जानिए “Janta Curfew” के पीछे छिपे कई लॉजिकल तर्क

कोरोना वायरस का कहर पूरे विश्व में बरपा है। दुनियाभर के करीब 150 से ज्यादा देश इस वायरस की चपेट में हैं। कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या 3 लाख के पार पहुंच सकती है। वहीं इसके कारण 11 हजार से ज्यादा लोग अपनी जान गवां चुके हैं। हालांकि इस 91 हजार से ज्यादा मरीज ठीक भी हुए हैं।

मगर बात अपने देश भारत की करें तो यहां कोरोना वायरस अभी दूसरे स्टेज में है और अनुमान लग रहा है कि, अगले कुछ दिनों में यह तीसरे स्टेज यानि की कम्यूनिटी में फैल सकता है और अगर एक बार यह वायरस समाज के अंदर पहुंचा फिर भारत का मंजर भी इटली और चीन की तरह होने में देर नहीं लगेगी। दुनियाभर के उन देशों में जहां कोरोना के कारण लॉकडाउन हो चुका है वहां मौजूद भारतीय भी वीडियो के जरिए अपने देश में लोगों से एहतियात बरतने की अपील कर रहे हैं। वहीं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी गुरूवार को राष्ट्र को संदेश दिया और लोगों से रविवार के दिन ‘जनता कर्फ्यू’ में अपना पूरा सहयोग देने की अपील की है।

Janta Curfew,CoronaVirus

Janta Curfew है कोरोना फाइट का कारगर हथियार

भारत में कोरोना वायरस तेजी से पैर पसार रहा है। भारत में अभी तक 270 कोरोना के मामले सामने आए हैं और इस बीमारी ने 5 लोगों की जान भी ले ली है। जैसे—जैसे कोरोना के नए मामले सामने आ रहे है, वैसे—वैसे इस बात का खतरा भी बढ़ रहा है कि, यह वायरस जल्द ही अपने तीसरे स्टेज में पहुंच जाएगा। ऐसे में इस वायरस को रोकने का एक ही इलाज है और वो है ‘ब्रेक द चेन’ का। यानि किसी तरह इस वायरस के फैलने के क्रम को रोकना। प्रधानमंत्री मोदी ने गुरुवार के दिन अपने संदेश में इसी बात पर जोर देते हुए ‘जनता कर्फ्यू’ की बात कही है। पीएम ने कहा कि, सेल्फ आइसोलेशन बहुत जरूरी है ओर इस लिए संडे के दिन उन्होंने इस कर्फ्यू का लोगों से पालन करने को कहा है।

लेकिन कई लोग पीएम की इस बात का मजाक भी उड़ा रहे हैं और ऐसे हालात में भी बस नाकारात्मकता फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन असल में वे इस कर्फ्यू के महत्व को समझ नहीं रहे हैं। दरअसल, यह जनता कर्फ्यू इसलिए है क्योंकि भारत जैसे देश में जहां दुनिया की दूसरी सबसे ज्यादा आबादी रहती है, वहां प्रशासन और सरकार की हर कोशिश बेकार होगी अगर जनता अपने आप पर संयम नहीं रखेगी और खुद से सतर्कता नहीं बरतेगी। पीएम मोदी ने इस कर्फ्यू का टाइम 12 से 13 घंटे का इसलिए भी रखा है, ताकि अगर आम आदमी इस दौरान पूरी तरह से खुद को अपने घरों में लॉक कर लेता है तो कोरोना के चेन को ब्रेक करने में बड़ी मदद मिलेगी। कोरोना वायरस के खत्म होने का समय भी 12 से 13 घंटे का ही है, ऐसे में अगर वो आइसोलेट हो जाता है तो एक बड़ी आबादी को हम इस वायरस से बचा सकेंगे।

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Janta Curfew- थाली पीटने और ताली बजाने के पीछे ये कारण

‘जनता कर्फ्यू’ के बारे में बताते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने एक बात और कही थी जिसकों लेकर कई लोग मजाक बना रहे हैं। पीएम ने इस दिन शाम पांच बजे लोगों से अपनी छतों पर, घर की बालकोनियों में या दरवाजे पर आकर ताली बजाने और थाली पीटने के लिए भी कहा है। पीएम ने ऐसा इसलिए करने को कहा ताकी डॉक्टरों, सफाईकर्मियों, सुरक्षा गार्डस, पुलिस, सेना या हर वह आदमी जो कोरोनो वायरस को देश में फैलने से रोक रहा है उसके प्रति सम्मान व्यक्त किया जा सके। लेकिन असल में इस बात का दायरा यहीं तक सीमित नहीं है। असल में ताली बजाने और थाली पीटने के पीछे पारंपरिक, साइंटिफिक और अध्यात्मिक कारण भी है।

पहले बात करते हैं ताली बजाने की, तो आप अगर योग करते हैं या योग करने में विश्वास करते हैं तो आपको पता होगा कि, योग कहता है कि अगर आप ताली बजाते हैं तो 50 प्रतिशत आपके रोग यूं ही हवा हो जाएंगे, वहीं मेडिकल साइंस की बात करें तो ताली बजाने से एक्वाप्रेशर सही होता है। यानी हमारी हथेली का हर हिस्सा हमारे शरीर के हर मुख्य अंग से जुड़ा होता है, ताली बजाने से ये सभी स्वस्थ्य होते हैं। मेडिकल साइंस मानता है कि, ताली बजाने से अस्थमा के मरीज को लाभ मिलता है, डायजेशन मजबूत होता है, इम्यून सिस्टम सही होता है, डायबीटिक पेसेंट के स्वास्थ्य में भी लाभ होता है।

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बात थाली बजाने या घंटी बजाने की करें तो पारंपरिक और अध्यात्मिक रुप से इसका भी अपना महत्व है। मंदिर में घंटी इसलिए बजाई जाती है ताकी कॉसमिक एनर्जी क्रिएट की जा सके। लेकिन अगर साइंटिफिक कारणों पर गौर करें तो घंटी की आवाज हवा में एक तरह का वाइब क्रिएट करती है जो हवा में मौजूद कई तरह के खराब माइक्रोब्स को नष्ट कर देता है। वहीं बात थाली पीटने की करें तो यह हमारी बॉडी के नसों को चार्ज करती है और हमे अंदर से स्ट्रॉन्ग करती है।

ताली बजाने, घंटी बजाने और थाली पीटने की परंपरा भारत में कई जगहों पर रही है। कई समुदायों में युद्ध से पहले थाली पीटने की परंपरा रही है। इससे  योद्धाओं का सेल्फ कॉन्फिडेंस बढ़ता था। घंटी मंदिर में तो बजाई जाती ही है  साथ ही सुबह और शाम दो समयों में आरती होती है जो आस—पास के वातावरण को सही रखती है साथ ही इस दौरान ताली बजाने की परंपरा लोगों को फायदा पहुंचाती है।

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