भारत की अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका देगा कोरोना वायरस, गिरेगा विकास दर

दुनियाभर में कोरोना वायरस की महामारी ने कोहराम मचा रखा है। कल तक जो वायरस सिर्फ चीन में लोगों की जान ले रहा था आज वो दुनियाभर के 130 देशों में फैल चुका है। भारत में भी यह वायरस धीरे— धीरे अपने पांव जमा रहा है। भारत में कोविड—19 के कुल 168 केस अब तक सामने आए हैं और 3 लोग इस वायरस की चपेट में आने से अपनी जान गवां चुके हैं। लेकिन दुनिया की तुलना में भारत में अभी भी कोरोना बहुत हद तक कंट्रोल में है। भारत में अभी तक 8 लोगों को ठीक भी कर लिया गया है जो बड़ी कामयाबी है। लेकिन पिछले कुछ दिनों में मौसम में आए बदलाव ने सरकार समेत लोगों की चिंताएं भी बढ़ा दी हैं।

वहीं इन्हीं दिनों में कोरोना के मामले तेजी से बढ़े हैं। लेकिन इसी बीच एक अच्छी खबर यह है कि, अभी तक यह वायरस अपने तीसरे स्टेज में नहीं पहुंचा है। हाल ही में डॉक्टरों की ओर से किए गए टेस्ट से यह पता चला है कि, अभी भी यह वायरस समाज के बीच में नहीं फैला है। यह वायरस उन्हीं में दिख रहा है जिन्होंने पूर्व में देश से बाहर यात्रा की है। कोरोना वायरस के सबसे ज्यादा मामले महाराष्ट्र से सामने आए हैं। यहां 42 मामले सामने आए हैं जिसमें 3 विदेशी मूल के लोग हैं। वहीं केरल में कोरोना के 27 कन्फर्म मामले अभी तक सामने आएं हैं जिसमें 2 विदेशी हैं। वहीं राजधानी दिल्ली में भी इस वायरस से 10 लोग पॉजिटिव पाए गए हैं।

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Corona Virus को लेकर एहतियात

कोरोना वायरस को लेकर देश की सरकार कई तरह के एहतियात बरत रही है। एयरपोर्ट पर लोगों की स्क्रिनिंग हो रही है, वायरस से पॉजिटिव लोगों को आइसोलेट किया जा रहा है और उन्हें निगरानी में रखा जा रहा है।  मंगलवार को सरकार की ओर से बाहर के कई देशों से आने वाले लोगों की एंट्री पर भी रोक लगा दी है। अफगानिस्तान, फिलीपींस, मलेशिया से आने वाले यात्रियों को तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया है। वहीं यूरोपीय देशों से आने वाले लोगों पर भी यात्रा प्रतिबंध लगा दिया गया है। 18 मार्च से टर्की और यूके के यात्रियों पर भी यात्रा प्रतिबंध लगा दिया गया है।

जब चीन में कोरोना का आतंक फैला हुआ था, तब भारत उन पहले देशों में से था जिसने इसके खिलाफ तैयारी करनी शुरू कर दी थी। भारत ने अपने बॉर्डर सील किए, लोगों के विजा कैंसिल किए और आइसोलेशन की प्रक्रिया को तेज किया है। वहीं बसों, मेट्रो और ट्रेनों को भी लगातार सेनेटाइज किया जा रहा है। देशभर में इस वक्त केन्द्र सरकार की ओर से 62 टेस्टिंग साइस्ट डेवलप की गईं हैं। वहीं 9 और लैब्स है जो जल्द ही काम करने लगेंगी।

फिलहाल यह ज्यादा स्तर पर है नहीं। भारत में कोरोना वायरस इसलिए भी तेजी से नहीं फैल रहा है क्योंकि यहां की आबादी भी अलग तरह की है। कोरोना वायरस का ज्यादा इफेक्ट उम्र दराज और 10 साल से कम उम्रवाले लोगों पर हो रहा है। भारत में युवाओं की संख्या ज्यादा है इसलिए इस वायरस का असर भी अभी कम दिख रहा है। लेकिन कोरोना के संग भारत के लिए एक और बड़ी समस्या मुंह बाए खड़ी हो गई है और वो अर्थव्यवस्था में और गिरावट आने की संभावना से जुड़ी हुई है।

भारतीय इकोनॉमी पर Corona Virus का असर

कोरोना वायरस ऐसा है जिसने लोगों के बीच दूरियां ला दी हैं। यह एक इंसान से दूसरे इंसान के बीच फैलता एक संक्रमित रोग है। ऐसे में भीड़—भाड़ वाली जगहों पर जाने से लोग बच रहे हैं। ज्यादात्तर टूरिस्ट प्लेसेज को बंद कर दिया गया हैं। ऑफिसों में लोग जा नहीं रहें और वर्क फ्रॉम होम वाला कल्चर बड़े स्तर पर फॉलो हो रहा है। कई देशों ने आयात और निर्यात पर भी रोक लगा दी है यानि ट्रेडिंग भी ठप है। चीन में कोरोना के प्रकोप के कारण वहां का रॉ-मेंटेरियल मार्केट बंद है ऐसे में भारत में जो इलेक्ट्रीक सामानों के रॉ आते हैं उनमे भारी कमी अब देखने को मिल सकती है।

ग्लोबलाइजेशन के इस दौर में जो दुनिया एक गांव की तरह जुड़ी हुई है उसमें कोरोना ने इतनी दूरियां ला दी हैं कि, अब इसका सीधा असर दुनियाभर के देशों की इकोनॉमी पर देखने को मिल रहा है। भारत इससे अछूता नहीं है। भारत की आर्थिक स्थिति पहले से डामाडोल है और स्लोडाउन का मौसम चल रहा है ऐसे में अब कोरोना के कारण इकोनॉमी को बड़ा झटका लगने की आशंकाएं कई रिपोर्ट्स में लगाई गई हैं। मंगलवार को भारतीय स्टेट बैंक की शोध रिपोर्ट और मूडिज की रिपोर्ट में बताया गया है कि, भारत की आर्थिक गतिविधियों खासतौर पर ट्रांसपोर्टेशन, पर्यटन, होटल, जैसे उद्योगों पर कोरोना का सीधा असर पड़ेगा। कई उत्पादों की आपूर्ति भी प्रभावित होगी जिससे कीमतें भी बढ़ सकती हैं।

वहीं मूडिज ने चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की विकास दर को 5.4 फीसद से घटाकर 5.3 फीसद कर दिया है। बता दें कि, दोनों की रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब भारतीय रिर्जव बैंक की ओर से भी अर्थव्यवस्था पर कोरोना के प्रभाव के अध्ययन करने की बात कही गई है। एसबीआई की रिपोर्ट में तो साफतौर पर कहा गया है कि, जैसे हालात बन रहे हैं उससे लगता है कि, एविएशन, ट्रांसपोर्ट, होटल, धातु, ऑटो कंपोनेंट व टेक्सटाइल पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा। बता दें कि, सिर्फ ट्रांसपोर्ट, पर्यटन और होटल भारतीय सकल घरेलू उत्पाद को 0.90 फीसदी तक प्रभावित कर सकता है।

कोरोना के कारण यात्रा प्रतिबंध लगा है। ऐसे में 20 से 25 दिनों तक विदेशी नागरिक भारत नहीं आ सकेंगे। जिससे भारत को पांच से 7 अरब डॉलर का नुकसान होगा। घरेलू ट्रेनों और उड़ानों के रद्द होने और यात्रियों की कमी के कारण इन उद्योगों को प्रतिमाह 3500 करोड़ का नुकसान हो सकता है। इस पूरे मामले को लेकर मूडिज की रिपोर्ट कहती है कि जैसे—जैसे कोरोना वायरस का प्रभाव बढ़ रहा है यह ग्लोबल इकोनॉमी के लिए बड़ी दिक्कते पैदा कर रहा है, ऐसे में देखना है कि वायरस का प्रभाव कितने दिनों के अंदर खत्म होता है। यह जितना जल्दी होगा उतना ही अर्थव्यवस्था के लिए फायदेमंद होगा।

खैर अर्थव्यवस्था को फिर से संभाला जा सकता है। इसकी चिंता जायज है लेकिन अभी ऐसे समय में जरूरी है कि कोरोना से लड़ने में देश को सक्षम बनाया जाए। फिलहाल भारत में कोरोना वायरस पहले या दूसरे स्टेज में ही है, यह लोकलाइज है और अभी कम्यूनिटी यानी सामाजिक स्तर पर नहीं पहुंचा है, लेकिन इससे बड़ी बात यह है कि, यह वायरस भारत में मौजूद है। ऐसे में यह जरूरी है कि इससे बचाव में और नागरिकों की देख-रेख में सरकार ज्यादा बेहतर तरीके से ध्यान दे।  

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