बस एक Whatsapp Group और बच सकती है आपकी जिंदगी

Whatsapp से हम सब जुड़े हुए हैं। सोशल मीडिया में Whatsapp एक बड़ी क्रांति बनकर आई और ऐसे आई कि, क्या दिन और क्या रात सब कुछ हो गया सिर्फ मैसेजिंग के नाम। धीरे-धीरे क्या हुआ वो सब आप और हम जानते हैं। वैसे Whatsapp जब आया तो सिर्फ एक मैसेजिंग एप था। लेकिन फिर ये हमारी रोजमर्रा की जरूरत, ऑफिस के काम से लेकर घर-परिवार, हमारी दुनिया ही बन गया है।

मगर, कई अच्छी चीजों को लेकर आने वाला Whatsapp आज के दिनों में ज्ञान का भी भंडार है तभी तो इसमें यूनिवर्सिटी शब्द भी जोड़ दिया गया है। Whatsapp यूनिवर्सिटी को कई लोग सत्यता का उच्च प्रमाण भी मान बैठते हैं, यही कारण है कि नॉलेज के नाम पर बकैती का गुण ज्यादा फैल रहा है। इसी Whatsapp यूनिवर्सिटी के परम ज्ञान के कारण आज फेक न्यूज की भरमार लगी है। जिससे दंगे तक हो चुके हैं, मॉब लींचिंग एक दम फ्रेश उदहारण है इसका। अफवाहों का बाजार आज हमारे आसपास इतना भर गया है कि अब तो लगने लगा है जैसे, जिंदगी ही एक अफवाह है। आए दिन बढ़ते क्राइम के कारणों में Whatsapp का नाम जुड़ ही जाता है।

लेकिन ऐसा नहीं है कि, Whatsapp आज हमारे लिए खतरा बन गया है। ऐसे कई उदहारण है जिन्होंने इस मैसेजिंग एप का इस्तेमाल लोगों की जान लेने के बजाय उन्हें जीवनदान देने के लिए किया है। Whatsapp ग्रुप्स के जरिए कही दूर बैठा आदमी भी आज किसी की मदद कर सकता है और उसकी जान बचा सकता है। इस नए प्रयोग का जीता जागता उदहारण है डॉ पद्मनाभ कामत। जिन्होंने Whatsapp के जरिए कई लोगों की जानें बचाई हैं। डॉ पद्मनाभ कामत एक कार्डियोलॉजिस्ट हैं। मतलब दिल के डॉक्टर।

Padmanabha kamath
Whatsapp के जरिए कई लोगों की जान बचा रहे डॉ. कामत

Padmanabha kamath के Whatsapp Group से जुड़े हैं 800 डॉक्टर्स

दिल की बीमारी आजकल कितनी घातक बन गई है यह किसी से छुपा नहीं है। वैसे कार्डियोलॉजिस्ट होने के नाते डॉ कामत ने कई दिल के रोगियों को देखा है। लेकिन हर किसी की जिन्दगी में एक ऐसी घटना होती है जो उन्हें झकझोर देती है। ऐसी एक घटना कामत के संग भी हुई। वे बताते हैं कि चिकमगलूर में एक युवा ऑटो ड्राईवर जिसकी उम्र केवल 32 साल थी उसकी मौत हार्ट अटैक के कारण हो गई और यह उसकी मौत की वजह थी, डॉक्टरों द्वारा उसका ईलाज समय पर नहीं हो सका। वो ऑटो वाला अपने घर में कमाने वाला इकलौता था।

यहां हम बता दें कि heart patient के लिए ईलाज को लेकर समान्य वक्त 360 मिनट माना जाता है। लेकिन भारत में कई विशेषज्ञ इसे यहां के लिए सही समय नहीं मानते। कई विशेषज्ञ मानते हैं कि हार्ट रोगियों के लिए 60 मिनट Golden hour होते हैं। वहीं जो रोगी पहले भी हार्ट अटैक को झेल चुके होते हैं उनके लिए इलाज का सही समय 10 से 12 घंटों के बीच ही होता है। लेकिन भारत में यह समय हर किसी को नहीं मिल पाता। कई लोग तो अस्पताल पहुंचने के क्रम में यह अस्पताल की दहलीज पर पहुंचते ही दम तोड़ देते हैं। वहीं कई ऐसे होते हैं जो अस्पताल तो पहुंचते हैं लेकिन अस्पतालों में ईलाज के सही उपकरण नहीं होने के कारण उनका ट्रीटमेंट नहीं हो पाता है।

इस प्रॉब्लम को सॉल्व करने के लिए डॉ कामत ने सहारा लिया Whatsapp का। उन्होंने इसके जरिए एक ग्रुप बनाने का प्लान किया और इसे एक्जीक्यूट कर दिया। उनके Whatsapp ग्रुप से आज 800 से ज्यादा डॉक्टर जुड़े हुए हैं। इसके जरिए वे देश के ऐसे दूर दराज के लोगों को स्पेशलिस्ट डॉक्टरों के जरिए बीमारियों के बारे में जानकारी मुहैया कराते हैं जहां डॉक्टर पहुंच नहीं पाते हैं। ये डॉक्टर दिल की बीमारियों से जुड़ी सलाह और सुझाव फ्री ऑफ कॉस्ट देते हैं। साथ ही ग्रामीण डॉक्टरों द्वारा ग्रुप में इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम यानि ईसीजी को पढ़ने में मदद और सुझाव देते हैं।

Padmanabha kamath

Padmanabha kamath ने ग्रुप के जरिए हल किए करीब 850 मरीजों के केस

इसके अलावा डॉ कामत का यह Whatsapp ग्रुप छोटे अस्पतालों और प्राइमरी हेल्थ सेंटरों में काम कर रहे डॉक्टरों को रेफरल अस्पताल और नजदीकी कार्डियोलॉजिस्ट से भी जोड़ने में काफी सहायता देता है। उनका यह Whatsapp ग्रुप पिछले डेढ़ सालों से चल रहा है। इसके अलावा तीन और ग्रुप्स भी उन्होंने बनाए हैं। इन चारों ग्रुप्स के जरिए अब तक वे 8000 कंसल्टेशन कर चुके हैं। एक चैनल को दिए अपने इंटरव्यू में वे बताते हैं कि “अब तक 500 हार्ट अटैक और 850 दिल की बीमारियों के केस सही तरह से ग्रुप के जरिए हल किए गए हैं।

उनकी इस पहल का ही नतीजा है कि आज कई दूर दराज के इलाकों के प्राथमिक उपचार केन्द्रों पर इसीजी की सुविधाएं उपलब्ध हो गईं हैं। वहीं कैड ने भी उनकी पहल के जरिए 1000 से ज्यादा प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर हार्ट अटैक किट्स और दवाइयां मुहैया कराई हैं। सिर्फ इतना ही नहीं, दिल के रोगियों के लिए बना यह Whatsapp ग्रुप लोगों के इलाज के लिए भी फंडिंग की व्यवस्था करता है। वहीं डॉ कामत इमरजेंसी स्थितियों के लिए एक मुफ्त Whatsapp हेल्पलाइन (9743287599) भी चलाते हैं।

डॉ कामत की इस मुहिम का उद्देश्य पूरे भारत में ऐसे रोगियों की मदद करना है जिनके पास सुविधाएं नहीं पहुंच पाती। टेक्नॉलजी का इससे बेहतर इस्तेमाल और क्या हो सकता है। आज जहां Whatsapp के जरिए कई जगहों पर दंगे, फेक न्यूज और न जाने किस-किस प्रकार की चीजें फैलाई जा रही हैं, ऐसे में डॉ पद्मनाभ कामत की यह मुहिम अपने आप में अनोखी और अपनाने योग्य है। वैसे डॉ कामत के ही जैसे कई ऐसे लोग हैं जो टेक्नोलॉजी के जरिए लोगों की मदद कर रहे हैं, हम उनपर भी आगे आपको और ऐसी ही इंडियननेस स्टोरी सुनाते रहेगें।

इस आर्टिकल को वीडियो रूप में देखने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें-

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