भारत की पहली ट्रांसजेंडर मॉडल अंजली अमीर की कहानी

ट्रांसजेंडर, हिजड़े, किन्नर या फिर छक्के.. ये कुछ चुनिंदा शब्द हैं जो मर्द और महिला से इंसानों के एक अलग जेंडर को डिनोट करती है। लेकिन जब भी इनकी बात होती है तो सिर्फ मजाक ही बनता है। मतलब थर्ड जेंडर को सोसायटी में वो जगह नहीं मिली है जो किसी महिला या पुरूष को दी जाती है। अक्सर इन लोगों की जिंदगी बड़ी ही दिक्कतों से भरी होती है। सोसायटी इन्हें अपने बीच एक्सेप्ट नहीं करती। ऐसे में ज्यादातर किन्नर समाज की मुख्यधारा में सिर्फ कुछ हद तक ही जुड़े हुए दिखते हैं। लेकिन अब वक्त बदल रहा है। ऐसे में किन्नर समाज के लोग भी दिक्कतों को सहते हुए अपनी कामयाबी की कहानी अब खुद लिख रहे हैं ओर उनकी स्टोरी लोगों को इंस्पायर कर रही है। ऐसी ही एक ट्रांसजेंडर है अंजली अमीर। जो भारत की पहली ट्रांसजेंडर मॉडल हैं और अब मलयालम फिल्म इंडस्ट्री का उभरता हुआ चेहरा भी। बता दें कि, उन्होंने मलयालम फिल्मों के सुपरस्टार ममूटी के अपोजिट एक फिल्म में अपने अभिनय से कईयों का दिल जीता है।

लेकिन एक ट्रांसजेंडर होने के कारण अंजली को यह कामयाबी कोई रातों—रात नहीं मिली है। 24 की उम्र में सफलता की इन ऊंचाइयों तक पहुंचने के लिए उन्हें कई प्रॉब्लम्स फेस करने पड़े हैं। जिनमें समाज का हर वो डिक्रिमिनेशन है जिसे एक किन्नर को झेलना होता है और कहीं न कहीं हम और आप भी इस डिक्रिमिनेशन को करने वालों में शामिल होते हैं। अपनी लाइफ स्टोरी के बारे में बताते हुए अंजली ने एक इंटरव्यु में बहुत-सी बातें कहीं थी जिससे ट्रांसजेडर के प्रति मां—बाप, रिश्तेदार, गांव समाज का रवैया हमे पता चलता है।

Anjali Ameer

Anjali Ameer- ’10वीं क्लास में पता चला ”मै मर्द के शरीर के अंदर एक औरत हूं”

एक चैनल को दिए अपने इंटरव्यू में अंजली ने अपने ट्रांसजेंडर होने का पता चलने की बात की स्टोरी साझा की थी। उनके अनुसार वे एक रूढ़ीवादी विचारों वाले मुस्लिम परिवार में पैदा हुईं थीं। उस समय उनका नाम जमशीर था। जमशीर की मां तब ही उन्हें छोड़ दुनिया को अलविदा कह गई थी जब वे सिर्फ 8 महीने की थीं। इसके बाद उनका ख्याल उनकी मौसी रखती थी। वे बताती हैं कि, जब वो स्कूल जाने वाली उम्र में थी तो उनकी ज्यादात्तर पसंदीदा चीजें महिलाओं से जुड़ी हुईं थी और उनकी ज्यादात्तर दोस्त लड़कियां ही होती थीं। वो बताती है कि, उन्हें उस वक्त ज्वेलरी, मेकअप, लड़कियों की तरह कपड़े पहनना पसंद था। यहां तक की वे कभी—कभी हिल्स पहनकर स्कूल चलीं जाती थीं।

अंजली बताती हैं कि, जब वे 10वीं क्लास में थी तब उन्हें यह रियलाइज होने लगा कि, वो एक महिला हैं जिन्हें हर वो चीज़ पसंद है जो महिलाओं को पसंद होती है। अंजली की मानें, तो उन्होंने उस समय अपनी इस फीलिंग के बारे में बहुत कुछ पढ़ा और फिर रियलाइज किया कि, वो असल में एक लड़की हैं जिसका शरीर सिर्फ मर्दो की तरह है। लेकिन अंजली की इस बात को उनके परिवार में कोई एक्सेप्टेंस नहीं मिली और आखिरकार उन्हें अपने घर से भागना पड़ा।

Anjali Ameer की जिन्दगी की असल जंग घर से दूर शुरू हुई

अंजली की मानें तो घर से भागने का फैसला उन्होंने एक लड़के के संग लिया था जिसे वो चाहती भी थीं। वे उसके संग भाग कर चेन्नई पहुंची। यहां उन्हें वो लोग मिले जो उन्हीं की तरह थे। ऐसे में अंजली को एक परिवार मिल गया जिसने मां की तरह उनकी देख—रेख की। चेन्नई में उन्होंने सड़क पर अन्य किन्नरों की तरह भीख भी मांगी और सोशल फंक्शनों में डांस भी किया। इस दौरान उन्होंने समाज का वो रूप देखा जिसने उनके अंदर से बसे समाज की सीधी और साफ—सुथरी तस्वीर धूमिल कर दी। वहीं इस दौरान एक घटना ऐसी भी हुई जिसने अंजली को अंदर से तोड़ दिया। अंजली को इसी दौरान पता चला कि, जिस लड़के पर वो सबसे ज्यादा भरोसा करतीं हैं वो उसे थोड़ा-सा भी प्यार नही करता। दोनों का रिश्ता भी खत्म हो गया। इस घटना ने उन्हें इतना तोड़ दिया कि, एक समय तो उन्होंने सुसाइड करने तक का प्रयास किया।

Anjali Ameer

मुश्किलों को जिया और हुईं कामयाब 

लेकिन इन सभी दिक्क्तों को अंजली अमीर ने आगे फेस किया। वो कोयंबटूर पहुंची जहां उन्हें ‘ट्रांस—मम्मी’ मिली। अंजली बताती हैं कि, ‘ट्रांस—मम्मी’ के कारण ही वो आज इस मुकाम पर है। वो कहती हैं कि, इस दौरान उन्होंने हर तरह के काम किए। एक कॉल सेंटर में काम करने से लेकर ब्यूटी पार्लर तक का काम करते हुए उन्होंने पाई—पाई जोड़ी और अपनी सर्जरी और लेज़र ट्रीटमेंट का खर्च उठाया। उन्हें अपना सेक्स रिअसाइनमेंट कराने में तीन साल तक का समय लग गया। अंजली की लाइफ उस समय बदली जब वो मिस कोयंब्टूर और मिस स्पेनडीड इंडिया 2015 बनी। इन प्रतियोगिताओं में मिली कामयाबी ने उनके संकोची व्यक्तित्व को बदल कर रख दिया था और उनके अंदर एक अलग ही तरह का कॉन्फिडेंस आ गया। उनकी लाइफ पर बनी एक डॉक्यूमेंट्री को देखने के बाद मलयालम फिल्मों के सुपरस्टार ममूटी ने उन्हें अपने संग अपनी फिल्म पेरान्बू में काम करने का मौका दिया। फिल्म में उनके अभिनय को काफी सराहना मिली।

अंजली बताती हैं कि, उन्हें अपने ट्रांस—वूमेन होने पर गर्व है और अपनी जर्नी पर किसी भी तरह का अफसोस नहीं हैं। आज अंजली लाखों ट्रांसजेंडरों के लिए एक आदर्श बन गईं हैं। आज उन्होंने अपनी मेहनत से एक इतिहास बनाया है और मलयालम फिल्म इंडस्ट्री में कोई पहली ट्रांस—महिला एक्ट्रेस है तो वो अंजली ही हैं। उन्होंने अपने लिए तो एक मुकाम हासिल किया ही है लेकिन साथ ही उन्होंने कईयों के लिए एक रास्ता भी तैयार कर दिया है जो समाज में बदलाव का रास्ता बन चुका है।

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