भारतीय वैज्ञानिकों का कमाल, इस एक पेपर से घंटे भर में हो जाएगा कोरोना टेस्ट

बांग्ला कहानियों और इस भाषा के साहित्य से अगर आप परिचित हैं, तो ठीक है लेकिन नहीं हैं, तो फिर ‘फेलूदा’ को आप नहीं जानते होंगे। बंगाली भाषा वाले समझ गए होंगे कि, फेलूदा कौन है। खैर, गैर-बांग्ला भाषी निराश ना हों क्योंकि वो एक नाम तो जानते ही होंगे और वो नाम है महान फिल्म निर्माता सत्यजीत रे का। सत्यजीत रे के ही एक जासूसी उपन्यास का मुख्य पात्र है ‘फेलूदा’, जो बड़ी चालाकी से सच को उजागर करता है। कई फिल्मी हस्तियों ने फेलूदा का किरदार बाड़े पर्दे पर निभाया है। लेकिन हम जिस डिटेक्टिव के बारे में आपको बताने जा रहे हैं, वो किसी कहानी का हीरो नहीं है ना हीं कोई इंसानी पात्र है। वैसे ये है तो एक पेपर लेकिन इंसानों के लिए फेलूदा का रोल अदा करेगा।

क्या है Feluda ?

ये तो हम सब जानते हैं कि, दुनिया कोरोना वायरस के चंगुल में फंसी है। मतलब संक्रमण से संक्रमित है और ये संक्रमण तेजी से फैलता जा रहा है। संक्रमण का दायरा बढ़कर 45 लाख से ज्यादा हो गया है। भारत में भी ये 1 लाख से ज्यादा लोगों को अपनी जड़ में ले चुका है। संक्रमण के इतने तेजी से फैलने का सबसे बड़ा कारण है. इसके बारे में डर से पता चलना। क्योंकि अभी तक दुनिया भर में इस संक्रमण को जांच करने का जो तरीका है उसके अनुसार कोरोना पॉजिटिव मरीज का पता लगाने में करीब 1 से 2 दिन लगते हैं। मतलब हमारे पास जांच रिपोर्ट आने में हीं 24 से 48 घंटे बीत जाते हैं।

दरअसल कोरोना वायरस का पता बहुत जल्दी चल भी नहीं पाता। इसके कई कारण है। कई वैज्ञानिक ये दावा करते हैं कि, ये अपना रूप बदल रहा है। ऐसे में ये काम जासूसी वाला है और जासूसी वाला काम तो कोई जासूस हीं कर सकता है। ऐसे में जल्द ही डॉक्टरों के पास ‘ फेलूदा ‘ नाम का एक पेपर जासूस होगा जो बड़ी आसानी से कोरोना जांच कर सकता है।

कैसे तैयार हुआ ‘ फेलूदा ‘ टेस्ट किट

टेस्टिंग को लेकर भारत सरकार ने एक नया दावा किया है जिसके बाद से ये चर्चा में है। इस टेस्टिंग किट का नाम फेलूदा है। कोरोना के दौर में फेलूदा का आना चर्चा का केंद्र इस लिए बन गया है क्योंकि ये बहुत जल्दी से कोरोना वायरस के संक्रमण को पहचानने की काबिलियत रखता है। वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) ने जिस नए तरह के टेस्ट को इजाद करने का दावा किया है इसके तहत एक पतली सी स्ट्रीप होगी, जिस पर दो काली धारी दिखी नहीं की आपको पता लग जाएगा कि आप कोरोना पॉजिटिव हैं।

सीएसआईआर की मान लें तो ये सुनने में जितना आसान है उतना ही करने में भी होगा।  फेलूदा नाम के इस पेपर स्ट्रिप टेस्ट किट को इंस्टिट्यूट ऑफ जिनोमिक्स एंड इंटिग्रेटिव बॉयोलॉजी के दो साइंटिस्ट ने डिजाइन किया है। जिनका नाम है देबज्योति चक्रवर्ती और सौविक मैती,  ये दोनों बंगाल के रहने वाले हैं और एक साथ काम करते हैं। दोनों द्वारा विकसित इस तकनीक को सरकार की ओर से आगे बढ़ाने की मंजूरी मिल चुकी है और टाटा के साथ इसे बनाने का करार भी हो चुका है। केन्द्र सरकार की ओर से जारी किए गए प्रेस नोट में साफ लिखा गया है ये पूरी तरह भारतीय टेस्ट है जिसे एक साथ समूह में कई टेस्ट करने में आसानी होगी।

इस टेस्ट किट को बनाने वाले वैज्ञानिकों की मानें तो उन्होंने इसपर काम 28 जनवरी को ही शुरू कर दिया था और 4 अप्रैल तक उन्हें इसे तैयार करने में कामयाबी भी मिल गई थी। लेकिन जायदा समय कागजी कार्यवाही की फॉर्मेलिटीज पूरी करने में लग गए। इसमें मास प्रोडक्शन के लिए कंपनी खोजना और टेंडर जैसे काम शामिल किए गए।

ये काम कैसे करता है

जैसा कि, बताया जा रहा है कि, ये टेस्ट किट बहुत आसानी से कोरोना पॉजिटिविटी का पता लगा सकता है, उसकी प्रक्रिया जानने के बाद ये बात सच भी लगती है। दरअसल ये एक पेपर बेस्ड डायग्नॉस्टिक टेस्ट हैं, ठीक लिटमस पेपर की तरह। जैसे हम लिटमस पेपर को एसिड या बेस में डालते हैं और वो बता देता है कि ये एसिड है या बेस वैसे हीं इस पेपर पर कोरोना वायरस के RNA को निकालने के बाद रखते ही एक खास तरह का बैंड देखने को मिलता है, जो बताता है कि, मरीज कोरोना पीड़ित है या नहीं। इस पेपर पर एक खास तरह का सॉल्यूशन लगा होता है जिससे ये काम हो पाता है।

जब इस फेलूदा पेपर पर RNA रखा जाता है तो इस स्ट्रीप पर दो तरह के बैंड उभर कर सामने आते हैं। पहला बैंड है कंट्रोल बैंड, इस बैंड का रंग बदलने का मतलब होगा कि, स्ट्रीप का इस्तेमाल सही ढंग से किया गया है। दूसरा बैंड है टेस्ट बैंड, इस बैंड का रंग बदलने का मतलब होगा कि, मरीज कोरोना पॉजिटिव है। कोई बैंड नहीं दिखे तो मरीज को कोरोना नेगेटिव मान लिया जाएगा। सच में ये बेहद हीं आसान है और ऐसा लगता है कि, जैसे हम स्कूल की लैब में एसिड बेस का टेस्ट करते थे वैसे ही घर बैठे कोरोना टेस्ट भी कर सकेंगे, लेकिन ये घर पर नहीं हो सकता।

फेलूदा रैपिड टेस्ट किट से बेहतर कैसे है?

भारत में कोरोना टेस्ट को लेकर हो हल्ला शुरू से ही होता आ रहा है। वहीं सरकार पर आरोप भी लगते रहे हैं कि, वो टेस्टिंग की संख्या बढ़ा नहीं रही है या ज्यादा टेस्ट नहीं कर रही। वहीं हमारे यहां टेस्टिंग किट्स के दामों को लेकर भी सवाल उठे है। वहीं हाल में पिछले दिनों भारत ने चीन से रैपिड टेस्ट किट मंगवाए थे, जिसके नतीजे ठीक नहीं आए। तीन राज्य सरकार ने जब शिकायत की तो आईसीएमआर ने खुद टेस्ट किट की जांच की। लेकिन उनकी जांच में भी वो किट फेल हो गए तो भारत ने चीन को वो किट वापस कर दिया। भारत सरकार टेस्टिंग की प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए रैपिड टेस्ट किट भारत में लाना चाहती थी।

लेकिन अब जब फेलूदा टेस्ट किट आ गया है, ऐसे में सरकार को उसकी जरूरत नहीं पड़ेगी। डॉ. मांडे कहते हैं कि, टेस्ट किट किसी से बेहतर या खराब नहीं होता दरअसल, RT-PCR टेस्ट करने में कुछ ज्यादा वक्त लगता है और उसकी कीमत भी ज्यादा है। पेपर बेस्ड टेस्ट में समय भी कम लगेगा और कीमत भी काफी कम होगी।

पेपर बेस्ड टेस्ट का फायदा ये होगा कि सैम्पल लेने से नतीजे आने तक में एक से दो घंटे का वक्त लगेगा। ऐसे में अगर इस किट का मास प्रोडक्शन हुआ तो ये 300-500 रुपए में आसानी से उपलब्ध हो सकेगा। ऐसे में एक ओर जहां भारत में टेस्टिंग की रफ्तार बढ़ाने की जरूरत है तो अब फेलूदा लैब्स में उपलब्ध हो जाता है तो इससे बड़ी मदद मिलेगी।

फेलूदा नाम क्यों?

ये सवाल तो आपके दिमाग में भी आया होगा कि, आखिर फेलूदा नाम क्यूं दिया गया इस टेस्ट किट को?तो इसका जवाब वैज्ञानिकों के पास है। वैज्ञानिकों की मानें तो ये टेस्ट किट  ना तो रैपिड टेस्ट किट है ना ही RT-PCR टेस्ट। ये एक तीसरे तरह का RNA बेस्ड टेस्ट है जो सत्यजीत रे कि फिल्मों के जासूसी कैरेक्टर की तरह ही काम करता है। फेलूदा भी कोरोना के मरीज को जासूस की तरह ढूंढ लेता है।

वैसे ये नाम एक इत्तेफाक ही है क्योंकि इस टेस्ट में डिटेक्शन की जिस तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है उसे FELUDA यानि FNCAS9 EDITOR LINKED UNIFORM DETECTION ASSAY कहते हैं। 

वैसे जानकारों की माने तो ये टेस्ट किट मई महीने के आखिरी तक ही लैब्स में उपलब्ध हो सकेगी। फिलहाल भारत में RT-PCR टेस्ट ही हो रहे हैं, जिसके नतीजे वैसे तो 6 घंटे में आने का दावा किया जाता है, लेकिन लोगों तक इसकी जानकारी पहुंचने में 24 घंटे से ज्यादा का समय लग जाता है। वैसे अगर फेलूदा जल्द डॉक्टरों के पास उपलब्ध हो जाता है तो टेस्टिंग में मामले में भारत आत्मनिर्भर तो होगा हीं साथ हीं दुनिया भर को अपनी इस तकनीक का फायदा दे सकेगा।

Indian

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

मदद की गुहार पर, सोनू सूद का जवाब-सामान बांध लो फोन आएगा.

Thu May 21 , 2020
Share on Facebook Tweet it Pin it Email दुनिया में आज अनेकों लोग एक ही बीमारी से पीड़ित हैं. अनेकों ऐसे लोग हैं जो इस बीमारी के समय उन लोगों की मदद कर रहे हैं, जो इससे घिरे हुए हैं. आज दुनियाभर में 50 लाख से ज्यादा कोरोना पीड़ित पूरी […]
Sonu Sood