहली तो अपने सपने को पूरा करने की और दूसरी जिसकी जरूरत उसी वक्त थी यानि पेट की भूख। बस इस भूख ने एक आइडिया दे दिया। 11 साल के लड़के ने मैदान के बाहर पानी-पूरी का स्टॉल लगा लिया। यह सब बातें साल 2013 की हैं। अभी तक याशस्वी को कोई नहीं जानता था लेकिन अपने सपने के प्रति उसकी चाहत को सबने 2014 में देखा। जब जाइल्स शील्ड स्कूल मैच में अंजुमन इस्लाम हाईस्कूल की ओर से खेलते हुए राजा शिवाजी विद्यामंदिर स्कूल के खिलाफ नाबाद 319 रन बनाए और साथ ही 13 विकेट भी यशस्वी ने झटके तो लोगों की नज़र उन पर पड़ी।

यह पहली बार था जब यशस्वी ने क्रिकेट में नाम कमाया और इसके बाद तो फिर वे रुके नहीं। फिर उनकी चर्चा हुई 2019 के अक्टूबर में हुए विजय हजारे ट्रॉफी के दौरान,  जब बेंगलुरू में मुंबई और झारखंड का मुकाबला हुआ। मुंबई ने 3 विकेट खोकर 50 ओवर में 358 रन बनाए, जिसमें 203 रन यशस्वी के बल्ले से निकले। इसमें उनके बल्ले ने 17 गेंदों को बाउंड्री के पार और 12 गेंदों को आसमानी मार्ग से बाउंड्री के पार पहुंचाया। यानी 140 रन केवल चौके-छक्के से बने। इस सब के अलावा वे 17 साल और 292 दिन की उम्र में लिस्ट ए (वनडे) क्रिकेट में दोहरा शतक बनाने वाले पहले बल्लेबाज हैं। लेकिन बहुत कम लोग ही जानते हैं कि, इस ट्रॉफी के लिए यशस्वी ने अपना एग्ज़ाम छोड़ा था।

यशस्वी जायसवाल: अभी तो एक तारे का जन्म हुआ है, उसका चमकना बाकी है

पूर्व भारतीय ओपनर और 20 साल से घरेलू क्रिकेट में सक्रिय वसीम ज़ाफर इसे यशस्वी के जिद की जीत बताते हैं. इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए उन्होंने कहा, मुझे याद नहीं कि इससे पहले कब किसी क्रिकेटर ने अंडर-16, अंडर-19, अंडर-23 और रणजी ट्रॉफी एक ही सीजन में खेला था। लेकिन उसने ऐसा किया। ये उसकी काबिलियत दिखाता है। उसने हर जगह परफार्म किया है। 17 साल की उम्र में उसने वरुण अरोन और शाहबाज नदीम जैसे गेंदबाजों का सामना कर सेंचुरी बनाई है। ये कोई छोटी बात नहीं है कि एक 17 साल के लड़के ने वनडे क्रिकेट में दोहरा शतक बनाया है। अभी तो यह एक शुरुआत भर है।

वसीम ज़ाफर की यह बाते सच है कि, अभी तो यह बस शुरूआत है। यशस्वी ने अभी तो अपने सपने के पूरा होने की तरफ कदम रखा है। वह दिन दूर नहीं जब वे अपने सपने को पूरा भी करेंगे। लेकिन जब उनका सपना पूरा होगा तो उनकी यह कहानी फिर से कही जाएगी …. कि हां एक बच्चा था जिसने क्रिकेटर बनने का सपना देखा और उसके इस सपने ने उसे कभी सोने नहीं दिया। अपने सपने के लिए उसने पानी पूरी तक बेची ओर अपने मां—बाप से अपनी तकलीफों को भी छुपाया। यशस्वी का यह सफर एक स्टार के पैदा होने का रहा है, लेकिन अब उसके आगे का सफर इस स्टार के चमकने का होगा। 

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