बिहार के PIL Man से नहीं बच पाती बड़ी-बड़ी हस्तियां

मीडिया में इन दिनों एक मुद्दा बहुत गरमाया हुआ है। यह मुद्दा लोकसभा चुनावों से पहले हुई एक घटना से जुड़ा है और इससे जुड़े हैं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी। दरअसल लोकसभा चुनावों के वक्त भारत में बढ़ती असहिष्णुता को लेकर कई फिल्मी हस्तियों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को एक खुला पत्र लिखा था। तब तो यह खबर चर्चा में थी ही, लेकिन आज एक बार फिर से इस लेटर को लिखने वाले लोग चर्चा में हैं, ऐसा इसलिए क्योंकि खुला पत्र लिखने वाले सभी 50 स्टार्स के ऊपर एफआईआर दर्ज हुई है। इनमें अनुराग कश्यप, इतिहासकार रामचंद्र गुहा, अपर्णा सेन जैसे लोगों के नाम शामिल हैं। एक बार में देखने पर इसमें राजनीति दिखती है। लेकिन इसमें एक शानदार सी बात है और यह बात ही है आज की इंडियननेस स्टोरी।

दरअसल इन सभी 50 हस्तियों को लेकर एफआईआर बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में दर्ज कराए गए हैं। अगर आप बिहार के मुजफ्फरपुर से हैं तो आपको बात समझ में आ गई होगी। क्योंकि, मुज्जफरपुर देश में शायद ही एक मात्र ऐसा जिला होगा जहां के लोग कानून का सबसे ज्यादा इस्तेमाल करते होंगे और वो भी या तो केस करने में या फिर पीआईएल दाखिल करने में। वहीं भारत में शायद ही कोई बड़ी हस्ती हो जिसके ऊपर इस जिले से केस नहीं दर्ज हुआ हो। बॉलीवुड के मेगास्टार और सदी के महानायक कहे जाने वाले अमिताभ बच्चन भी इससे नहीं बचे हैं। उनके नाम पर भी मुजफ्फरपुर में केस फाइल हो चुका है। इसके अलावा अभिषेक बच्चन, माधुरी दीक्षित, प्रिती जिंटा, बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जैसे लोगों पर भी यहां से केस दर्ज हो चुके हैं।

PIL Man- 100 से ज्यादा नामचीन लोगों के खिलाफ दायर की याचिकाएं

लेकिन इन सब के पीछे कौन है? यह भी एक बड़ा सवाल है। दरअसल मुजफ्फरपुर में इतनी बड़ी हस्तियों के खिलाफ कोई केस करने का अगर दम भर सकता है तो वो हैं सुधीर कुमार ओझा। वे पेशे से वकील हैं और मुजफ्फरपुर से ही एलएलबी की है। साल 1996 से ही ओझा मुजफ्फरपुर कोर्ट में लॉ की प्रैक्टिस कर रहे हैं और अगर उनकी माने तो उन्होंने अभी तक 745 जनहित याचिकाएं कोर्ट में डाली हैं जिनमें से कोर्ट ने केवल 130 मामलों को ही अभी तक खारिज किया है। वहीं उन्होंने 100 से ज्यादा याचिकाएं बड़े नामचीन लोगों के खिलाफ डाली हैं। अपनी जनहित याचिकाओं से सुधीर कई हस्तियों को टारगेट पर लेते रहे हैं।

2007 में उन्होंने धूम-2 के निर्माताओं और अभिनेताओं के खिलाफ एक पीआईएल डाला था। जिसमें एक किसिंग सीन को लेकर अश्लीलता को बढ़ावा देने का उन्होंने आरोप लगाया था। उसी वर्ष ओझा ने एनएच-28 पर अनाधिकृत रूप से व नियम के विपरीत हेलीकॉप्टर उतारे जाने के आरोप में पूर्व सीएम लालू प्रसाद यादव के खिलाफ मामला दायर किया था। 2006 में ओझा ने छठ पर्व को ‘नाटक’ के रूप में बताने को लेकर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए दावा किया कि उन्होंने बिहारियों की धार्मिक भावनाओं को आहत किया है। ओझा की मानें तो उनकी याचिका पर ठाकरे के खिलाफ वारंट जारी किया गया था और एमएनएस प्रमुख को सुप्रीम कोर्ट से जमानत लेनी पड़ी थी। मामला अभी भी दिल्ली उच्च न्यायालय में है।

PIL Man-  ओझा के PIL ने किए मुज्जफरपुर में कई बदलाव

जब पूर्व पीएम मनमोहन सिंह और पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्जी ने कथित रूप से कहा कि तमिलनाडु और श्रीलंका के बीच राम सेतु एक प्राकृतिक संरचना है और मानव निर्मित नहीं है। इसपर भी ओझा ने मामला दर्ज कराया था। 2013 में नूडल्स मैगी को लेकर ओझा ने अमिताभ बच्चन के खिलाफ जनहित याचिका दायर की थी।

ओझा अपने आप में पीआईएल मैन हैं। ऐसे में कई लोग सवाल उठाते हैं कि आखिर कोर्ट उनके पीआईएल को दाखिल कैसे कर लेता है? वकील ओझा कहते हैं कि मैंने लोगों को राहत पहुंचाने के लिए न्यायपालिका को एक उपकरण के रूप में उपयोग किया है। वैसे ऐसा नहीं है कि ओझा के पीआईएल सिर्फ बड़े लोगों के खिलाफ होते हैं। उनके कई पीआईएल के कारण मुजफ्फरपुर में भी बहुत से बदलाव आए हैं। वैसे ये ओझा की तत्परता का ही कमाल है कि देश की हर विवादित मामले पर सबसे पहले केस मुजफ्फरपुर में दर्ज होता है।

इस स्टोरी को वीडियो रूप में देखने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें-

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