भारत की पहली महिला जासूस,जिन्होंने सुलझाए 80,000 केस

आज ज़माना इतना बदल गया है कि शहर की महिलाएं ही नहीं बल्कि ग्रामीण महिलाएं भी अब अपनी पसंद का काम कर रही हैं। आज महिलाएं खुलकर डॉक्टर, इंजीनियर आर्किटेक्ट और भी ना जानें कितने ही ओहदों में बैठी हैं। मगर फिर भी ऐसी महिलाएं आज भी बहुत कम हैं जो जासूस बनना चाहती हैं। फिर सोचिए जब आज महिलाएं इस पेशे में कम हैं तो सोचिए कि क्या 90 के दशक में कोई महिला इस पेशे में होगी ! वो भी तब जब महिलाओं के ऊपर इतनी पाबंदियां थीं। दरअसल उस ज़माने में भी एक ऐसी दिलेर महिला थीं जिन्होंने सबसे अलग हट कर इस पेशे को में आने की हिम्मत दिखाई। और क्या लगता है आपको क्या ये उनके लिए आसान रहा होगा ! जी नहीं, बिलकुल भी नहीं क्योंकि उन्हें इसके लिए कई पापड़ बेलने पड़े। ना जानें कितनी ही दिक्कतों का सामना करना पड़ा। जासूस बनने में रोमांच तो है लेकिन जोखिम भी बहुत है। मगर फिर भी आजाद भारत की पहली महिला जासूस कही जाने वाली रजनी पंडित ने ये कर दिखाया। दरअसल महाराष्ट्र में जन्मीं और पली-बढ़ीं रजनी पंडित ने कभी सोचा ही नहीं था कि वो डिटेक्टिव बनेंगी। दरअसल इसकी शुरुवात ऐसे हुई कि जब रजनी कॉलेज में थी तब उनकी क्लासमेट फोन पर किसी को बता रही थी कि कैसे वो अपनी फैमिली को बेवकूफ बना रही है। ये सुनकर रजनी को थोड़ा अजीब लगा और उनके दिमाग में खुरापात आई कि क्यों न इस लड़की के बारे में जाना जाए कि ऐसा क्या है जो ये अपने घरवालों को बेबकूफ़ बनाए रही है। रजनी ने उस लड़की का पीछा किया तो पाया कि वो गलत लोगों से मिलती जुलती है। फिर रजनी ने उस लड़की के परिवार को इस सम्बन्ध में जानकारी दी। उस लड़की के परिवार ने रजनी को उन्होंने धन्यवाद देते हुए कहा कि अरे आप तो स्पाई हो ! बस उसी वक़्त रजनी को लगा कि बस अब तो यही राह चलनी है… मगर रजनी के पिता CID में थे और बिल्कुल नहीं चाहते थे कि रजनी ये सब करें। मगर पिता को थोड़ा मनाने के बाद वो मान गए। रजनी कहती हैं कि ‘उस वक्त पता नहीं था कि मैं ही वो पहली महिला हूं जो डिटेक्टिव होने वाली है ! मतलब.. भारत की पहली लेडी डिटेक्टिव।

वहीं, परिवार के अन्य सदस्य और रिश्तेदार टीका-टिप्पणी करने से बाज नहीं आते। लोग उनपर शक करते थे कि ये तो एक महिला हैं तो ये कैसे जासूसी कर पाएंगी। मगर उन सबको दरकिनार कर रजनी आगे बढ़ती चली गई। जिसके बाद रजनी  ने जानकारी हासिल करने की कोशिश की कि प्रफेशनली जासूसी के काम के लिए क्या कोई लाइसेंस चाहिए होता है तो उन्हें बताया गया कि ‘ऐसा कोई लाइसेंस नहीं मिलता। जिसके बाद उन्होंने 3 साल तक काम किया और जब इसी बीच उनका इंटरव्यू छपा तो लोगों में पहचान बननी शुरू हुई। रजनी ने 1988 में रजनी इन्वेस्टिगेशन्स नामक कंपनी बनाई जिसमें 3 लोग थे। आज इस कम्पनी से 20 लोग बतौर जासूस जुड़े हैं जो स्वतंत्र रूप से भी जासूसी के प्रोजेक्ट लेते हैं। आप जानकर हैरान होंगे कि अब तक रजनी ने 80 हजार से ज्यादा केस सुलझाए हैं।

रजनी को पहला अवॉर्ड 1990 में मिला और आज 30 साल से कम समय में ही उन्हें 67 अवॉर्ड मिल चुके हैं। पहले तो लोग कहते थे कि जो औरत लोगों का घर तोड़ रही है उसे क्यों अवॉर्ड दिया जाए। मगर रजनी का इस बारें में बिलकुल अलग ही सोचना था वो कहती थीं कि समस्या के विकराल होने से पहले ही अगर उसे ठीक कर दिया जाए तो इसमें बुराई ही क्या है। रजनी को पिछले ही साल राष्ट्रपति कोविंद ने उन्हें ‘फर्स्ट लेडी डिटेक्टिव’ का अवॉर्ड दिया है। ये अवॉर्ड उन्हें महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की ओर से दिया गया। ये सफर रजनी के लिए आसान नहीं था। लोग कहते थे कि जो औरत लोगों का घर तोड़ रही है उसे क्या अवॉर्ड देना चाहिए लेकिन बावजूद इसके रजनी ने किसी की बातों को अपन उपर हावी नहीं होने दिया और यही कारण है कि आज सफलता उनके कदमों में हैं।

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