भानगढ़ किला- जिसे कहा जाता है सबसे डरावना भूतों का गढ़

भारत में कई किले पुरानी इमारतें ऐसी हैं जो आज भी सीना ताने अपना इतिहास कहती हैं। यूं तो भारत में कई पुराने और रहस्यमयी किले हैं जो देखने में जितने डरावने हैं उनका इतिहास उससे भी कहीं ज़्यादा भयानक है। कई किले ऐसे हैं जो अपनी बनावट से ज्यादा अपने भूतिया किस्सों की वजह से चर्चा में रहते है। ऐसे कई किले हैं जिनका नाम सुनते ही दिल में दहशत सी पैदा होने लग जाती है।

पुराने, उजड़े और वीरान पड़े किलों का, मौत, हादसों और अनहोनियों से कुछ न कुछ संयोग जरूर जुड़ा होता है। ये खंडरनुमा किले अपने अंदर कई दर्दभरे और डरावने राज़ समेटे हुए हैं। जो आज भी अतीत की तड़पती हुई चीखों,  अधूरी रह गई कहानी और किस्सों को बयां करती हैं। दुनिया भर में कई ऐसे पुराने किले हैं जिनका अपना एक अलग ही काला अतीत है और वहां आज भी रूहों का वास है। लेकिन इन सारे पुराने किलों में सबसे डरावना भूतों का गढ़ कहा जाने वाला किला है भानगढ़।

इस ख़ौफ़नाक खंडर में सदियों का इतिहास छटपटा रहा है या यूं कहें कि एक शानदार विरासत को भुतहा बताकर उसका दम घोटा जा रहा है। क्या भानगढ़ में कुछ है या यूं ही ये दुनिया की सबसे भुतहा जगह के लिए बदनाम है। 300 साल पहले आख़िर क्या हुआ था यहां। ख़ामोश खण्डरों ने जरूर देखा होगा। हज़ारों लोग आख़िर लाश क्यों बन गए। इन वीरान पहाड़ियों को तो जरूर पता ही होगा। कितनी चीखें दफन हैं इस सन्नाटे में। आखिर क्यों यहां मौत जैसी चुप्पी है लेकिन फिर भी ज़िंदा हैं कई कहानियां।  

भानगढ़ किला

भानगढ़ किला – जहां सूरज डूबते ही शुरू होता है आत्माओं का तांडव

भानगढ़, एक ऐसा किला जो एक शानदार बनावट के साथ-साथ अपने सीने में एक बेहतरीन अतीत भी छुपाए हुए है। ये अभिशाप ही है कि, कभी अपनी खूबसूरती पर इतराने वाला 500 साल पुराना महल आज एक भूताह खण्डार के नाम से जाना जाता है। सूरज डूबते ही यहाँ रूहों का कब्जा हो जाता है और शुरू हो जाता है आत्माओं का तांडव। अंधेरा होते ही इस किले में तलवारों की टनकार और और पायल की झंकार सुनाई देती है।  रात के पसरे सन्नाटे को चीरती हुई चीखें, अजीब-सा शोर, रात को और भी ज़्यादा भयावह और डरावना बना देता है। कभी गुलज़ार पड़े इस किले के कमरों में अब बस सिसकने की आवाजें सुनाई देती हैं। ऐसा माना जाता है कि, इस किले में कभी कोई रात नहीं गुजार पाया। जिसने ऐसी गुस्ताख़ी की भी तो या तो वो पागल हो गया या उसे दिमागी बुख़ार हो गया। दिन में यहां टूरिस्ट आते जाते हैं शोर शराबा भी रहता है मगर शाम होते ही यहां की फिजा में एक अजीब सा डर महसूस होने लगता है। आखिर क्या है इस किले के सन्नाटे का सबब ?

राजस्थान के अलवर जिले में इस किले को आमेर के राजा भगवंत दास ने 1573 में बनवाया था। भगवंत दास के छोटे बेटे और मुगल शहंशाह अकबर के नवरत्नों में शामिल मानसिंह के भाई माधो सिंह ने बाद में इसे अपनी रिहाइश बना लिया। मुगलों के कमज़ोर पड़ने पर महाराजा सवाई जयसिंह ने इन्हें मारकर भानगढ़ पर कब्ज़ा कर लिया। जहां एक वक्त पर ये एक खूबसूरत महल हुआ करता था तो वहीं आज ये एक उजड़े किले में तब्दील हो गया।

भानगढ़ किला

भानगढ़ किला – आखिर कौन है भानगढ़ की बर्बादी की वजह

भानगढ़ के भुतहा और श्रापित होने के पीछे यूं तो कई कहानियां मशहूर है लेकिन भानगढ़ की बर्बादी की वजह एक तांत्रिक को माना गया है, कहा जाता है कि, भानगढ की राजकुमारी रत्नावती बहुत सुन्दर थी जिसके स्वयंवर की तैयारी चल रही थी लेकिन उसी राज्य मे एक सिंघिया नाम का तांत्रिक था जो राजकुमारी को पाना चाहता था। इसलिए उसने राजकुमारी के श्रृंगार के तेल को जादू से सम्मोहित करने वाला बना दिया, राजकुमारी रत्नावती के हाथ से वो तेल एक चट्टान पर गिरा तो वो चट्टान तान्त्रिक सिंघिया के ऊपर ही गिर गई लेकिन मरते-मरते सिंघिया ने उस नगरी और राजकुमारी को नाश का श्राप दे दिया जिससे ये शहर उजड़ गया और इसलिए भानगढ़ आजतक वीरान है।

इसलिए भानगढ़ किले में कैद सारी रूह आज भी रात में चीखती चिल्लाती हुई भटकती हैं। कहने को तो यहाँ महल, बाग-बगीचे कूएं-बावडि़यां महल हवेली सब कुछ है। लेकिन सब के सब खण्डर। स्थानीय लोगो का मानना है कि ये किला श्रापित है। भानगढ़ के किले से एक दो नहीं बल्कि ऐसे अनगिनत रहस्य जुड़े हैं जहां अन्धेरा होते ही पांव रखने पर भी पाबन्दी है।

ये लोगों की कल्पना मात्र है या फिर हकीकत? इसका पता तो आजतक नहीं चल पाया है। क्या भानगढ़ वाकई में भुतहा किला है? क्या वाकई रात को यहां आत्माओं को देखा जा सकता है? क्या वाकई रात को यहां जो आया वो आजतक वापस नहीं लौटा? क्या ये महज एक अन्धविश्वास है, या फिर भानगढ़ में एक रात गुजारने के बाद इसके कई राज़ और भुतहा कहानियों की सच्चाईयों का पता लगाया जा सकता है? लेकिन खुद आर्कियोंलाजिकल सर्वे आफ इंडिया की टीम की सख्त हिदायत है की सूर्यास्त के बाद यहाँ आना मना है। तो क्या ASAI का लगाया हुआ ये बोर्ड और भानगढ़ से जुड़ी ये कहानिया क्या सच में हैं।

कई लोगों का मानना है कि अगर भूत प्रेत साक्षात रूप से ना भी दिखें तो भी भानगढ़ में रात को लौटने के बाद लोग बीमार हो जाते हैं या मानसिक रूप से बीमार। कहते हैं अँधेरे में ये किला इंसान का सबसे बड़ा दुश्मन बन जाता है। क्या वाकई एक रात गुजारने वाला अगली सुबह नहीं देख पाता। माना ये भी जाता है कि भानगढ़ में ज़मीन के अंदर कई टन खज़ाना दफ़्न हैं तो भानगढ़ को लेकर भूतियां किस्से मशहूर हैं ये ख़जाना बचाने के लिए मनगढंत किस्से ?  जो भी हो मगर क्यों इस किले के बारे में दुनिया भर में अजीब-अजीब सी बातें कहीं जाती है। क्या सचमुच यहां भूत रहते हैं और अगर नहीं हैं तो इतने सालों से ऐसी बातें क्यों कही जाती है। शायद ये अतीत के पन्नो का वो राज़ है जो अब हमेशा के लिए किसी किताब में बंद होकर रह गया है और ये राज़ हमेशा एक राज़ ही रहेगा।

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