‘ताजमहल’ से पहले शाहजहां ने यहां बनवाई थी मुमताज महल की कब्र

‘ताजमहल’ मध्य काल में भारत में मुगल सम्राज्य के सम्राट शाहजहां द्वारा बनवायी गई एक अजूबी इमारात। जिसे आज भी दुनिया के सात वंडरर्स में से एक माना जाता है। इतिहास हमें बताता है कि, इस इमारत को शाहजहां ने अपनी सबसे चहेती बेगम मुमताज महल की याद में बनवाया था। इसी के मुख्य गुंबद के नीचे मुमताज महल को दफनाया गया था। वहीं शाहजहां की मौत के बाद उसे भी मुमताज के क्रब के बगल में ही दफना दिया गया। आज सफेद संगमरमर की यह इमारत पूरी दुनिया के लिए प्यार की निशानी बन गई है। दुनिया भर से लोग यहां घूमने के लिए और इसे देखने के लिए आया करते हैं। ताजमहल आज दुनियाभर में भारत की पहचान है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि, मुमताज महल को मौत के बाद ताजमहल में नहीं बल्कि कहीं और, किसी और महल में दफनाया गया था? लेकिन वह जगह कहां है?

Burhanpur

अगर ताज वह जगह है जहां शाहजहां मरने के बाद अपनी सबसे प्यारी बेगम से मिले तो जीते जी शाहजहां और मुमताज के बीच का प्रेम अगर परवान चढ़ा तो वह जगह थी बुरहानपुर। लेकिन यह बुरहानपुर है कहां?

मुगलों के लिए भारत में जीत का अभियान अगर सबसे ज्यादा कहीं कठिन रहा तो वह जगह रही दक्षिण में। मध्य भारत को पार करने में उन्हें खासा मशक्कत करनी पड़ी थी। मुगलों के राज के दक्षिण के खानदेश में ताप्ती नदी के किनारे बसा है बुरहानपुर। यह जगह मुगलों के लिए सबसे ज्यादा अहमियत रखती थी क्योंकि यह जगह उनके लिए दक्षिण में जाने का द्वार था। बुरहानपुर वह जगह थी जिसकी ओर से मुगल विन्ध्य पर्वत के पार जा सकते थे। शाहजहां इस जगह पर अपनी ताजपोशी से पहले भी एक मुगल गर्वनर के रूप में रह चुके थे। इस जगह की अहमियत को इस तरीके से समझा जा सकता है कि, इस जगह को अपने कब्जे में लेने के लिए मुगलों को कई लड़ाईयां लड़नी पड़ी थी। यहीं पर ताप्ती नदी के किनारे स्थित है बुरहानपुर का शाही किला। यह किला शाहजहां और मुमताज के बीच की प्रेम कहानी का गवाह रहा है। यहीं पर दोनों की प्रेम कहानी का आगाज हुआ, यह परवान चढ़ी और अपने अंजाम तक पहुंची।

बुरहानपुर के किलों में दबी है शाहजहां — मुमताज की प्रेम कहानी

शाहजहां सम्राट था तो उसकी शानों—शौकत भी उसी हिसाब की थी। उसके हरम में 300 रानियां थी। लेकिन कहा जाता है कि सिर्फ मुमताज ही वो महिला थी जिसके साथ वक्त बिताना सम्राट को अच्छा लगता था। दोनों के बीच का रिश्ता बेहद खास माना जाता था। तभी तो शाहजहां ने मुमताज को ‘मल्लिका ए जहां’ का नाम दिया था। ताप्ती नदी के किनारे का शाही किला कभी इन दोनों की प्रेम कहानी का गवाह रहा है। यह किला किसी जमाने में 7 मंजिला हुआ करता था। लेकिन आज इसकी 4 मंजिलें ही बची हुई हैं। इस इमारत के अंदर की बनी कलाकृतियां और नक्काशियों को देखकर ऐसा लगता है कि अगर शाहजहां और उनके कलाकारों ने ताजमहल बनाने की प्रैक्टिस कहीं की होगी तो वो इसी किले से शुरू हुई होगी। इतिहासकार भी ऐसा ही मानते हैं। किले के अंदर का शाही हमाम खास तौर पर मुमताज के लिए ही बनवाया गया था। इस गुशलखाने में जो पैटर्न मिलते हैं और जो रंग देखने को मिलते हैं वो हूबहू ताजमहल जैसा ही है। ताप्ती नदी के दूसरे छोर पर भी कई मुगल इमारतें हैं। यहां एक शाही द्वार खड़ा दिखता है, जिससे 1 कि.मी दूर आगुखाना है जो करीब 70 एकड़ के हिस्से में फला रंगमहल है। वहीं इसके आगे 12 खंबो वाला महल बारादरी है। ये दोनों इमारतें नहरों से जुड़ी थी और उसका पानी बड़े तलाबों में गिरता था। 400 साल पहले यह पूरा इलाका बागों से घिरा हुआ था, यह कुछ वैसा ही था जैसा कि, आज ताजमहल या दूसरी मुगल इमारतों में देखने को मिलता है।

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आखिर कहां दफनाया गया था मुमताज महल को?

यहीं के शाही महल में मुगल सम्राट शाहजहां और मुमताज की प्रेम कहानी परवान चढ़ी तो यहीं पर इनकी खुशियों को नज़र लग गई। मुमताज अपने 14वें बच्चे को जन्म देने वाली थीं। घंटों की पीड़ा के बाद मुमताज ने शहजादी गौहर आरा को जन्म दिया। लेकिन मुमताज जिंदा नहीं बची। उस दिन पूरी रात मुमताज के शव के पास शाहजहां बैठा रहा। कहा जाता है कि, इसी रात को मुमताज ने शाहजहां से ताज जैसी इमारत बनाने की बात कही थी, हालांकि यह बात सच है या नहीं इसका जवाब इस महल की दिवारों के बीच ही दब गया। कहते हैं कि, मुमताज की मौत का गहरा दुख शाहजहां को हुआ। वो उस जमीन की तलाश में लग गए जहां ताजमहल बना सकें। तब तक के लिए मुमताज की डेड बॉडी पर लेप लगाकर उसे बुरहानपुर में ही दफनाया गया। लेकिन कहां? इसका कोई स्पष्ट जवाब आज तक नहीं मिला। कुछ लोग कहते हैं कि, मुमताज महल को ताप्ती के किनारे के रंगमहल में दफनाया गया। लेकिन कुछ लोगों का मानना था कि, उन्हें इस जगह से कुछ 100 मीटर दूर सुरंग के मुहाने पर दफनाया गया था। इस जगह पर सुरंग के मुहाने पर स्थित इमारत के बीचों—बीच एक आयताकार खाली जगह है, जिसे देखकर लगता है कि, इसी जगह मुमताज महल को दफनाया गया होगा और यहीं से 22 साल बाद कब्र को खोदकर उनकी बॉडी को ताजमहल ले जाया गया। लेकिन सच क्या है, यह बात केवल बुरहानपुर की इन इमारतों को पता है।

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