दुनिया में अपना दबदबा बढ़ाती हिन्दी, अपने ही घर में झेल रही है चुनौतियां

हिन्दी हमारी राजभाषा है। आज के दिन हिन्दी के बारे में बात करना इसलिए जरूरी हो जाता है क्योंकि आज विश्व हिन्दी दिवस है। 1975 में हुए पहले ग्लोबल हिन्दी सम्मेलन को 45 साल हो गए हैं और इस बीच हिन्दी ने अपने आप को दुनिया में बड़ी मजबूती से स्थापित किया है। भारत में हिन्दी सबसे ज्यादा बोले जाने वाली भाषा है जो दो अलग—अलग बोली या भाषा के लोगों के बीच कनेक्टिंग लैग्वेज का भी काम करती है। लेकिन ऐसा नहीं है कि, भारत में जन्मी हिन्दी सिर्फ हिमालय से लेकर हिन्द महासागर तक ही सीमित है। आज हिन्दी पूरी दुनिया में बोली—बतियाई जा रही है और पढ़ी—लिखी जा रही है। यानि हिन्दी अब ऐजुकेशन और रिसर्च दोनों की ही भाषा बन गई है। दुनियाभर की 176 से ज्यादा यूनिवर्सिटीज में आज हिन्दी एक सब्जेक्ट के रूप में पढ़ाई जा रही है। जिनमें से 30 से जयादा यूनिवर्सिटीज तो केवल अमेरिका में ही हैं।

International Hindi Day,

International Hindi Day- दुनिया के कई देशों में बढ़ रहीं हिन्दी की धाक

दुनियाभर में कई सारी भाषाएं ऐसी हैं जो किसी न किसी देश की मातृभाषा है इनमें से बहुत कम भाषाएं ही अभी जिंदा हैं। यानि जिनका प्रयोग हो रहा है। अंग्रेजी जैसी भाषा के ग्लोबल यूज होने के बाद भी आज हिन्दी ने भी खुद को एक ग्लोबल भाषा के रूप में स्थापित किया है। पूरी दुनिया में अंग्रेजी, और चाइनीज मेरेडियन लैंग्वेज के बाद सबसे ज्यादा हिन्दी बोली जाती है। हिन्दी भारत की राजभाषा है। लेकिन इसके अलावा यह दूसरे कई देशों में भी इसी सम्मान से नवाजी जा चुकी है। अब बात प्रशांत महासागर में बसे देश फिजी की ही कर लेते हैं। यहां पर हिन्दी राजभाषा है। जिसे फिजी हिन्दी या फिजियन हिन्दुस्तानी कहा जाता है जो भारत की कई बोलियां जिसमें भोजपुरी, अवधी जैसी बोलियां शामिल है, से मिलकर बनी हैं।

फिजी के अलावा पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश, सूरीनाम, मॉरिश्यस, गुयाना, नीदरलैंण्ड, युगांडा, यूएई, न्यूजीलैंड, ब्रिटेन, जर्मनी, अमेरिका, रूस, साउथ अफ्रिका, त्रिनिदादा और टोबैगो जैसे कई देश हैं जहां आज हिन्दी भाषा की अलग पहचान है। यानि हिन्दी आज एक ग्लोबल लैंग्वेज है। विश्व आर्थिक मंत्र के अनुसार हिन्दी दुनिया की 10 सर्वाधिक शक्तिशली भाषाओं में से एक है। लैंग्वेज यूज इन यूनाइटेड स्टेट की एक रिपोर्ट 2011 की मानें तो हिन्दी वहां बोले जाने वाली 10 प्रमुख भाषाओं में से एक है। यहां हिन्दी बोलने वाले साढ़े छह लाख लोग हैं। अमेरिका के अलावा एशिया, अमेरिका, यूरोप और खाड़ी के देशों में हिन्दी का प्रचार-प्रसार भी तेजी से हुआ है।

रूस में सबसे ज्यादा हिन्दी पर काम हुआ है। यहां हिन्दी साहित्य और भाषा पर आज भी कई यूनिवर्सिटीज में शोध हो रहे हैं। ऐसा ही काम जर्मनी में भी हो रहा है। वैश्विक स्तर पर देखें तो आज यह 75 करोड़ लोगों की भाषा है। ऐसे में इस स्तर पर हिन्दी का महत्व और ज्यादा बढ़ा है। यही कारण है कि, हर साल आज के दिन हिन्दी को और ज्यादा प्रसारित करने के लिए ‘विश्व हिन्दी दिवस’ मनाया जाता है। आज के दिन दुनियाभर के भारतीय दूतावासों में हिन्दी को लेकर विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। आज के दौर में आप विश्वभर में हिन्दी की बढ़ती स्वीकार्यता का अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि, साल 2017 में ऑक्सफोर्ड डिक्सनरी ने ‘अच्छा’, ‘बड़ा दिन’, बच्चा, सूर्य नमस्कार जैसे शब्द अपनी डिक्सनरी में जोड़े हैं।

International Hindi Day- आधुनिक युग और इंटरनेट वाली हिन्दी

आधुनिक युग में हिन्दी तेजी से अपना दायरा फैला रही है। इसे हिंदी की ही ताकत कहेंगे कि, अब लगभग सभी विदेशी कंपनियां हिंदी को बढ़ावा देने का काम कर रहीं हैं। यहां तक कि, दुनिया के सबसे बड़े सर्च इंजन गूगल में पहले जहां अंग्रेजी को बढ़ावा मिलता है तो वहीं गूगल अब हिंदी को भी प्राथमिकता देने लगा है। हाल ही, में ई-कॉमर्स साइट अमेजन इंडिया ने अपना हिंदी एप भी लांच किया था। इसके अलावा कई अंग्रजी कंपनियों के एप अंग्रेजी के अलावा हिन्दी में भी उपलब्ध हैं। बात इंटरनेट की करें, तो इसपर भी हिन्दी की धाक बढ़ रही है। 2016 में डिजिटल माध्यम में हिंदी समाचार पढ़ने वालों की संख्या 5.5 करोड़ थी, जो 2021 में बढ़कर 14.4 करोड़ होने का अनुमान लगाया गया है। 2021 में अंग्रेजी की तुलना में हिंदी में इंटरनेट उपयोग करने वालों की संख्या अधिक होने का भी अनुमान है। इस अनुमान की मानें तो 20.1 करोड़ लोग हिंदी में इंटरनेट उपयोग करने लगेंगे। वहीं गूगल की मानें तो हिन्दी कंटेट पढ़ने वाले वाले हर साल 94 फीसद बढ़ रहे हैं।

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तेजी से बढ़ती हिन्दी के आगे कई रूकावटे भी हैं

हमारे देश में 234 मातृभाषाएं हैं, जिन्हें 10 हजार से ज्यादा लोग बोलते हैं। वहीं 42.2 करोड़ लोगों की मातृभाषा हिन्दी है। यानि 4.46 फीसद लोग सिर्फ हिन्दी बोलते हैं। 63.4 करोड़ लोगों की मातृभाषा हिन्दी नहीं है लेकिन इनमें से ज्यादात्तर लोगों के लिए हिन्दी दूसरे नंबर की भाषा है यानि कनेक्टिंग लैंग्वेज है। तमिल भाषा बोलने वाले लोगों के बीच भी हिन्दी की 4 प्रतिशत स्वीकार्यता दूसरी भाषा के रूप में है। लेकिन भारत में ही हिन्दी नई पीढ़ी से दूर होती जा रही है। नई पीढ़ी के युवा हिन्दी तो बोलते हैं लेकिन उनमें हिन्दी के प्रति वो लगाव नहीं है। न ही पढ़ने और लिखने में भी हिन्दी को लेकर नई शहरी पीढ़ी के बीच कोई इंट्रेस्ट दिखता है। जो कुछ इंट्रेस्ट है भी उसने हिन्दी की देवनागरी लिपी को ही बदल कर रोमन कर दिया है। यानि शहरी क्षेत्रों से गायब होती हिन्दी को किस तरह से बचाया जाए यह एक बड़ी चुनौती है।

हमारे देश में राजनीति हर चीज़ पर होती है, हिन्दी इससे अलग नहीं है। कई तरह के मतभेद हिन्दी से जोड़ कर राजनीति होती रहती है। जैसे कि, हिन्दी और ऊर्दू में धार्मिक आधार पर फर्क बढ़ाने की कोशिश, हिन्दी का संस्कृतिकरण करने की कोशिश, जिससे शुद्ध हिन्दी शब्द जैसी बाते सामने आती हैं। वहीं जब भी हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाने की बात होती है तब इसे लेकर होने वाले राजनीतिक विरोध। कुल मिलाकर कहें तो हिन्दी के लिए बड़ी चुनौतियां ग्लोबल लेवल से ज्यादा अपने ही घर में हैं। जहां उसकी स्वीकार्यता बढ़ाने में कई चुनौतियां हैं। हम हिन्दी की दुनियाभर में बढ़ती स्वीकार्यता को जानकर इतराते तो हैं लेकिन अपने ही घर में हिन्दी की बात आते ही हमे यह लगता है कि, हिन्दी हमारी अपनी किसी बोली को खत्म कर देगी। लेकिन असल बात यह है कि, हिन्दी भारत की अपनी भाषा है। इसकी स्वीकार्यता बढ़ने से हिन्दी और अन्य भारतीय भाषाओं का परस्पर फायदा होगा।

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