प्लास्टिक का इलाज हैं सिक्किम की ये स्टाइलिश बांस की बोतलें

जब तक प्लास्टिक इस्तेमाल नहीं की जाती थी तब तक लोगों को परेशानियां भी होती थी। कागज़ से बनी चीजे उतनी टिकाऊ नहीं होती और कपडे का बैग या उससे बनी चीजे हर काम में इस्तेमाल नहीं हो सकती। मिटटी से बनी चीजों के टूट जाने का डर डर बना रहता। ऐसे में जब प्लास्टिक से बने सामान बाज़ार में आए तो कई सारी चीजों का सोल्युशन निकल आया। देखते ही देखते जैसे लोगों की मुश्किलें आसान हो गई। प्लास्टिक के भी कई फायदे नज़र आने लगे जैसे कि ये हल्का है, ढ़ोने में आसान है, इसमें लिक्विड को आसानी से कैरी किया जा सकता है… इसके गिरने के बाद भी टूटने का डर नहीं है। प्लास्टिक का सबसे बेहतर यूज दो चीजों में दिखता है एक कैरी बैग में और दूसरा प्लास्टिक की बोतलों में। दोनों ही स्तरों पर प्लास्टिक एक अच्छा साथी साबित भी हुआ है।

तो उस वक़्त इसके निगेटिव इम्पैक्ट के बारे में ना किसी ने सोचा ना किसी ने कोई बात की। अगर बात हुई भी होगी तो डेवलपमेंट के अंधे दौड़ में इसको नज़रअंदाज कर दिया गया होगा। प्लास्टिक लोगों के काम तो आई और अंदर ही अंदर हमें इसकी आदत पड़ती गई। अब प्लास्टिक जब हमारे रग—रग में घुस गई है तो अब हमें इस बात का एहसास हो रहा है कि इस प्लास्टिक ने तो सब कुछ बिगाड़ कर रख दिया है। ये न तो गलता है, न सड़ता है, जलाने पर गंदे गैस छोड़ता है और इसमें कोई चीज स्टोर करो तो उल्टा उसके अंदर ही घुस जाता है। प्लास्टिक के इतने बड़े पैमाने पर इस्तेमाल की वजह से आज का आलम ये हो गया है कि हवा में भी प्लास्टिक के कण मौजूद हैं। मतलब ये कहना गलत नहीं होगा कि प्लास्टिक कचड़ा और प्रदूषण फैलाने वाला सबसे बड़ा एजेंट बन गया है। लेकिन वक्त रहते दुनिया ने इसके डर को समझा है और अब दुनिया प्लास्टिक यूज करने से कन्नी काट रही है। भारत में भी प्लास्टिक के यूज को खत्म करने की मुहिम चल रही है। मगर ऐसे में कई सवाल भी सामने आ रहे हैं कि जिस काम के लिए हम लोग पूरी तरह से प्लास्टिक पर डिपेंड हो चुके हैं, उसे बिना प्लास्टिक के कैसे करेंगे। प्लास्टिक पूरी तरह बेन होने के बाद जो चीज हमें सबसे ज़्यादा खलेगी वो है प्लास्टिक की बोतल। क्योंकि घर के बाहर हमें प्यास लगती है तो हम 10 या 20 रुपये की पानी की बोतल खरीद कर अपनी प्यास बुझा लेते हैं। लेकिन अब प्लास्टिक की बोतल नहीं होगी तो उसकी जगह पानी की बोतल कैसी होगी। ये सवाल वाकई सोचने वाला है। लेकिन ऐसा नहीं है कि मुश्किल दिखने वाली चीज़ नामुमकिन होती है…

हाल ही में बांस के कई सारे नए और हैरतअंगेज प्रोडक्टस मार्केट में देखने को मिले हैं। कॉफी की कप से लेकर खाना खाने वाली प्लेट और चम्मच तक… और अब बांस की बोतले भी मार्केट में आ गई हैं। ये बांस की बोतले जहां लीक प्रूफ हैं तो वहीं वाटर प्रूफ भी यानि की इसमें आप लंबे समय तक पानी को सुरक्षित रख सकते हैं। इस बारे में जानने के बाद आप उनके बारे में भी जानना चाहते होंगे जिन्होंने इन बोतलों को बनाया है तो बता दें कि इन बांस की बोतलों का अविष्कार किया है असम के उद्यमी जिनका नाम है धृतिमान बोरा। असम के पूर्व आईआईटीएन, धृतिमान बोरा ने इस दिशा में अपना एक कदम बढ़ाया है। उन्होंने पर्यावरण के अनुकूल एक खास तरह की पानी की बोतल बनाई है।

धृतिमान के लिए बांस से वॉटर बोतल बनाना कोई आसान काम नहीं था। धृतिमान को बांस की कटाई, उसे सुखाने, पॉलिशिंग जैसे अन्य प्रोसेस को करने में कुल मिलाकर 1 बोतल बनाने में कम से कम 4 से 5 घंटे लगते हैं। इतने घंटे का समय तो उन्हें एक दिन में लगता है मगर असल में बांस से बोतल बनाने में उन्हें लगभग 17 साल लगे हैं। बांस की ये ऑर्गेनिक बोतलें एकदम वॉटर प्रूफ हैं जिससे किसी तरह का कोई पानी का लिकेज नहीं होता। ये बोतलें टिकाऊ बांस – भालुका से बनाई गई हैं। इनकी बाहरी परत को वाटरप्रूफ ऑयल से पॉलिश किया जाता है जो इसे फिनिशिंग लुक भी देती हैं। सिर्फ बोतल ही नहीं बोतल का ढक्कन भी बांस से ही तैयार किया गया है। प्लास्टिक की बोतलों के उपयोग को बंद करने की दिशा में इन बोतलों का इस्तेमाल एक अहम कदम साबित हो रहा है।

धृतिमान के इस अविष्कार को बड़े पैमाने पर सबसे पहले सिक्किम राज्य ने पूरी तरह से अपनाया है। सिक्किम राज्य ने हाल ही में बांस के बने पानी के बॉटल लॉन्च किए हैं। सिक्कम का ‘लाचन’ ऐसा करने वाला पहला शहर बना है, जिसने पूरी तरह से पैक्ड ड्रिंकिंग वाटर को बैन कर दिया है और उसकी जगह बांस की बोतल को लॉन्च किया है। लाचन में हर हर साल लाखों की संख्या में टूरिस्ट पहुंचते हैं जो पीने के लिए प्लास्टिक की बोतलों का इस्तेमाल करते हैं और उसे यू ही खुले में फेंक देते हैं, जिससे प्रदूषण फैलता है। इसी से बचने के लिए इस शहर ने ये नया प्रयोग किया है।

वैसे अगर बांस के इतिहास के बारे में बात करें तो लगभग 7000 साल पहले से ही इंसानों ने बांस का उपयोग करना शुरू कर दिया था। इतिहास में भी तीर—धनुष, पेपर, बिल्डिंग्स, कंटेनर और भी बहुत सारी चीजें बनाई जाती थी। बात पानी स्टेारेज की करें तो इसके लिए इंसान कई बहुत पहले से ही बांस के खांचों को बोतलों की तरह इस्तेमाल करते आ रहा है। यानि बांस कई हजार सालों से बोतल के रूप में यूज होता आ रहा है। आज दुनिया में बांस के कई सारे प्रोडक्टस बनते हैं, जैसे कि चारकोल, अल्कोहल, बेड शीट, पेन्ट ब्रश, इंस्ट्रूमेंट, कपड़े, साइकिल इत्यादि। लेकिन जैसे जैसे प्लास्टिक का चलन बढ़ा बांस आम जिंदगी से दूर होता चला गया। इसका काम केवल गांवों में टोकरी या फिर कोई झोपड़ी बनाने में रह गया है। लेकिन अब जब दुनिया प्लास्टिक संकट से त्रस्द हो गई तो आखिरकार उसे अपने पुराने साथीं बांस के पास लौटने का रास्ता फिर से दिखाई दे रहा है।

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