बेजुबानों की आवाज बनकर उनको नई जिंदगी दे रहा Peepal Farm

हिमाचल प्रदेश में एक धर्मशाला हैं, जिसके करीब एक कुत्ते को किसी कार ने टक्कर से मारकर जख्मी कर दिया। कुत्ता काफी देर तक तड़पत रहा, मगर उसकी चीख-पुकार को सुनकर वहां मौजूद किसी भी इंसान को उस पर दया तक नहीं आई, लेकिन जब पीपल फार्म की नजर उसपर पड़ी तो फार्म के वॉंलंटीयर्स ने उसे उठाकर ना सिर्फ अस्पताल पहुंचाया बल्कि उसका नाम ओरियन भी रखा। इतना ही नहीं, ओरियन की सर्जरी होने के बाद पीपल फार्म के volunteer उसे फार्म में भी लेकर आए।

जहां आज के वक्त में लोग सड़क पर तड़पते इंसान को भी देखकर मुंह मोड़ लेते हैं। वहीं इसी दौर में पीपल फार्म खास तौर पर जानवरों की देखभाल के लिए खोला गया हैं। जहां पर ऑर्गैनिक फार्मिंग भी की जाती है। यह केंद्र हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के धनोटू गांव के पास स्थित है। इस फार्म में हर प्रकार के घायल जानवरों का इलाज किया जाता है, जिसमें बिल्लियां, खच्चर, सुअर, आवारा कुत्तों से लेकर गाय तक शामिल रहती हैं।

Peepal Farm – अब तक 590 से भी ज्यादा जानवरों को बचा चुका है पीपल फार्म

पीपल फार्म को 2014 में रॉबिन सिंह, जोएलिन और शिवानी भल्ला ने शुरू किया था। उनको सीधा सा उद्देश्य घायल जानवरों की देखभाल करना था। इस फार्म में एक पशु चिकित्सालय है, एक गौशाला और एक कुत्तों का आसरा घर भी है। ये सब कुछ recycle की जाने वाली चीजों से बना है। पीपल फार्म ने अब तक 590 से भी ज्यादा जानवरों को बचाया है और 128 जानवरों की नसबंदी की है। वहीं 100 जानवरों को गोद लेकर उन्हें नई जिंदगी दी है। इसमें 89 जानवर तो ऐसे थे जिन्हें सड़क पर तड़पड़ता छोड़ दिया गया था।

पीपल फार्म का लक्ष्य जानवरों को मिलने वाले दुख और उनके साथ होने वाले अमानवीय व्यवहार को खत्म करना है।’ पीपल फार्म में 23 वॉलंटीयर हैं जो कि आवारा जानवरों की सेवा में हमेशा तैयार रहते हैं।’ पीपल फार्म अपने आठ किलोमीटर के दायरे में बचाव अभियान चलाता है।

इसी के साथ, जैसे ही किसी भी पड़ोसी क्षेत्र के निवासी कही पर भी किसी जानवर को घायल पड़ा देखते हैं तो वे पीपल फार्म को फोन करते हैं या एक ईमेल भेजते हैं। इसके बाद पीपल फार्म का बचाव दल तुरंत स्थान पर पहुंच जाता है और घाव की गंभीरता के आधार पर, वे जानवर को आगे के उपचार के लिए फार्म में लाते हैं। पीपल फार्म में हमीरपुर और डलहौजी जैसी जगहों से भी फोन आते हैं जो कि सौ किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं। ऐसी स्थिति में फोन करने वाले को जानवर को पीपल फार्म तक छोड़ने के लिए कहा जाता है।

Peepal Farm – जानवरों की देखभाल के साथ ऑर्गेनिक फार्मिंग को भी बढ़ावा दे रहा है ये फार्म

पीपल फार्म के वॉ. का कहना हैं कि, ऐसी कई घटनाएं हमारे सामने आई हैं जब लोगों ने अपने पालतू जानवरों पर अत्याचार किया। पीपल फार्म को इसी उद्देश्य के लिए शुरू किया गया था ताकि ऐसे जानवरों की देख-रेख की जा सके। इसे शुरू करने वाले रॉबिन अमेरिका में प्रोग्रामर के तौर पर काम कर रहे थे। बाद में उन्होंने डिजिटल डाउनलोड्स और गुड्स को बेचने के लिए अपने ऑनलाइन मार्केटप्लेस ई-जंकी की स्थापना की।

रॉबिन कहते हैं, ‘मैंने पुडुचेरी के ऑरोविल का सफर किया तो मुझे अहसास हुआ कि हमें भी समाज को कुछ वापस देना चाहिए। मैं वहां एक ऐसे व्यक्ति से मिला जो लावारिस छोड़ दिए गए कुत्तों की देखभाल करता था। तब से मैं लगातार इस काम में लगा हुआ हूं।’ रॉबिन ने दिल्ली में जानवरों की नसबंदी का कार्यक्रम शुरू किया। ठीक उसी वक्त वे किसी ऐसे ठिकाने की तलाश में थे जहां पर घायल जानवरों के इलाज की व्यवस्था की जा सके। शिवानी ई-जंकी में रॉबिन की सहकर्मी थीं और जॉएलेन एक बिजनेस मीटिंग के सिलसिले में अमेरिका में रॉबिन से मिली थीं। उन्होंने मिलकर एक टीम बनाई और पीपल फार्म की स्थापना की।

पीपल फार्म में जानवरों की देखरेख के अलावा ऑर्गैनिक फार्मिंग को भी बढ़ावा दिया जाता है। यहां वॉलंटीयर प्रोग्राम भी संचालित किए जाते हैं जिसमें सप्ताह में छह दिन पूरे दिन में चार घंटे काम करना शामिल होता है। वॉलंटीयर्स से उम्मीद की जाती है कि वे जानवरों के बचाव और देखभाल में मदद करें और साथ ही खेतों में काम करने में मदद करें।

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