बस कंडक्टर मधु, धरातल से मुकाम तक

‘कभी भी किसी का हुलिया देखकर उसके बारे में अंदाजा नहीं लगाना चाहिए, क्योंकि ऐसा आदमी बहुत खतरनाक होता है’… हुलिया ही बदल देता है…’साउथ सुपरस्टार धनुष की ‘मारी’ फिल्म अगर आपने हिन्दी में देखी होगी तो यह डॉयलॉग आपका पसंदीदा होगा। वैसे यह डॉयलॉग फिल्म ही नहीं रियल लाइफ में भी खूब सूट करता है। वो कैसे? तो इसका जवाब आपके पास खुद ही होगा…. थोड़ा सा शांत होकर बैठिए और सोचिए कि आज किस आदमी का हुलिया देखकर आपने, क्या अंदाजा लगाया….शायद आज बस में चढ़े हों और बस कंडक्टर को देख आपके दिमाग में आया हो, ये तो पक्का चकोड़ा आदमी है! लेकिन अगले ही पल कुछ ऐसा हुआ होगा जब आप अपनी सोच में ही उलझ गए हों।

अंग्रेजी में एक कहावत है ‘don’t judge a book by its cover’ ऊपर जो डॉयलॉग है। वो इसी अंग्रेजी का हिन्दी करण है। वैसे हम आज आपसे किताब को उसके कवर से जज नहीं करने की बात इसलिए कर रहे हैं, क्योंकि हाल ही में एक चेहरा आपके और हमारे सोशल मीडिया के टाइमलाइन पर छाया हुआ है। यह चेहरा एक बस कंडक्टर का है….. आपको याद आ गया ही होगा…. इस बस कंडक्टर का चेहरा हमारी और आपकी टाइमलाइन पर इसलिए है क्योंकि इन्होंने हाल ही में भारत के सबसे टॉप परीक्षाओं में से एक यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन यानि यूपीएससी की परीक्षा का प्री लीम्स और मेंस एग्जाम निकाला है। यह कठिन परीक्षा उन्होंने अपने काम को जारी रखते हुए क्लियर किया है।

बस कंडक्टर मधु

कर्नाटक के BMTC के बस कंडक्टर हैं, मधु

कर्नाटक के सरकारी बस सर्विस बैंगलोर मेट्रोपोलिटन ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन यानि BMTC में बस कंडक्टर का काम करने वाले इस व्यक्ति का नाम है मधु एन. सी. है। वे अपने परिवार में पहले ऐसे इंसान हैं जिसने पढ़ाई की और अब यूपीएसई क्लियर करने के इतने नजदीक पहुंचे हैं। 29 साल के मधु ने पिछले साल प्रिलिंम्स पास किया था और इस महीने यूपीएससी मेंस में अपना नाम देखकर उनकी खुशी का ठिकाना नहीं है। मधु के परिवार में एक भाई, भाभी और माता-पिता हैं। कर्नाटक के मांड्या जिले के मूल निवासी मधु 19 साल की उम्र से कंडक्टर का काम कर रहे हैं। लेकिन कहते हैं, जिनके सपने नहीं मरते वो इंसान ही अपनी तकदीर खुद से लिखने की काबलियत रखते हैं….और मधु भी उन्हीं लोगों में से हैं…. एक तरफ वे कंडक्टर का काम भी करते रहे वहीं दूसरी ओर उन्होंने अपने सपने को पूरा करने के लिए डिस्टेन्स लर्निंग से बैचलर्स और मास्टर की डिग्री तक हासिल की।

हर रोज 5 से 6 घंटे पढ़ाई करते हैं, मधु

आसमानों से कहो, अगर हमारी उड़ान देखनी है..तो अपना कद और ऊंचा करें’….यह लाइने मधु की इस एचीवमेंट पर बिल्कुल खरी उतरती है। कहते हैं कि हर सफलता की कहानी के पीछे कई असफलताओं की कहानी होती है। ऐसा नहीं है कि बस कंडक्टर मधु एन. सी. की कहानी सीधी और सपाट है। यूपीएससी की परीक्षा में अब मेंस क्लियर कर चुके मधु दो बार इस परीक्षा के पहले राउंड में हीं छट गए थे। लेकिन मधु के हौसले बुलंद थे, तभी तो अब उनकी मंजिल उनके बेहद करीब है। बस कंडक्टरी करते हुए यूपीएससी परीक्षा में मधु का अब तक का सफर काफी कठिन रहा है। मधु अपनी परीक्षा की तैयारी के दौरान हर रोज सुबह आठ घंटे से रो कंडक्टरी के काम में लग जाते थे। दिनभर खड़े रहकर टिकट बांटना, भीड़ में सवारियों को बुलाना और यह सुनिश्चित करना कि कोई यात्री बेटिकट ना रहे, ये काम काफी थका देने वाले होता है। लेकिन बावजूद इसके मधु ने नौकरी नहीं छोड़ी है। वे हर दिन 5 से 6 घंटे पढ़ाई करने के लिए भी निकाल लेते थे। जिसका परिणाम आज पूरे देश के सामने है।

ऐसा नहीं है कि, मधु ने यह सफर अकेले तय किया है। शाहरूख की फिल्म का एक डॉयलॉग है कि ‘अगर किसी चीज़ को पूरे दिल से चाहों तो… पूरी कायनात आपको उससे मिलाने में जुट जाती है”। मधु की भी सिर्फ एक ही चाहत थी कि, वो यूपीएससी इंटरव्यू क्लियर करके अपने वर्तमान बॉस यानी बेंगलुरु मेट्रोपॉलिटन ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन की मैनेजिंग डायरेक्टर आईएएएस सी शिखा जैसा बनें। उनकी यह चाहत सच्ची थी, तभी तो कुदरत का कुछ ऐसा कमाल हुआ की उनके सपने को पूरा करने में सी शिखा ही उनकी गुरू बन गई। मधु बताते हैं, ‘वह मेरी काफी मदद कर रही हैं। मेन्स परीक्षा के लिए वह हर हफ्ते मुझे दो घंटे के लिए पढ़ाती रही हैं कि, परीक्षा में किसी तरह के सवाल और जवाब देने होते हैं। अब सिखा मुझे इंटरव्यू के लिए भी तैयार कर रही हैं।’ मधु के लिए यह सब पहली बार नहीं हुआ है।

बस कंडक्टर मधु

मधु ने अपने एक इंटरव्यू में बताया था कि वे हमेशा से अपनी जिंदगी में कुछ बड़ा करना चाहते थे। अपने परिवार की मदद के लिए उन्होंने जल्दी काम करना शुरू कर दिया था, लेकिन उन्होंने पढ़ाई नहीं छोड़ी। वे रोज 5 घंटे पढ़ाई करते। यूपीएससी में पॉलिटिकल साइंस, एथिक्स और मैथ्स और साइंस सब्जेट से परीक्षा देनेवाले मधु बताते हैं कि वे काम से पहले और बाद में रोज पढ़ाई करते, रोज सुबह 4 बजे उठते ताकि काम पर जाने से पहले पढ़ाई कर सकें।

मधु के इस मेहनत का फल उन्हें जरूर मिले ऐसी हमारी ईच्छा है। वहीं हम तो यह ही कहेंगे कि मधु जी आप सच में हमारे देश के युवाओं के लिए, फिर वो युवा हमारे सामाज के किसी भी सेक्शन से आते हों… उनके एक प्रेरणास्त्रोत हैं। आपने यह साबित किया है कि अगर ठान लो तो कुछ भी नामुमकिन नहीं। यह वहीं रियल इंडियनेस है जो दुनिया भर को संदेश देता है कि ‘मन के हारे हार है, मन के जीते जीत।  

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