जब चैप्पल ने दीपक चाहर को कहा कि, तुम में नहीं है क्रिकेटर वाली बात!

बीते रविवार भारत और बांग्ला देश के बीच हुआ मैच देखा आपने, देखा होगा तो पता ही होगा कि भारत ने बांग्लादेश को हराकर टी-20 श्रृंखला अपने नाम कर ली है। तीन टी-20 मैचों के इस सीरीज को भारत ने 2—1 से अपने नाम कर लिया। इस बीच एक खिलाड़ी है जिसकी चर्चा हर तरफ है। कद-काठी में लंबा है और बॉलिंग के मामले में इतना जबरदस्त है कि, क्या कहा जाए। हिट से आपने नाम का अंदाजा लगा ही लिया होगा तो हम उस खिलाड़ी का नाम बता देते हैं, उनका नाम है Deepak Chahar।

Deepak Chahar

जी वही, Deepak Chahar जिन्होंने इस मुकाबले में हैट्रिक ली और भारत की जीत के हीरो बन गए। टीम इंडिया के तेज गेंदबाज दीपक चाहर ने बांग्लादेश के खिलाफ बीते रविवार को नागपुर में खेले गए मुकाबले में रिकॉर्ड तोड़ गेंदबाजी की और टी-20 इंटरनेशनल के इतिहास में वो कीर्तिमान रच दिया जो किसी भारतीय गेंदबाज से नहीं हुआ। दरअसल, Deepak Chahar ने टी-20 इंटरनेशनल में हैट्रिक ली इससे वे ऐसा करने वाले 11वें गेंदबाज बन गए। लेकिन यह पूरा रिकॉर्ड नहीं है। असल बात तो यह है कि, उन्होंने 3.2 ओवर में 7 रन पर छह विकेट लिए जैसा आज तक किसी गेंदबाज ने नहीं किया है। इससे पहले ऐसा ही रिकॉर्ड 7 साल पहले श्रीलंका के मिस्ट्री गेंदबाज अजंता मेंडिस ने रचा था। उन्होंने जिम्बाब्वे के खिलाफ 8 रन देकर छह विकेट लिए थे। लेकिन अब मेंडिस को दीपक ने पीछे छोड़ दिया है।

लेकिन कहते हैं ना, कामयाबी का शोर एक दिन सुनाई देता है लेकिन उसके पीछे कई सालों की मेहनत, धैर्य और त्याग की एक इंस्पिरेशनल कहानी होती है। दीपक चाहर की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। जिससे बहुत कुछ सीखा जा सकता है। तो चलिए आपको दीपक चाहर की इसी कहानी के बारे में बताते हैं।

Deepak Chahar- चैप्पल को जवाब देने लौटे दीपक चाहर

आपको टीम इंडिया के पूर्व कोच ग्रेग चैपल याद तो होंगे ही, वहीं जिनके कारण सौरभ गांगुली जैसे खिलाड़ी का भी करियर खराब हुआ और टीम इंडिया एक बहुत बुरे दौर से गुजरी। वहीं जिससे देश की जनता भी इतनी खफा थी की एक आदमी ने चैपल को सरेआम थप्पड़ मार दिया। वहीं चैप्पल साहब दीपक चाहर की जिंदगी में भी थे और यहां भी उनका रवैया खून चूसने वाले ड्रैकुला की तरह ही था। लेकिन चैप्पल के इस रवैये का शिकार जब चाहर बने तब उनकी उम्र सिर्फ 16 साल थी। दरअसल, बात 2008 की है, चैप्पल उस समय राजस्थान क्रिकेट असोसिएशन ट्रायल ले रहे थे। अच्छे खिलाड़ियों को छांटकर उन्हें बाहर करने की कला में माहिर चैप्पल ने चाहर को बाहर कर दिया। चाहर ने ट्रायल में कई गेंदें फेंकी, मगर मास्टर जी को मज़ा ही नहीं आया और उन्हें रिजेक्ट कर दिया। उस समय चाहर को टॉप-50 में भी नहीं चुना गया था।

लेकिन चाहर को अपने खेल पर भरोसा था तो उसने चैप्पल साहब से पूछ लिया कि, मुझमें क्या दिक्कत दिखी आपको? तो जवाब मिला – ‘मुझे नहीं लगता कि आप हाई लेवल तक क्रिकेट खेल सकते हैं, आपमें क्रिकेटरों वाली बात नहीं है। इस बात को सुनकर उनकी आंखों में आंसू तो आए पर जहर का घूंट पीकर चाहर ने खुद को संभाला। संभाला ताकि वापस आ सके और हर उस आदमी को जिसने उन्हें नकारा था उसे जवाब दे सकें कि, उनमें अगर कोई बात है तो वो सिर्फ क्रिकेट वाली ही बात है।

Deepak Chahar- धोनी के भरोसेमंद गेंदबाज रहे हैं दीपक चाहर

इसके बाद चाहर को देखा गया साल 2010 में, नवंबर वाला महीना था 18 साल के चाहर राजस्थान के रणजी टीम का हिस्सा थे। पहला मैच हैदराबाद के खिलाफ था और इसी मैच से चाहर स्टार बन गए। इस मैच में उन्होंने 7.3 ओवरों में 8 विकेट चटकाए और इसके लिए सिर्फ 10 रन दिए। इस दौरान 2 ओवर मैडन भी किए। हैदराबाद की टीम शर्म से पानी—पानी हो गई। पूरी टीम मात्र 21 रन बना सकी। ये रणजी ट्रॉफी का अब तक का किसी टीम का सबसे कम स्कोर था। इससे पहले ऐसी घटना 76 साल पहले हुई थी। चाहर की गेंदबाजी के कारण 77 साल में पहली बार राजस्थान को रणजी ट्रॉफी का मुंह देखने को मिला। राजस्थान के लिए कमाल करने वाले दीपक चाहर धोनी के भी फेवरेट रहे। आईपीएल में वो चेन्नई सुपरकिंग्स की तरफ से खेले। धोनी ने भरोसा जताया और चाहर उस पर खरे उतरे, शानदार बॉलिंग की।

लेकिन 2010 के धमाकेदार डेब्यू करने वाले इस खिलाड़ी पर लोगों की नज़र 2018 में ही पड़ी। इसकी एक बड़ी वजह रही उनकी फिटनेस। 2011 से 2014 के बीच वो कई बार चोटिल हुए। इस दौरान जॉन्डिस के शिकार रहे। तीन महीने बिस्पर पर ही लेटे रहे। इस दौरान चोट के कारण काफी दिक्कत हुई जिसके बाद उन्हें मार्शियल आर्ट्स की ट्रेनिंग लेनी पड़ी। 2018 के आईपीएल में जब दीपक धोनी की टीम में आए तो उनके अंदर का सेल्फ कॉन्फिडेंस तेजी से बढ़ा और तेजी से किस्मत चमकी। वो पूरे टूर्नामेंट में छाए रहे। Deepak Chahar इसका क्रेडिट धोनी को देते हैं। वे कहते हैं कि, धोनी ने उनको काफी मोटिवेट किया। उनपर भरोसा जताया, उसी की बदौलत वो अच्छा खेल सकें।

अपने पापा को अपना सबसे बड़ा कोच मानते हैं चाहर

Deepak Chahar

वैसे दीपक के क्रिकेट करियर में चैप्पल से भी बड़ा एक रोचक किस्सा है और वो उनके पापा का हैं जो एयरफोर्स में थे। पापा लोकेंद्र चाहर की जिद्द थी कि, अपने बेटे को क्रिकेटर बनाकर ही रहेंगे। तो बस 10 साल की उम्र में ही दीपक को जयपुर की जिला क्रिकेट अकेडमी में एडमिशन दिलवा दिया। बाद में लोकेंद्र को लगा कि, उनके बेटे के करियर और उनके सपने के बीच में उनकी नौकरी आ रही है तो उन्होंने उसे भी छोड़ दिया। Deepak Chahar खुद कहते हैं कि उनका सबसे बड़ा कोच उनके पापा ही हैं। खैर अब चाहर इंटरनेशनल टीम का हिस्सा हैं और अपनी बॉलिंग से आज उन्होंने चैप्पल के पुराने रिजेक्शन के कारण को गलत तो सिद्ध कर दिया है लेकिन अभी उनका करियर बहुत बड़ा है। और हमे आशा है कि चाहर आगे भी चैप्पल की बात को ऐसे ही झूठलाते रहेंगे।

 

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