मिलिए आइस मैन आफ इंडिया से, जिनके पास है Artificial glaciers बनाने का तरीका

क्या आपको पता है कि हमारे भारत में एक सुपरहीरो हैं जिन्हें आइस मैन कहा जाता है? नहीं जानते तो हम आपको इस आर्टिकल में उनके बारे में बताएंगे। दरअसल इंडिया के जिस सुपरहीरो की हम बात करने जा रहे हैं वे लद्दाख के रहनेवाले हैं और उन्हें सुपरहीरो इस लिए कहा जाता है क्यों कि उनके एक आइडिया के कारण लद्दाख जो कभी शुष्ख वातावरण के लिए जाना जाता था वहां भी हरियाली की चादर पसर गई।

लद्दाख के जिस सुपरहीरो की हम बात कर रहे हैं उनका नाम है चेवांग नॉरफेल। चेवांग नॉरफेल को आज ‘Ice Man of India’ के नाम से भी जाना जाता है। उन्हें 2015 में भारत सरकार द्वारा पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया है। अब आपके मन में इतनी क्यूरोसिटी तो उत्पन्न हो ही गई होगी कि आखिर चेवांग नॉरफेल ने ऐसा क्या किया है।

दरअसल लद्दाख देश के अन्य हिस्सो से काफी अलग है। यह बहुत ही उंचाई पर स्थित है। जिसके कारण यहां पानी की काफी कमी है। लेकिन यह पूरा सच नहीं है। दरअसल लद्दाख में पानी तो है लेकिन वो ग्लेशियर के रूप में है। इसी ग्लेशियर से सिंधु नदी भी निकलती है लेकिन उसका सारा पानी बह कर पड़ोसी देश पाकिस्तान में चली जाती है। जिसके कारण यहां के लिए पानी नहीं बचता। ऐसे में लद्दाख जहां कि सबसे ज्यादा अबादी किसान है और खेती पर निर्भर है उसके लिए काफी दिक्कत हो जाती है और ये दिक्कत सबसे ज्यादा मई जून के दिनों में ही होती हैं। क्योंकि इन दिनों में ग्लेशियर तेजी से पिघलता है।

चेवांग नॉरफेल ने बनाई आर्टिफिसियल ग्लेशियर

लद्दाख में पानी की इसी दिक्कत को दूर करने के लिए चेवांग ने आर्टिफिसियल ग्लेशियर बनाने का आइडिया ढूंढ़ निकाला। इस बारे में वे बताते हुए कहते हैं आर्टिफिसियल ग्लेशियर वह तकनीक है जिसके जरिए सर्दी के सीजन के बेकार हो जानेवाले पानी को इकठ्ठा करके इसके जरिए अपेक्षाकृत कम ऊंचाई पर कृत्रिम ग्लेशियर बनाई जाती है। ताकि जरूरत पड़ने पर इस पानी का आसानी से इस्तेमाल हो सके। उन्होंने पूरे लदख में ऐसे 17 कृत्रिम ग्लेशियर बनाएं हैं।


ऐसे आया ‘Ice Man of India’  को ये आइडिया!


चेवांग नॉरफेल इस बारे में बताते हुए कहते हैं कि जब वे छोटे थे तब उस समय उन्होंने देखा था कि एक ठंड के कारण आधे जमें हुए पाइप से पानी निकलकर एक गढ्ढे में गिर कर जम जाती थी। इसी दृृश्य को उन्होंने 1986 में अपने इनोवेशन का आधार बनाया। उनके इस नए इनोवेशन के कारण आज लद्दाख के किसान गेहूं ओर जौ के अलावे कई प्रकार कि फलें और सब्जियां उगाने में सक्षम हो सके हैं। 

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