दाल-चावल खाइये, जेनेटिकल बिमारियां भूल जाइये

बदलते वक्त के साथ हमारे खाने की च्वाइस भी बदली है। बात सिर्फ भारत की करें तो हमारे यहां अब फास्ट फूड से लेकर न जाने और कितनी तरह की चीजें खानें में शामिल हो गईं है। यूं तो भारत में खाने के आइटम्स यानि की पकवानों की कमी नहीं है। आप देश के जिस हिस्से में जाएंगे आपको उस हिस्से में एक नए तरह का पकवान खाने को मिलेगा।

भारत को लेकर एक कहावत भी है, ‘कोस-कोस पर पानी बदले और 4 कोस पर वाणी’। यानी हमारे देश में खाने की विविधता और बोलियों की विविधता की कमी नहीं है। और बस इसी विविधता के लिए तो भारत को दुनिया जानती है।

खैर, फिलहाल हम बात खाने की कर रहे थे तो उसी ओर चलते हैं। जब दुनिया ब्रेड-बटर से काम चला रही थी तब भारत के लोग पौष्टिक आहार बनाने और खाने की जानकारी रखते थे। लेकिन कहते हैं ना कि घर की मुर्गी दाल बराबर, तो कुछ ऐसा ही हाल है हमारा। आज भारत में पिज्जा-बर्गर खाना कूल हो गया है। तो वहीं अपने घर में मम्मी के हाथ का दाल—भात(चावल) अब बोरिंग लगने लगा है। इतना ही नहीं यहां सवाल तो स्टेटस का भी है!

दाल-चावल है बैचलर्स की पहली पसंद

अब देखिए अगर आप किसी बड़े शहर में रह रहे हैं और आपके कुछ ऐसे दोस्त है जो ‘कूल टाइप’ या ‘ब्रो टाइप’ हैं तो भूख लगने पर भी आप उनके सामने दाल—चावल खाने की बात भूल से नहीं करेंगे। क्योंकि ऐसा करके आप ‘सो कूल’ से उनके बीच में ‘वेरी फूल’ बन जाएंगे और पूरा माहौल भी खराब कर देंगे।

बात दाल—चावल की हो रही है तो बता दें कि शायद यह खाना देश के हर घर में खाया जाता है। बैचलर्स लोगों के लिए यह पहली च्वाइस है क्योंकि इसे बनाना,चट मंगनी पट ब्याह की तरह है। बस चावल और दाल कुकर में रखकर गैस पर चढ़ाना ही तो है। शायद यही कारण है कि दाल-चावल बैचलर्स की पहली पसंद है। लेकिन आजकल दाल—भात भी बोरिंग हो चला है और हो भी क्यों न, क्योंकि रोज-रोज हम लोग यही खा रहे हैं। अब बोरिंग हो चुके खाने से बचने के लिए हम लोग पिज्जा-बर्गर से पेट भर रहे हैं, जो महंगा तो है ही, साथ में हमारे पेट को खराब करने के लिए सबसे उत्तम भी है, और भाई हमें थोड़ा कूल भी तो बनना है। क्यों?

लेकिन आप जिस खाने को बोरिंग समझ रहे हैं असल में वही दाल—भात आपके लिए सबसे बेहतर खाना है। हम भारतीयों को एक बुरी आदत है कि जब तक हमारी अपनी चीजों को बाहरी यानि वेस्टर्न लोगों से प्रमाण नहीं मिलता तब तक हम अपनी ही चीज को वैल्यू नहीं देते। तो चलिए आपको बता दें कि दाल-चावल को लेकर यह बात जर्मनी की ओर से कही गई है। यहां एक रिसर्च में दाल—चावल को दुनिया का सबसे बढ़िया खाना माना है। अगर ल्यूबैक यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों की माने तो दाल—भात खाने से आपके जेनेटिकल डिसऑर्डर भी दूर हो जाते हैं।

जर्मनी के वैज्ञानिकों ने दाल-चावल को बताया सबसे स्वस्थ आहार

इतना जानने के बाद बोरिंग दाल—चावल में आपको थोड़ा इंट्रेस्ट आ गया होगा वैसे, इस शोध में पाया गया कि खाने के कारण भी जेनेटिक प्रॉब्लम हो सकती है। मतलब अन्न जैसा खाएंगे तन से लेकर मन तक वैसा ही हो जाएगा। शोध में यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर रॉल्फ लुडविज के नेतृत्व में तीन वैज्ञानिक जिसमें रूस के डॉ. अर्तेम वोरोवयेव, इजराइल की डॉ. तान्या शेजिन और भारत की डॉ. यास्का गुप्ता शामिल थीं। इस रिसर्च को 2 साल तक उन चूहों पर किया गया जो ल्यूपस नामक बीमारी के शिकार थे। ल्यूपस एक ऑटोइम्यून बीमारी है जिसका सीधा संबध DNA से जुड़ा है। यह बिमारी किसी भी अंग जैसे किडनी, फेफड़े, ब्रेन और ब्लड सेल्स में हो सकती है।

शोध के दौरान चूहों के एक समूह को हाई-कैलोरी जैसे बर्गर, पिज्जा और दूसरे समूह को लो-कैलोरी वाले जैसे स्टार्च, सोयाबीन तेल, दाल-चावल, सब्जी दिया गया। जिससे यह पता चला कि, पश्चिमी देशों में खाए जाने वाले हाई-कैलोरी फूड से भारतीय उपमहाद्वीप में खाए जाने वाले दाल-चावल आनुवांशिक बीमारियों (जेनेटिक डिसऑर्डर) को भी मात दे देते हैं।  


ऐसा क्या खास है दाल-चावल में
दाल-चावल या सब्जी में विशेषकर हल्दी का इस्तेमाल होता है। टरमरिक आनुवांशिक बीमारियों से लड़ने में मदद करती है। हल्दी को प्राचीन काल से ही औषधि के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा है। इसमें पाए जाने वाले औषधीय गुणों के कारण यह अनेकों बीमारियों के लिए दवा का काम करती है। वहीं दाल की बात करें तो इसमें भी हल्दी डाली जाती है। इसके अलावा दाल में प्रोटीन भरपूर मात्रा में होता है। इसमें विटामिन ए, बी 12, कार्बोहाइड्रेट, फाइबर, फास्फोरस और कई तरह के पोषक तत्व होते हैं।

दाल को चावल के साथ खाने से शरीर को एक कम्पलीट प्रोटीन मिलता है। दाल में कुछ प्रकार के एमीनो एसिड पाए जाते हैं इसलिए इसे चावल के साथ मिलाकर खाने से शरीर को फायदा पहुंचता हैं। इन दोनों चीजों के सेवन से ना केवल शरीर स्वस्थ रहता है बल्कि आनुवांशिक बीमारियों से भी यह हमें बचाता है। वैज्ञानिक भी मानते हैं कि, पिज्जा-बर्गर के पीछे भागने से अच्छा है दाल-चावल खाएं।

दाल-चावल

दाल-चावल खाने के फायदे

  • दाल में कई ऐसे अमीनो एसिड्स होते हैं जो चावल में नहीं होते, ऐसे में जब आप दाल और चावल साथ खाते हैं तो आपको ये सारे पोषक तत्व मिल जाते हैं।
  • कई लोग सोचते हैं कि दाल—भात खाने से वजन बढ़ जाएगा, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं है। दाल-चावल खाने से काफी देर तक पेट भरे होने का अहसास होता है बस।
  • दाल और चावल दोनों में ही फाइबर की भरपूर मात्रा होती है। ये आसानी से पचने वाला खाना है। फाइबर के कारण यह आसानी से पचता है और पाचन तंत्र भी मजबूत होता है।
  • मांसाहारियों में प्रोटीन की कमी नहीं होती लेकिन शाकाहारी लोगों के लिए दाल ही प्रोटीन का प्रमुख स्त्रोत है। इसमें मौजूद फोलेट दिल को सुरक्षित रखने में भी मददगार होता है।

तो अब तो आप समझ गए होंगे कि असल में घर की दाल ही सोने के बराबर है, तो भैया पिज्जा—बर्गर जैसे फास्ट फूड खाकर पेट क्यों खराब करें और फालतू में अच्छे खासे शरीर को अदरक की तरह कहीं से भी फैलाने में मदद क्यों करें। इससे बढ़िया तो दाल-चावल है। जिसे बनाने से लेकर खाने तक की विधि आसान है। ‘बस एक सिटी और शरीर से बिमारियों की छूट्टी’

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