धर्मज एक ऐसा गांव जिसके आगे देश के बड़े—बड़े शहर भी नहीं टिकते

गांव… अंग्रेजी में बोले तो विलेज, अंग्रेजी हो या हिन्दी का शब्द.. दोनों ही शब्दों से हम जिस ओर आपका ध्यान ले जाना चाहते हैं उसके बारे में आपका और हमारा दिमाग पहले ही एक तस्वीर बना चुका है। जो अब अचानक से हमारे दिमाग में घुम रही होगी, हो सकता है इसमें आपके अपने गांव से जुड़ी यादें हों, या हो सकता है आप किसी गांव में गए हो तो वहां का कुछ देखा आपको याद आ गया हो। इन सब के साथ यादों के बीच गांव से जुड़ी कुछ ऐसी बात होती है जो उसके साथ आनी ही होती है। क्योंकि हम शुरू से ऐसा ही देखते आए हैं जैसे कि, गरीबी, शिक्षा का अभाव, स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी या ऐसे ही कुछ और बातें। एक और दिक्कत है, अब गांव तो विकास कर रहे हैं लेकिन इस विकास की होड़ में गांव न तो गांव रह पा रहे है और न ही शहर जैसे दिख पा रहे हैं। ऐसे में गांव कुछ और ही बन गए हैं। लेकिन आज हम आपको एक ऐसे गांव के बारे में बताने जा रहे हैं जो असल में भारत का सबसे अमीर गांव है। और इतना अमीर है कि, बड़े—बड़े शहर भी इसके सामने फीकें हैं। अब आप कहेंगे कि, इतना ही अमीर गांव है तो इसे गांव क्यों कहें?  शहर कहना चाहिए। तो बता दें कि, यह बात ही यहां की खासियत है और यहां के लोगों का भी मानना है कि ‘गांव को गांव ही रहने दीजिए।

Dharmaj Gaon

Dharmaj Gaon- शहर से ज्यादा विकसित है, लेकिन फिर भी यह गांव है।

‘गांव को गांव ही रहने दीजिए’… इस बात का यह मतलब नहीं होता कि, गांवों को उसी हालत में छोड़ देना चाहिए। असल में इस बात का मतलब आपको तब समझ आएगा जब आप गुजरात का पैरिस कहे जाने वाले गांव धर्मज में कदम रखेंगे। यहां सब कुछ है, हर वो चीज जो आपको बड़े शहरों में देखने और करने को मिलेगा। लेकिन इन सब के साथ गांव का देसीपन भी है। यानि यह पहला ऐसा गांव है जहां शहरी और ग्रामीण दोनों तरह की लाइफस्टाइल को लोग एक साथ जीते हैं। वैसे आपको इस गांव में जाने से पहले इस गांव की वेबसाइट पर जाना चाहिए। उसके बाद जैसे ही आप गांव के द्वार पर पहुंचते हैं तो आपको गांव का एक पेम्पलेट मिलता है। गांव में पहुंचते ही आपको लंदन के शहरों की तरह बड़ा-सा क्लॉक टावर देखने को मिलता है। थोड़ा-सा आगे बढ़ते ही मर्सिडीज, बीएमडब्लू जैसी लग्जरी गाड़ियां यहां की मक्खन जैसी सड़कों पर दौड़ती हुई दिखाई देंगी। तो वहीं अंदर आपको देश के लगभग हर बैंक के ब्रांच मिल जाएंगे और इन बैंकों की सबसे खास बात यह है कि, इनमें सबसे ज्यादा पैसे गांव और गांववालों के नाम पर हैं। इसके अलावा यहां डॉमिनोज जैसे पिज्जा पार्लर और कई बड़े नामी रेस्टॉरेंटों की फ्रेंचाइजी भी है।

इसके अलावा आयुर्वेदिक अस्पताल से लेकर सुपर स्पेशेलिटी वाले हॉस्पिटल भी हैं। इनमें से कई अस्पतालों में मेडिकल फैसीलिटी भी मुफ्त है। वहीं गांव में वाटर पार्क और स्वीमिंग पुल की भी व्यवस्था है। लेकिन यह शहर के मुकाबले कई गुना सस्ता है और अच्छा भी। इस वाटर पार्क की खासियत यह है कि, ये नेचुरल है ओर इसमें हर दिन जो पानी बदला जाता है उसे खेती के लिए री-यूज कर लिया जाता है। यह मॉडल आज धर्मज से देश के कई गांवों ने सीख कर अपने यहां अप्लाई किया है। लगभग 12 हजार की आबादी वाले इस गांव में सरकार द्वारा चलाए जा रहे सरकारी स्कूल हैं तो नामी रेजिडेंशल स्कूल भी हैं। गांव में पुरानी शैली वाले मकान भी हैं और हाइटेक तकनीक से बनी बिल्डिंग्स भी। गांव में ज्यादातर पाटीदार बिरादरी के लोग रहते हैं। इसके अलावा बनिया, ब्राह्मण और दलित जाति के लोग भी यहां है।

Dharmaj Gaon- गांव की जीवनशैली के साथ शहरों की सुविधाओं तक का सफर

इतना कुछ जानने के बाद मन में एक ही सवाल आता है कि भाई इस गांव में इतनी सारी चीजें कैसे आईं और किसकी वजह से यह गांव इतनी प्रगति कर रहा है? क्या सरकार इसमें मदद करती है? तो आपको बता दें कि, धर्मज देश की शायद इकलौती पचांयत है जो सेल्फ डिपेंडेंट है, यहां के लोग अपनी जरूरत की चीजें खुद उगाते हैं और बनाते हैं। साथ ही गांव और अपने विकास के लिए पैसा पर्यटन के साथ ही कई अन्य तरीकों से जुटाते हैं। लेकिन इसके अलावा धर्मज के विकास में अगर किसी का योगदान है तो वो है यहां के एनआरआई लोगों का, जो भले रहते विदेश में हैं लेकिन उनका दिल आज भी अपने देश के इस गांव में बसता है, जहां वे पैदा हुए थे।

यहां के एनआरआई लोगों की बदौलत यह गांव आज दुनिया भर में फेमस है। गांव के लोग बताते हैं कि, ब्रिटेन में उनके गांव के कम से कम 1500 परिवार, कनाडा में 200, अमेरिका में 300 से ज्यादा और बाकी देशों में भी 500 के करीब परिवार रहते हैं। धर्मज गांव से कौन कब विदेश गया और वहां बसा और उसके बाद गांव के विकास के लिए क्या किया इस सब का ब्योरा रखने के लिए बकायदा गांव की एक डायरेक्टरी भी बनाई गई है।

Dharmaj Gaon

Dharmaj Gaon- हर साल मनाया जाता है धर्मज डे, जुटते हैं सभी एनआरआई

हर कोई जो अपने घर या गांव से दूर होता है उसे वहां की याद जरूर आती है। ऐसे में वो यह जरूर सोचता है कि, साल में एक बार तो गांव जाऊंगा ही। इसके लिए पर्व त्योहारों का इंतजार होता है। लेकिन धर्मज गांव में सभी एनआरआई किसी त्योहार पर नहीं बल्कि गांव के स्पेशल डे ‘धर्मज डे’ पर इकट्ठा होते हैं और गांव का आनंद लेते हैं। इसी दौरान उनके बच्चों को भी अपनी संस्कृति को जानने और समझने का भी मौका मिल जाता है।

कहते हैं कि, अपनी जड़ों को कभी नहीं भूलना चाहिए और उसे मजबूत करने के लिए काम करते रहना चाहिए। धर्मज गांव इस बात का एक सही उदाहरण है। यहां के लोगों ने भले ही गांव को छोड़ा लेकिन अपनी जड़ों से वो आज भी जुड़े हैं यही कारण है कि, धर्मज आज विकास के चरम पर है लेकिन आज भी इसमे लगा एक शब्द ‘गांव’ यह एहसास करा देता है कि ‘गांव को गांव ही रहने देना चाहिए’। तभी विकास का महत्व रहेगा।

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