भारत का एकलौता Zero Waste Producing Juice Shop, यहां बहुत कुछ है यूनिक

हेल्दी लाइफ स्टाइल के लिए जरूरी है हर दिन एक गिलास फ्रूट जूस, जूस हमें हेल्दी और फिट रखने में काफी मदद करता है। आमतौर पर शहरी क्षेत्रों में आपकों हर एक मेट्रो स्टेशन, बस स्टॉप और यहां तक की भीड़—भाड़ वाली गलियों में एक से ज्यादा जूस कॉर्नर तो मिल ही जाएंगे। सुबह में कोई दुकान जल्दी खुले या न खुले लेकिन जूस शॉप… यह दुकान जरूर खुलती है। क्योंकि जॉगिंग और सुबह—सुबह सैर—सपाटे पर निकले लोग एक ग्लास जूस अपनी हेल्दी लाइफ को बनाए रखने के लिए जरूर पीते हैं। लेकिन क्या हमने कभी सोचा है कि, इन हैल्दी जूस की दुकानों से कुल कितना वेस्ट मेटेरियल प्रोड्यूस होता है? जिसका एक बड़ा हिस्सा प्लास्टिक भी है। खैर हम क्यों सोचें इसके बारे में, हम तो पैसा देते हैं, जूस खरीदते हैं, पीते हैं और डस्टबिन में पेपर या प्लास्टिक वाली ग्लास और स्ट्रॉ डालकर चलते बनते है। हां जिम्मेदारी तो दुकानदारों की ही बनती है कि, वे अपने जूस कॉर्नर को जीरो वेस्ट प्रोडयूसिंग शॉप बनाएं।

जीरो वेस्ट प्रोडयूस शॉप, कहने और सुनने में हल्का लगता है, लेकिन जब बात प्रैक्टिकली अंजाम देने की आती है तो सोचने में बाल की खाल निकालनी पड़ती है। लेकिन बैंगलूरू में एक जूस शॉप ने इसे प्रैक्टिकली पॉसिबल किया है और अपनी कमाई को भी बढ़ाया है। खास बात यह है कि, लोग इस दुकान पर जूस इसलिए पीने आते हैं क्योंकि जूस सर्व करने का जो इनका जीरो वेस्ट प्रोडयूसिंग तरीका है वो सबसे यूनिक और सबसे बेस्ट है। बैंगलुरू के इस नो वेस्ट जूस शॉप की सबसे बड़ी खासियत यह है कि, यहां आपको प्लास्टिक की कप में जूस पीने को नहीं मिलेगा बल्कि आपको जूस पीने को मिलेगी फलों वाले कंटेनर में! क्यों सरप्राइज हो गए न। जूस वो भी फ्रूट शेल्स में! What an Idea Sir ji!

Zero Waste Producing Juice Shop

ऐसे आया  Zero Waste Producing Juice Shop का आइडिया

बैंगलुरू के इस जीरो वेस्ट जूस शॉप के ऑनर हैं राजा। मल्लेश्वरम में दो मंदिरों के बीच में राजा की यह जूस शॉप है और इसी लोकेशन ने उन्हें रेडियो जॉकी से एक एंटरप्रन्योर बनने के लिए प्रेरित किया। राजा की मानें तो 45 साल से उनके पापा इस जूस शॉप को चला रहे हैं, लेकिन उनकी मौत के बाद यह जूस शॉप बंद सा पड़ गया जिसे बाद में उन्होंने फिर से शुरू करने का फैसला लिया। राजा बताते हैं कि, उनके पापा भले ही एक जूस शॉप चलाते थे लेकिन वे चाहते थे कि, उनका बेटा थोड़ा डिफ्रेंट काम करे और इसीलिए राजा ने पहले बायोमेडिकल इंजिनियरिंग की और फिर रेडियो जॉकी बन गए। लेकिन उनके पापा की मौत के बाद उन्होंने पापा के बिजनेस को ही आगे बढ़ाने का निर्णय लिया और वो भी पापा की चाहत के अनुसार, यानि कुछ डिफ्रेंट तरीके में। तो राजा ने जूस शॉप तो खोली लेकिन दुनिया के बाकी जूस शॉप से बिल्कुल अलग और यूनिक।

‘ईट राजा’ जूस शॉप को जीरों वेस्ट प्रोडयूसिंग बनाने के आइडिया के बारे में राजा बताते हैं कि, जब वो रेडियो जॉकी के तौर पर काम किया करते थे तभी उनकी जान—पहचान वेस्ट मैनेजमेंट को लेकर काम करने वाली दो हस्तियों वाणी मूर्ति और मीनाक्षी भारथ से हुई थी। उन्हें वाणी मूर्ति से पता चला कि, वो अपनी जूस की दुकानों में आने वाले खट्टे फलों के वेस्ट को फेंकने के बजाए उससे नेचुरल क्लीनर बना सकते हैं, बस फिर क्या था उन्होंने यह काम शुरू कर दिया। लेकिन दुकान फिर भी चली नहीं। आलम यह हो गया कि, एक दिन में सिर्फ पचास रुपये की कमाई होती थी। मायूस राजा ने दुकान को बंद करने की सोची। लेकिन कहते हैं ना, जब सारे रास्ते बंद हो जाते हैं तो आशा की एक किरण जरूर नज़र आती है। कुछ ऐसा ही हुआ। इस मुश्किल घड़ी में राजा को एक आइडिया आया और इस आइडिया ने सिर्फ राजा की जिंदगी नहीं बदली बल्कि इस आइडिया ने एक बड़ी यूनिवर्सल प्रॉब्लम को भी दूर करने की कोशिश की।

राजा ने देखा कि, एक ओर उनकी दुकान से काफी कुछ प्लास्टिक कचरा निकल रहा है तो वहीं बहुत से फल और उसके छिलके भी वेस्ट हो रहे हैं जिसमें कई न्यूट्रियेंट्स होते हैं। वहीं उन्होंने यह भी देखा कि, एक ग्लास में 250 एमएल के करीब पानी आता है और उसे धोने के लिए फिर से उतना ही पानी यूज होता है। यह सच में एक तरह से बड़ा वेस्टेज था और नेचर के प्रति उनसे हो रहा एक बिग क्राइम। बस यहीं पर एक एंटरप्रन्योर का दिमाग चल गया। राजा जो पहले से संस्टेनेबल उपाय ढूंढ़ रहे थे उन्होंने देखा कि, अगर हम वाटर मेलन को बीच से काट के इसमें से जूस के लिए रेट पार्ट को निकाल लें तो बचा हुआ पार्ट कटोरी के आकार का होता है जिसमें जूस को सर्व किया जा सकता है। बस यहीं से आइडिया आ गया और धीरे—धीरे उन्होंने हर फ्रूट वेस्ट को जूस कंटेनर में बदलना शुरू किया। लोगों को भी यह बहुत पसंद आया और गाड़ी चल पड़ी।

Zero Waste Producing Juice Shop

Zero Waste के साथ अवेयरनेस वाले मार्केटिंग आइडिया भी अपनाते हैं राजा

राजा अपनी दुकान के जूस वेस्ट को पहले जूस कंटेनर के तौर पर यूज करने लगे, फिर सिट्रिक एसिड वाले फूड वेस्ट से क्लीनर बनाने लगे और इसके बाद जो बाकी के वेस्ट थे उसे गाय माता को दे देते जो बाद में गोबर के रूप में फिर से खेतों में खाद के रुप में चला जाता है। सिर्फ इतना ही नहीं, राजा ने अपने शॉप को जीरो वेस्ट बनाने के लिए स्ट्रॉ तक को बैम्बू स्ट्रॉ, रियूजेबल स्टील स्ट्रॉ और आटे के लेयर वाले स्ट्रॉ से रिप्लेस किया है। साथ ही, अपनी दुकान पर उन्होंने यह बोर्ड भी लगाया है जिसमें वो कस्टमर को बताते हैं कि, उनकी दुकान क्यों जीरो वेस्ट शॉप है।

अब एंटरप्रन्योर वाला दिमाग चला था तो कपंनी को आगे बढ़ाने के लिए मार्केटिंग वाला दिमाग भी चाहिए था। जो शायद राजा के जीन में है। राजा की इस शॉप पर कई तरह के ऑफर है और वेराइटी हैं। जैसे कि, सिगरेट जूस जिसमें अगर आप सिगरेट छोड़ जूस पीना चाहते हैं, तो आपको फ्री में जूस मिलेगी, सुपर 30 जूस जिसमें आपको एक पज्जल को 30 सेकेंड में सॉल्व करना होता है और आपको मिलता है फ्री जूस और एक है 2020 जिसके अंदर बीवाईओबी यानि ब्रिंग योर ओन बैग्स का कॉन्सेप्ट है जहां आपको अपना बैग या कंटेनर लेकर आना है और आपको कोई भी जूस जो आप चाहते हैं वो 20 रुपये का ही मिलेगा। क्यों है ना इंट्रेस्टिंग!

राजा कहते हैं कि, ‘मैं मानता हूं कि, मै जो अपने दुकान में बेच रहा हूं वो केवल जूस नहीं है बल्कि जीरो वेस्ट का कॉन्सेप्ट है। वे कहते हैं कि, कन्नड़ में एक कहावत है जिसे हिन्दी में ट्रांसलेट करें तो इसका मतलब होता है मिट्टी से आई चीज मिट्टी में ही मिल जाती है। यह बात हमारे देश के हर कोने में सुनने को मिल जाएगी क्योंकि यह हमारी इंडियननेस की फिलॉस्फी का एक अहम हिस्सा रही है और राजा इसी कॉन्सेप्ट पर अपनी दुकान को चला रहे हैं।

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