देश की पहली महिला ऑटो ड्राइवर शीला दावरे

आजकल अगर आपको सड़कों पर महिलाएं रिक्शा या ऑटो चलाते दिखाई दें तो कोई बड़ी बात नहीं लगती। क्योंकि आजकी महिलाएं बहुत बोल्ड हो गईं हैं मगर आज हम आपको एक ऐसी महिला की कहानी सुनाने जा रहे हैं जिन्होंने 1988 में एक ऐसा कदम उठाया जिससे हर कोई हैरान था और जिस वजह से उन्हें समाज के गुस्से को झेलना पड़ा।

Sheela Davre –  1988 में शीला ने शुरू किया अपना ऑटो का सफर

शीला दावरे देश की पहली महिला ऑटो ड्राइवर जिन्होंने 1988 में तब ऑटो चलाना शुरू किया जब ज़्यादातर महिलाएं अकेले घर से बाहर कदम भी नहीं रखती थीं। शीला दावरे ने 12वीं की पढ़ाई के बाद 18 साल की उम्र में अपना घर छोड़ दिया था। उस वक्त उनके पास सिर्फ 12 रुपये थे। वो आंखों में सपने लिए घर छोड़कर पुणे आ गई थीं। मगर उनके सपने उन्हें टूटते हुए दिखाई देने लगे और अपने घर वो वापस जाना चाहती थी। फिर एक दिन उन्होंने फैसला लिया कि वो ऑटो चलाएंगी और फिर वो पुणे आकर ऑटो चलाने लगीं। उस वक्त उनका काफी विरोध किया गया। उनके माता-पिता ने भी उनके ऑटो चलाने के फैसले पर अपना गुस्सा दिखाया। वो उस वक़्त जहां से भी निकलती थी वहीं लोग उन्हें हैरानी भरी नज़र से देखते थे।

आज महिलाएं ऑटो रिक्शा चलाती दिख तो जाएंगी मगर फिर भी इक्का दुक्का ही और उन्हें भी कहीं ना कहीं विरोध और बेज्जती झेलनी पड़ ही जाती है लेकिन शीला दावरे ने तो उस वक़्त ऑटो चलाया जब महिलाएं अकेले ऑटो में सफर तक नहीं किया करती थी। मगर शीला दावरे तब भी इतनी बहादुर थीं कि उन्होंने ये फैसला 1988 में ही कर लिया था कि उन्हें किसी की चिंता किए बगैर ही ऑटो चलाने का फैसला लिया था। 

Sheela Davre –  अपना ऑटो शीला को देने से डरते थे लोग

जब शीला दावरे ने ऑटो चलाना शुरु किया उस वक्त लोग उन्हें ऑटो किराए पर देने से डरते थे कि एक महिला ऑटो कैसे चला पाएगी। लेकिन शीला ने अपने हौसले और हिम्मत के कारण हार नहीं मानी। जहां रोज खाकी कपड़े में आदमी ऑटो चलाया करते थे वहीं शीला दावरे सलवार-कमीज पहन कर ऑटो चलाती थीं। फिर उन्होंने कुछ पैसे बचाने शुरू किए और जल्द ही अपना खुद का ऑटो ख़रीद लिया।

इसी दौरान उनकी अपने पति शिरिष से मुलाकात हुई। उस वक्त शिरिष भी ऑटो चलाया करते थे। 2001 तक दोनों पति-पत्नी अलग ऑटो चलाया करते थे। पति शिरीष ने कभी लोगों की परवाह नहीं कि वो उनके पीछे क्या बोलते हैं। इसलिए उन्होंने कभी अपनी पत्नी को काम करने से नहीं रोका। इसके बाद शीला और उनके पति ने मिलकर ट्रैवल कंपनी खोल ली। शिरिष ने अपनी पत्नी का हमेशा साथ दिया। शीला के पति शीरीष का कहना है कि परिवार की सफलता और खुशहाली के लिए अपनी पत्नी या घर की महिलाओं को उनके सपने पूरे करने के लिए हमेशा प्रोत्साहित करते रहना चाहिए। तो ये थी शीला दावरे की कहानी अगर आपके पास भी ऐसी ही स्मार्ट वुमनिया की कोई कहानी है तो हमारे साथ शेयर जरूर करें।

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