जनसंख्या वृद्धि में भारत विश्व गुरू था, है और रहेगा!

‘विश्व गुरू’, हमारे देश के बारे में अक्सर यह शब्द इस्तेमाल होता आया है। जब देखों तब यहीं सुनते हैं ‘भारत को फिर से विश्व गुरू बनाना है। लेकिन भैया 2020 में आपको यह नारा सुनने को नहीं मिलेगा। अब आप पूछेंगे कि क्यों? भारत तो अभी भी विश्वगुरू नहीं बना है तो भला यह नारा क्यों नहीं सुनाई देगा? तो जवाब भी सुन लीजिए कि, भारत तो विश्वगुरू है ही और आज नहीं बहुत सालों से भारत विश्वगुरू है और इस गुरू के ज्ञान का भंडार कुछ ऐसा है कि, पूरी दुनिया भी हैरान है और इतनी हैरान है, कि उसे समझ नहीं आ रहा कि वो इसकी कॉपी कैसे करे। भारत ने अपने इस गुरूज्ञान से 2019 तो छोड़िए 2020 के पहले ही दिन ऐसा रिकॉर्ड बना दिया कि बेचारा हमारा पड़ोसी चीन का भी मत्था घनचक्करा गया कि, इंडियन्स ऐसा कैसे कर सकते हैं।

हम विश्वगुरू क्यों हैं यूएन की रिपोर्ट बताती है!

आपने नए साल की पहली तारीख की खबरें पढ़ी ही होंगी, पढ़ी होंगी तो आपको पता होगा कि इस दिन इंडिया के विश्वगुरू होने का प्रमाण मिल गया था। एक ओर सिनेमा घरों में ‘गुड न्यूज’ फिल्म का जलवा था तो वहीं दूसरी ओर देश में पिछले 9 महीनों में हुए परफॉर्मेंस का रिजल्ट भी एकदम ‘गुड न्यूज़’ बनकर आया। 1 तारीख को जब हम और आप एक दूसरे को ‘हैप्पी न्यू ईयर’ कह रहे थे तो यूएन ने भी दुनिया को हैप्पी न्यू ईयर विश किया। एक रिपोर्ट में कहा गया कि नए साल की पहली तारीख को पूरी दुनिया में 386,000 बच्चों का जन्म हुआ है। दुनिया के लिए आई इस एक गुड न्यूज में इंडिया और हम इंडियन्स के लिए दो गुड न्यूज थी। पहला ये कि इन 386,000 में से 69,000 बच्चे हमारे थे। मतलब हमारे देश में पैदा हुए और दूसरी बड़ी खुशखबरी यह थी कि बच्चे पैदा करने के मामले में हम दुनिया में अव्वल रहे। मतलब चीन तो भैया हमारे अगल—बगल भी नहीं है। चीन में 1 जनवरी को केवल 44,760 गुड न्यूज आएं।

World Population

यूनिसेफ की रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि, चीन के बाद नाइजीरिया का नंबर है फिर पाकिस्तान (14,910), इंडोनेशिया (13,370), अमेरिका (11,280), कांगो (9,400), इथोपिया (9,020) और बांग्लादेश (8,370) आते हैं। मतलब साफ है कि इंडिया की इस विद्या के सामने तो अमेरिका भी फेल है। रिपोर्ट बताती है कि भारत में हर दिन 69 हजार बच्चे पैदा हो रहे हैं। 2 जनवरी तक हमारी पवित्र भारत भूमि पर कुछ आबादी 1,373,270,210  हो गई। वैसे यह गुड न्यूज यहीं तक नहीं रूकने वाली। यूएन की रिपोर्ट एक और बात कहती है कि इस साल के बीच में मतलब 6 महीने बीतते-बीतते हमारा विश्वगुरू का परिवार 1,380,004,385 हो जाएगा। हमारी विश्वगुरू वाली विद्या कितनी प्रबल है इस बात का अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि, हम लोग 1955 में केवल 409,880,595 थे और पिछले साढ़े पांच दशकों में हम दुनिया की आबादी का 17.7 प्रतिशत हिस्सा हो गए हैं।

विश्वगुरू भारत की बराबरी कर रहा है चीन

भारत में हर दिन आने वाली 69 हजार गुड न्यूज़ से दुनिया भी परेशान है। उसकी परेशानी यह है कि, ये लोग सारा रिसोर्स हड़प लेगें। लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं है असल बात तो यह है कि, दुनिया में सारे देश हमसे जलते हैं। क्यों जो काम आप कर नहीं सकते उसका तो मज़ाक ही बना सकते हैं। वर्ना चीन को देखिए इतने सालों से इस प्रचीन गूढ़ विद्या में हमारा साझेदार रहा हमारा पड़ोसी हर साल हमसे कॉंपटीशन करता है कि आगे नहीं निकलने देंगे। ये कॉंपटीशन वाली भावना बनी रहनी चाहिए और शायद रहेगी भी, लेकिन हमने इसे कॉंपटीशन के बजाए अपनी शान पर ले लिया है। क्या करें हम भारतीय बहुत जज्बाती होते हैं ना।

इतने जज्बाती हैं कि, चीन को इस मामले में चेता चुके हैं कि बस पांच साल और हम ‘गुड न्यूज़’ के मामले होंगे तुमसे भी आगे। और इसकी शुरूआत इस साल की पहली तारीख को हम कर चुके है।

जनसंख्या नियंत्रण बेकार का फंडा है?

एक ओर देश में रोज इतनी सारी अच्छी खबरें आ रहीं है। लोगों की लाइफ अच्छे से कट रही है। एक पति—पत्नी अपने चार पांच सपूतों को बिना दूध, बेहतर खाने के पाल पोस रही है, वहीं हमारे देश में कुछ इन गुड न्यूज पर ग्रहण लगाने की तैयारी में हैं। हाल ही में एक कुंवारे बाबा ने लोगों के बच्चे पैदा करने की आजादी पर छीनने की ही गुहार सरकार से कर दी। मतलब यह कोई बात हुई। हम रहते भारत में है, जो एक डेमोक्रेटिक देश है,हर किसी को अपने हिसाब से जीने की आजादी और ‘राइट टू लाइफ और लीव में से आप आम आदमी के बच्चे पैदा करने का अधिकार छीनना चाहते हैं!

World Population

उन बाबा को यह पता नहीं है कि इन गुड न्यूज के लिए इन परिवारों को कितने बैड न्यूज सुनने और देखने होते हैं। कभी बच्चा पैदा होते मर गया, कभी एक सप्ताह मे और अगर जी भी गया तो भूख के मारे मर जाता है या पापी पेट के लिए किसी को मार देता है। असल में उन बाबा को चाहिए कि वो सरकार पर व्यवस्था को दुरूस्त करने के काम में लगें। आम आदमी के अधिकारों को छीनने की साजिश न करें। मतलब एक तो आम लोग गरीब ऊपर से वो इतना पैसा खर्चा कर अपनी महिलाओं की जान को खतरे में डाल कर परिवार की बढ़ोत्तरी के लिए गुड पे गुड न्यूज देने में लगे है ताकि परिवार की माली हालत भविष्य में सही हो सके। वहीं ये कुछ चंद लोग इन तबके की फ्यूचर प्लानिंग को खत्म करना चाहते हैं।

चेतावनी : — ये Good News बैड भी हो सकती है

ऊपर लिखी बातों से हम सहमत नहीं हैं। गुड न्यूज का आना बड़ी अच्छी बात है। लेकिन गुड न्यूज की संख्या जितनी तेजी से बढ़ रही है उससे तो यही लगता है कि, यह गुड न्यूज बड़े स्तर पर बैड हो गयी है। हम इस मामले में चीन को भी पिछाड़ने वाले हैं। लेकिन हमारे देश की बढ़ती आबादी भी हमारे लिए कई दिक्कतें पैदा कर सकती हैं। इसे कंट्रोल तो करना ही होगा। क्योंकि ज्यादा गुड न्यूज देश के लिए बदहजमी का कारण बन सकता है और इस बदहजमी के नमूने हमने पिछले कई सालों में बहुत देखें हैं। ‘वैसे बढ़ती आबादी के आगे तो सरकार भी हार गई है। वर्ना ‘हम दो हमारे दो’ वाले टैग जो गुड न्यूज को लीमिट करते थे वो गांव की हर दीवार से गधे के सिर से सींग की तरह गायब नहीं होते। टैग लाइन भले गायब हुआ हो लेकिन खतरा नहीं। तो सर्तक रहिए, सावधान रहिए, आजादी अच्छी चीज है, लेकिन अगर आपकी आजादी दूसरों की आजादी छीनने लगे तो उसपर तो लगाम कसनी ही होगी।

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