दिवाली- त्योहार एक और मान्यताएं अनेक

दिवाली, दीपावली या फिर दीपोत्सव… नाम तो कई सारे हैं, मगर इन सबके पीछे मतलब सिर्फ एक है, और वो है दीपो का त्योहार। इस त्योहार के अपने सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक महत्व हैं। दिवाली का महत्व कई हजार सालों से लेकर आज के इस आधुनिक युग में भी जस का तस बना हुआ है। दीपावली का मतलब होता है दीपों का त्योहार। लेकिन इसका एक फिलोसॉफिकल संदेश भी है-

अंधकार पर प्रकाश की विजय-  जहां अंधकार का मतलब अज्ञानता से है और प्रकाश का मतलब ज्ञान या नॉलेज से है।

दुनिया के कई देशों में आज दीपावली मनाई जाती है। लेकिन दुनिया में दिवाली की चर्चा भारत से जुड़ी है, ऐसे में भारत की दिवाली दुनिया को हर साल अचरज में डालने वाली होती हैं। दुनिया के लिए दिवाली हिन्दुओं का त्योहार है, लेकिन भारत में जहां कई धर्मो के लोग रहते हैं, उन सबके लिए दिवाली के मायने अलग अलग हैं।

Diwali- हिन्दुओं की दिवाली

दिवाली से जुड़ी प्रथाओं और ऐतिहासिक कारकों पर जब गौर करते हैं और जानने की कोशिश करते हैं तो पता चलता है कि हिन्दुओं में दिवाली मनाने और इस दिन पूजा करने के अपने अलग—अलग तरीके है। पूरब से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण तक एक भारतीय संस्कृति के कई अलग—अलग रंग हमे देखने को मिलते हैं।

Diwali

जैसे पूरब में देंखे तो इस दिन को माता दुर्गा की पूजा होती है, नार्थ इंडिया में इस दिन को भागवान राम, माता सीता और लक्ष्मण के अयोध्या आने की खुशी में मनाया जाता है, वहीं दक्षिण और उत्तर के कई हिस्सों में इस दिन को कृष्ण द्वारा नरकासुर का वध किए जाने से जोड़ा जाता है तो वहीं कहीं पर इस दिन को समुंद्र मंथन के समय माता लक्ष्मी के प्रकट होने से जोड़ कर देखा जाता है। साउथ में दिवाली को लेकर एक और अलग बात देखने को मिलती है। इसे ‘थालाई दीपावली’ कहते हैं। इस दिन को नई शादियों वाले जोड़े अपनी पहली दिवाली दुल्हन के माता—पिता के साथ मनाते हैं।

दिवाली 5 दिनों की होती है, लेकिन देश के कई हिस्सों में यह 4 दिन की भी होती है। धनतेरस, नरकाचतुदर्शी, दिवाली, गोवरधन पुजा और भैया दूज इन सभी पांच दिनों में देश के हर हिस्से में एक अलग—अलग रंग देखने को मिलते हैं। तो वहीं, हिन्दुओं के अलावा भारत में जैन, सिख और बौद्ध धर्म में भी दीपावली का अपना एक अलग महत्व है।

Diwali- जैनों की दिवाली

Diwali

जैन धर्म लगभग हिन्दु धर्म जितना ही पुराना माना जाता है। भारतीय परंपरा से जैन परंपरा अलग नहीं है। बात अगर दिवाली की करें तो जैन धर्म में इस दिन का बड़ा महत्व है। इसी दिन को जैन धर्म के अंतिम तीर्थंकर महावीर जैन का महापरिनिर्वाण यानि की मोक्ष प्राप्त हुआ था। वहीं यह दिन जैन कैलेंडर के हिसाब से साल का आखिरी दिन भी होता है। जैन धर्म के अनुसार दीपावली महावीर जैन के निवार्ण के समय से मनाई जाती है। हरिवंश पुराण के एक श्लोक के जरिए इस बारे में बताया गया है

ततस्तुः लोकः प्रतिवर्षमादरत् प्रसिद्धदीपलिकयात्र भारते।

समुद्यतः पूजयितुं जिनेश्वरं जिनेन्द्र-निर्वाण विभूति-भक्तिभाक्

इस श्लोक का मतलब है – जब महानिवार्ण हुआ तब पावपुरी दीपक की ज्योति से प्रकाशित हो गई, यह ऐसे था जैसे स्वयं भगवान इस जगह को जगमग किया हो, इस दिन के बाद भारत की जनता ने इस दिन को दीपलिका पर्व के रूप में मनाना शुरू कर दिया।

सिख धर्म और दिवाली

सिख धर्म में दिवाली हिन्दु धर्म से थोड़ी अलग है लेकिन इस दिन वे भी अपने घरों में दिया जलाते हैं। इसका इतिहास सिखों के छठे गुरु, गुरु हरगोविंद साहिब से जुड़ा है। दरअसल मुगल बादशाह जहांगीर ने ग्वालियर के किले में गुरु हरगोविंद साहिब को कैद कर रखा था जहां पहले से ही 52 हिन्दू राजा कैद में रखे गए थे। जब गुरु जी किले में आए तो सभी राजाओं ने उनका सम्मान किया।

Diwali

गुरु हरगोविंद साहिब की इस प्रसिद्धि से जहांगीर को झटका लगा और साईं मियां मीर की बात मानते हुए जहांगीर ने उन्हें छोडऩे का फैसला किया। लेकिन गुरु हरगोविंद साहिब ने अकेले रिहा होने से मना कर दिया और 52 राजाओं की रिहाई की बात कही। अंत में जहांगीर को गुरु की बात माननी पड़ी और कार्तिक की अमावस्या यानि की दीपावली को उन्हें 52 राजाओं सहित रिहा किया गया। ऐसे में सिख धर्म में इस दिन को ‘दाता बंदी छोड दिवस’ के रूप में मनाया जाता है।

बौद्धों में दिवाली

ज्यादातर बौद्ध धर्म में दीपावली नहीं मनाई जाती लेकिन नेपाल के बौद्ध धर्म के अनुयायी दीपावली का त्योहार मनाते हैं। इन्हें नेवार बुद्धिस्थट होते हैं जो वज्रयान शाखा को फॉलो करते हैं। ये लोग दीपावली पर माता लक्ष्मी की पूजा करते हैं और पांच दिनों का त्योहार मनाते है।

क्या मुस्लिम भी मनाते हैं दीवाली?

भारत में अगर पिछले कुछ सालों में सबसे ज्यादा जिस बात पर चर्चा हुई है, तो वह है हिन्दू और मुस्लमान। भारत में यह टॉपिक ऐसा है जिसपर अनेक बहस छिड़ी हैं। ये माना जाता है कि हिन्दू और मुस्लमान दोनों ही एक दूसरे से विपरीत हैं। ऐसे में यह सवाल कि क्या मुस्लिम भी दिवाली मनाते हैं? ये थोड़ा अटपटा लगता है।

लेकिन भारत अनोखा देश है। यहां के मुस्लमान भी दुनिया से थोड़े अलग हैं। भारत में ऐसे कई मुस्लिम परिवार आपको मिल जाएंगे जो दीपोत्सव का त्योहार मनाते है। वहीं मेवात के मेऊ मुस्लमान इनमें से ही एक हैं। ये मुस्लिम समुदाय धर्म से इस्लाम को मानता है लेकिन अपनी ऐतिहासिक जड़ें आज भी राम और कृष्ण में देखता है। मेऊ मुस्लमान अपने आप को भगवान राम के वंशज मानते हैं। यहीं कारण है ये मुस्लिम समुदाय दीपावली का पर्व भी मनाता है।

Diwali

जिस तरह से क्रिसमस का त्योहार थोड़ी बहुत कल्चरल डिफरेंसेस के साथ लगभग हर कोई सेलीब्रेट करता है, उसी तरह दिवाली भी भारत समेत आज दुनियाभर में मनाई जाती है। भले ही दिवाली दुनिया में एक हिन्दु त्योहार के रूप में मानी जाती हो, लेकिन इन सब के बीच जैन, सिख और बौद्धों के अपने तरीके है, इसे सेलिब्रेट करने के। इतना ही नहीं हिन्दुओं में भी दीपावली को मनाने के कई तरीके हैं। इन सभी डिफरेंसेस के बावजूद दीपावली या दिवाली का एक ही संदेश है और वो है-

‘अंधकार में प्रकाश की ज्योत’ का।

Indian

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

आखिर कैसे हुई गोवर्धन पूजा या अन्नकूट मनाने की शुरूआत

Mon Oct 28 , 2019
Share on Facebook Tweet it Pin it Email दिवाली का त्योहार आने को है। देश समेत पूरी दुनिया में रहने वाले भारतीय इस त्योहार का बेसब्री से इंतजार करते हैं। लेकिन दिवाली सिर्फ दीप जलाने से शुरू या खत्म नहीं होती। असल में दिवाली एक दिन का त्योहार नहीं बल्कि […]
Govardhan Puja