गोल्डन पंच लगाने वाली उड़न परी हिमा दास की असल जिंदगी

आज चर्चे महज दो चीजों के हैं, एक भारत की सुनहरी उड़न परी और दूसरा भारत का सपना चंद्रयान-2

पिछले एक महीने की अगर बात करें तो, वर्ल्ड कप से लेकर, यूपी में सोनभद्र की वारदात और बिहार और असम में बाढ़ न जानें कितना कुछ घटा. सभी चीजें तकलीफ देह थी…लेकिन पिछले एक महीने के अंदर एक लड़की ने पांच बार भारत को एक ही वजह से गौरान्वित किया है…वो वजह है भागने की वो वजह है अंदर के भूख की और वो नाम है. भारत की सुनहरी उड़न परी हिमा दास. ऐथलेटिक्स की दुनिया में लगातार गोल्ड हासिल करने वाली हिमा दास का नाम आज हर इंसान की जुबां पर है और हो भी क्यों न एक महीने के अंदर हिमा दास ने 5 गोल्ड भारत की झोली में डाले हैं.

लेकिन क्या आप रेस ट्रैक की उड़ान भरने वाली हिमा दास की कहानी जानते हैं, आज हम आपको मिलाते हैं…महज 19 साल की उड़न परी से जिसने असम के एक छोटे से गांव ढिंग से निकलकर, वो कारनामा कर दिखाया जो आज तक कोई नहीं कर सका. ढिंग एक्सप्रेस के नाम से पहचानी जाने वाली हिमा दास ने दो साल पहले ही रेसिंग ट्रैक पर कदम रखा था. एक गरीब किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाली हिमा दास ने जिंदगी के कई उतार चढ़ाव देखे.

पांच भाई-बहनों में सबसे छोटी हिमा

नौगांव जिले के ढिंग गांव की रहने वाली हिमा दास के पिता रंजीत दास के पास मात्र दो बीघा जमीन है. जिस पर खेती करके हिमा दास के पिता पूरे घर के सदस्यों की अजीविका चलाते हैं. यही वजह है कि, जब भी हिमा अपने घर की इस स्थिति पर बात करती हैं तो उनकी आंखें भर आती हैं और यही जब याद करके हिमा दास रेसिंग ट्रैक पर उतरति हैं तो भारत की झोली में एक के बाद एक गोल्ड डाल देती हैं.  

जब हैरान रह गए कोच, निपुन दास

हिमा बताती हैं कि, वो लड़कों के साथ अपने खेत में फुटबॉल खेलती थी. इसके बाद जवाहर नवोदय विद्यालय में पढ़ाने वाले पीटी टीचर ने उनको उस समय रेसर बनने की सलाह दी थी. हालांकि पैसों की तंगी इतनी थी कि, न तो उस समय भागने को पैर में जूते थे और न ही कोई सहारा. इसके बाद स्थानिय कोच निपुन दास ने सलाह दे डाली की वो जिला स्तर पर होने वाली 100 और 200 मीटर की रेस में भाग ले..और उन्होंने किया भी ऐसा और इस दौड़ में भी वो इस तरह भागी की सभी को हैरान कर दिया. जिसके बाद निपुन दास उन्हें अपने साथ लेकर गुवाहाटी आ गए.

हिमा का जूनुन ही था कि, बचपन में ही सभी से आगे निकल गया और जिला स्तर पर सभी गोल्ड मेडल उन्होंने अपने नाम कर डाले. यही देखकर निपुन दास ने भी अपने अंदर ठान ली कि, हिमा दास अब एक रेसर ही बनेगी. गुवाहाटी आने के बाद निपुन दास ने ही हिमा का खर्चा उठाया. शुरुवात के समय में हिमा को 200 मीटर की रेस के लिए उनके कोच ने तैयार किया, हालांकि हिमा की फुर्ती और तेज देखने के बाद उनके कोच ने उन्हें 400 मीटर की रेस में भी हिस्सा लेने को कह दिया.

गोल्ड मेडल की झड़ी-

हिमा दास ने इस महीने 2 जुलाई 2019 को 200 मीटर रेस में हिस्सा लिया और उसमें गोल्ड जीता, उसके बाद 7 जुलाई को पोलैंड में कुंटो ऐथलेटिक्स में 200 मीटर रेस में हिस्सा लिया और गोल्ड जीत लिया, उसके बाद हिमा ने 13 जुलाई को चेक रिपब्लिक में हुई रेस में 200 मीटर में हिस्सा लिया और गोल्ड जीत लिया, उसके बाद हिमा ने 17 जुलाई को 200 मीटर रेस में हिस्सा लिया और गोल्ड जीत लिया, उसके बाद हिमा ने 20 जुलाई को एक गोल्ड मेडल अपने नाम किया. ये तो अभी की बात है. इसके अलावा भी हिमा दास कई जगह पर मेडल अपने नाम कर चुकी हैं. इसके अलावा हिमा दास देश की पहली भारतीय महिला बन गई हैं जिसने वर्ल्ड ऐथलेटिक्स चैंपियनशिप ट्रैक में गोल्ड मेडल जीता है. इसके अलावा हिमा दास ने 400 मीटर की रेस 51.46 सेकंड में खत्म करके नया रिकॉर्ड बना डाला. जिसके बाद देश के राष्ट्रपति से लेकर देश के प्रधानमंत्री, बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन से लेकर देश के हर इंसान ने उनको बधाइयां दे डाली.

 हालांकि हिमा बताती हैं, जिस समय मैंने अपना पहला मेडल जीता था उस समय मैंने घर पर फोन किया था. वो समय घर वालों के सोने का समय था. घरवालों को मालूम ही नहीं था कि, मैंने क्या कर दिया. मैने उन्हें कहा आप सो जाओ अगली सुबह आपको पता चलेगा आपकी बेटी ने क्या किया…

Indian

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

Padbank- गरीब लड़कियों और महिलाओं को मुफ्त पैड बांट रहा पैडबैंक

Tue Jul 23 , 2019
Share on Facebook Tweet it Pin it Email आपने आज तक कई बैंको के बारे में सुना होगा। होम लोन बैंक, कृषि बैंक, चिल्ड्रन बैंक, और भी ना जाने क्या-क्या। लेकिन क्या आपने कभी पैडबैंक के बारे में सुना है? अगर नहीं तो चलिए आज हम आपको बताते हैं कि, […]
Padbank