दहशत के बीच, 32 कश्मीरी लड़कियों को लेकर उनके घर पहुंचे, 3 जांबाज

वैसे तो हमारे देश में कई धर्म, जाति, के लोग रहते हैं। लेकिन जब-जब बात देश की आती हैं तब-तब हमारे ही देश में रहने वाले हिंदु, मुस्लिम, सिक्ख, ईसाई.. ये सभी धर्मों से परे भारतीय बनकर सामने आते हैं। कुछ इसी तरह दिल्ली के रहने वाले तीन सिक्ख युवकों ने भी अपने सच्चे भारतीय होने के साथ-साथ देशभर में इंसानीयत की भी मिसाल पेश की है।

दरअसल, हाल ही में जब जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाया गया था, तभी से वहां पर सभी इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं बंद कर दी गई थी। और बस इसी के चलते देश के दूसरे हिस्सों में रहने वाली कश्मीरियों का अपने परिवार से संपर्क पूरी तरह से टूट गया था। इसी दौरान पुणे में स्किल इंडिया के तहत नर्सिंग का कोर्स कर रही 32 कश्मीरी लड़कियों को भी अपने परिवार की फिक्र सताने लगी थी। तो बस उनकी मदद के लिए दिल्ली के रहने वाले 3 सिक्ख फरिश्ता बनकर सामने आए और लड़कियों को सुरक्षित उनके घर तक पहुंचाया।

Mission 32- फरिश्ता बनकर लड़कियों को सही सलामत पहुंचाया घर

आपको बता दें कि, ये सभी लड़कियां कुछ वक्त पहले ही जम्मू-कश्मीर से नर्सिंग को कोर्स करने पुणे पहुंची थी। मगर जैसे ही वहां पर आर्टिकल 370 को हटाया गया वैसे ही उन्हें भी अपने परिवार वालों की चिंता सताने लगी, परिवार से दूर रह रही लड़कियों को डर लगने लगा कि कहीं उनके परिवार वालो के साथ कोई अनहोनी ना हो जाए।

और बस इसी दौरान दिल्ली के तीन सिक्ख उनके लिए किसी फरिश्ते की तरह सामने आए। दरअसल, इनमें से एक ने धारा 370 हटाए जाने के बाद कश्मीरी लोगों की मदद के लिए फ़ेसबुक लाइव के ज़रिये उनसे संपर्क करने को कहा था. हालांकि, इसके बाद उनसे उनके दो सिक्ख दोस्त और जुड़ गए,

जिसके बाद पुणे में रहने वाली इन सभी लड़कियों ने अपनी सुपरवाइज़र रुकैया किरमानी की मदद से दिल्ली में रहने वाले हरमिंदर सिंह, बलजीत सिंह और अरमीत सिंह से किसी तरह संपर्क किया.. और बस फिर क्या था, इन लड़कियों को उऩके घर तक पहुंचाने के लिए इन तीनों दोस्तों ने मिलकर सारी जद्दोजहद की… सोशल मीडिया के जरिए चंदा भी इकट्ठा किया.. ताकि किसी तरह पैसो का इंतजाम कर इन सभी लड़कियों को सही सलामत उनके घर तक पहुंचाया जा सके।

Mission 32- इंडियन आर्मी ने भी मदद को आगे बढ़ाया अपना हाथ

खैर ये कहानी जितनी आसान सुनने में लग रही हैं इसका सफर उतना ही मुश्किलों भरा था.. तीनों दोस्त पहले उन्हें पुणे से लेकर दिल्ली पहुंचे और यहां से फ़्लाइट के जरिए श्रीनगर पहुंचे। हालांकि, इनकी मुश्किलों को काफी हद तक देश की आर्मी ने भी आसान बनाया.. क्योंकि, सभी लड़कियां जम्मू-कश्मीर के अलग-अलग ज़िलों में रहती थीं. इन्हें उनके घर तक पहुंचाने के लिए इंडियन आर्मी ने ही उनकी काफी मदद की।

इऩ सभी छात्राओं को भारतीय सेना के वाहनों के द्वारा बारामूला,बड़गाम, शोपियां, कुपवाड़ा और श्रीनगर के साथ ही पांच अलग-अलग ज़िलों में पहुंचाया गया.. और अपने बच्चों को सही सलामत अपनी आंखो के सामने देखकर उनके मां-बाप भी खुदको भावुक होने से रोक नहीं पाए.. खैर इसके बाद जैसे-जैसे लड़कियां अपने घर पहुंचती गई वैसे-वैसे उनके मां-बाप ने तीनों सिक्खों के साथ ही भारतीय सेना का भी  तहे दिल से शुक्रिया किया।

दिल्ली के रहने वाले इन तीनों ही सिक्खों ने 32 कश्मीरी लड़कियों को उऩके घर सही सलामत पहुंचा कर देशभर में एक मिसाल पेश की है। या ये कह लीजिए कि, बजरंगी भाईजान की ही तरह इन्होंने भी ये साबित कर दिया है कि, साफ दिल और नेक काम ही सच्ची भारतीयता की पहचान है।

इस आर्टिकल की पूरी कहानी को इन्हें कि किरदारों की जुबानी सुनने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें-

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