डायन कुप्रथा: समाज में महिलाओं के ऊपर अत्याचार करने का सेफ हथियार

ओडिशा से एक खबर आई है… इस खबर ने एक बार फिर से पूरे देश में महिलाओं के प्रति अपराध करने की छूट देने वाली एक और कुप्रथा को सामने लाकर रखा है। यह कहानी ओडिशा की गंजाम में रहने वाली 63 वर्षीय बूढ़ी महिला की है जिनका नाम है नायक कुमारी। उनके शरीर में एक अनोखी चीज है और वह यह है कि उनके हाथों में 12 उंगलियां और पैरों में 20 उंगलियां हैं। लेकिन यह अनोखी बात उनके लिए श्राप बन गई। लोगों ने उन्हें ‘डायन’ घोषित कर दिया। इसके बाद से ही लोगों के बीच वह आम महिला नहीं रहीं और आस-पास के लोगों ने भी उनसे नाता तोड़ लिया। अगर कोई करीब आता भी है तो केवल इसलिए ताकी उनकी उंगलियां गिन सके।

अब ऐसे ही कुछ लोगों के बारे में आपको बताते हैं जिनके पास भी सामान्य से ज्यादा उंगलियां थी। गुजरात में रहने वाले देवेंद्र सूथर के हाथ पैरों में सात-सात अंगुलियां थी जिसके कारण उनका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज हुआ। वहीं अक्षत नाम के एक शख्स का नाम भी इसी कारण से गिनीज बुक ऑफ वल्र्ड रिकॉर्ड में जोड़ा गया। इस हिसाब से अगर देखें तो नायक कुमारी का नाम भी गिनीज बुक ऑफ रिकार्ड में दर्ज होना चाहिए। उनके हाथ और पैरों में इतनी ज्यादा उंगलियां होने का कारण पॉलीडैक्टली नाम की बीमारी है। आंकड़ों की मानें, तो दुनियाभर के 700 से 1000 में कभी कोई ऐसा जन्म लेता है। ऐसे में तो नायक स्पेशल हुईं, लेकिन उनके आस—पास के लोगों ने उन्हें अपने बीच का सबसे बड़ा खलनायक बना दिया और उन्हें डायन घोषित कर दिया। वैसे यह कोई पहली घटना नहीं है, भारत में महिलाओं के संग ऐसा होना आम बात है।

डायन प्रथा एक ऐसी प्रथा है जिसकी आड़ में एक महिला संग हर तरह का अपराध जैसे की शारीरिक उत्पीड़न, रेप, गैंग रेप, मेंटली और फिजिकली हैरास करना, हिंसा, मैला खिलाना और न जाने क्या—क्या होता है। यह प्रथा कुछ ऐसी है कि, बस किसी भी महिला के लिए एक अफवाह उड़ी और अगले ही दिन उसे डायन का तमगा मिल गया। लोग उसके रंग, आंखों के रंग, शरीर की बनावट और न जाने किन—किन चीजों को लेकर भेद निकालने लगते हैं और इन्हीं भेदों को उस महिला के डायन होने का सबूत बता देते हैं। इन महिलाओं के साथ पहले तो लोग दूरी बनाते हैं, फिर इनसे डरते भी है और अगर उनके बीच कोई अप्रिय घटना घट गई तो फिर इसी महिला पर उसका दोष मढ़ कर उसके साथ हर वो अमानवीय व्यवहार करते हैं जो एक सभ्य समाज के लिए सही नहीं है।

Witch Hunting | डायन कुप्रथा शुरू कैसे और कहां से शुरू हुई?

डायन प्रथा के इतिहास की बात करें तो इसका कोई प्रमाणिक इतिहास नहीं है। लेकिन राजस्थान, महाराष्ट्र और गुजरात में डाकन या डायन नाम की प्रथा करीब 500 से 600 साल पहले शुरू होने की बात कही जाती है। इसके तहत काला जादू करने की ताकत रखने वाली महिलाएं नवजात बच्चों को अपना निशाना बनाती थी। कहा जाता था कि, वे ऐसा शक्तियां अर्जित करने या जवान रहने के लिए करती थीं। इस दौर में भी डायन होने के आरोप में महिलाओं की पीट-पीट कर हत्या कर दी जाती थी। हालांकि राजस्थान में राजपूत रियासतों ने 16वीं सदी में कानून बनाकर इस प्रथा पर रोक लगा दी थी. वर्ष 1553 में उदयपुर में पहली बार इसे गैर-कानूनी घोषित किया गया था।

ऐसा माना जाता है कि, महाराष्ट्र के लातूर हारांगुल गांव से डायन प्रथा की शुरूआत हुई थी। कहा जाता है कि यहां पहले एक महिला डायन बनी फिर उसके बाद एक—एक करके सभी महिलाएं और फिर गांव बर्बाद हो गया। आज भी इसी कहानी के बल पर इस गांव में बहुत कुछ करना मना है।

Witch Hunting- समाज में महिलाओं की हत्या करने का हथियार है

डायन को लेकर जो भी बातें सामने आती हैं असल में यह बस अंधविश्वास के कारण हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक आधार नहीं है। असल में यह एक हथियार है जिसके जरिए महिलाओं के खिलाफ अपराध को करने और उसे जस्टीफाइ करने का मौका एक भीड़ को मिल जाता है। आंकड़े भी कुछ ऐसा ही कहते हैं। राष्ट्रीय अपराध ब्यूरो की रिपोर्ट की मानें तो साल 1991 से लेकर 2010 तक देशभर में लगभग 1,700 महिलाओं को डायन घोषित कर उनकी हत्या कर दी गई। वहीं हालिया रिपोटों की मानें तो 2001 से लेकर 2014 तक देश में 2,290 महिलाओं की हत्या डायन बताकर कर दी गई। 2001 से 2014 तक डायन हत्या के मामलों में 464 हत्याओं के साथ झारखंड अव्वल रहा है। इस राज्य के बनने के बाद से यहां 1600 से ज्यादा महिलाओं की हत्या इसी प्रथा के नाम पर कर दी गई हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ की रिपोर्ट बताती है कि, 1987 से लेकर 2003 तक 2,556 महिलाओं की हत्या डायन के शक में की गई। वहीं, यही रिपोर्ट कहती है कि कम से कम 100 से लेकर 240 महिलाओं की हत्या हर साल डायन का आरोप लगाकर कर दी जाती है। वैसे बता दें कि यह रिपोर्ट सिर्फ हत्या के मामलों की है, प्रताड़ित करने की रिपोर्ट का आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।

Witch Hunting

कानून के पालन के साथ जागरूकता और अपने मूल कल्चर को समझने की जरूरत

डायन प्रथा अंधविश्वास के कारण जिन्दा है। लेकिन बदलते वक्त में डायन प्रथा का एक अलग रूप भी दिखा है। इसमें आपसी रंजिश खासतौर पर जमीन विवाद और प्रॉपटी विवाद एक नई कड़ी है। देश के कई हिस्सों जैसे कि मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, गुजरात, पंजाब, हरियाणा, असम, बिहार सहित कई अन्य राज्यों में डायन प्रथा का मकड़जाल फैला हुआ है। बात कानून की करें तो डायन हत्या के मामले में कोई स्पेशल कानून नहीं है। हां इसमें महिलाओं के प्रति होने वाले अपराध के लिए बने कानूनों से ही काम लिया जाता है। ऐसे में यह मामला गैरजमानती है। इसकी सजा 3 साल से लेकर आजीवन कारावास या 5 लाख रुपए जुर्माने तक की हो सकती है। किसी को डायन ठहराना अपराध है, वहीं, डायन बताकर किसी पर अत्याचार करना, बदनाम करना, आत्महत्या के लिए मजबूर करना, कपड़े उतरवाना इन सबके लिए सजा महिलाओं के प्रति अपराध के रोक थाम के लिए बने कानून के जरिए ही मिलते हैं।

कुछ ऐसे भी राज्य हैं जहां डायन हत्या की रोकथाम के लिए विशेष कानून बनाए गए हैं। ऐसे राज्यों में बिहार राजस्थान, झारखंड, छत्तीसगढ़ और असम के नाम आते हैं। लेकिन अभी तक यह प्रथा खत्म नहीं हुई है। कानून होने के बाद भी इस प्रथा के तहत होने वाले क्राइम कम नही हो रहे। ऐसे में समाज में जरूरत है जागरूकता की। इसके लिए भारतीय कल्चर से बड़ा उदाहरण कहीं नहीं मिल सकता। हमारा कल्चर स्त्री पूजा का है न की उसपर जुल्म करने का। हमारे इंडियन कल्चर में कर्म को प्रधान माना गया है। लेकिन हम कर्म के बजाए इक्कीसवीं सदी में भी भूत-प्रेत और डायन प्रथाओं का बोझ ढो रहे हैं। असल में डायन प्रथा जैसी चीज बेटी पढ़ाओ, आगे बढ़ाओं जैसी बातों पर अमल करने की बात करने वाले डिजिटल और स्मार्ट इंडिया के अरमानों पर पानी फेरती है।

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