खुद के दम पर दुनिया बदलने निकला कलाकार

रमता जोगी बहता पानी….ये 4 शब्द नहीं पूरी कहानी हैं, एक पूरी कहानी हैं जो किसी भी इंसान को आसानी से परिभाषित कर सकता है. कुछ इन्हीं 4 शब्दों पर एक शख्स है जो अपनी जिंदगी जी रहा है. जो अपने दम पर दुनिया बदलना चाहता है. हाथ में एक डायरी लिए, काले कुर्ता में खाली जेब वो निकला हुआ है लोगों को मानवता का संदेश देने.

वो इस समय देश के हर राज्य में जाकर लोगों से वहां की समस्या से रूबरू होता है और अपनी डायरी में एक नाटक लिखता है…ऐसा नाटक जिसे वो उसके बाद लोगों के बीच करता है. जिसका नाम है विपुल सिंह, 23 साल के विपुल आज अपने घर से निकलकर दूर-दराज इलाकों में, अपनी प्रतिभा के सहारे लोगों की समस्याओं को सुलझाने और उनको जागरूक करने का काम कर रहे हैं. साथ ही विपुल ये काम बिना किसी मदद के कर रहे हैं.

यही नहीं विपुल पिछले 7 सालों में करीब 15 राज्यों में 688 प्ले कर चुके हैं और यही वजह है कि, आज के समय में विपुल ने अपनी जिंदगी का मकसद ही समाज में परिवर्तन लाना बना लिया है.

एक सोच, एक तरीका और बेहतर समाज- विपुल सिंह

जाहिर है, आज के समय में हर इंसान उस रेस में भागता रहता है. जहां से अपना करियर सिक्योर करना होता है, यही वजह है कि, उस इंसान को भी मां बाप बचपन से ही उसी भीड़ का हिस्सा बना देते हैं. जिसमें सब भाग रहे होते हैं. बात चाहे स्कूल, कॉलेज या फिर नौकरी की करें…कुछ इसी तरह ही विपुल ने भी स्कूल पास किया. इंजीनियरिंग में दाखिला लिया और पढ़ाई में मन न लगने की वजह के चलते ही, इंजीनियरिंग के तीसरे साल में फेल हो गए, क्योंकि मन में बावरा पक्षी कोई और ख्वाब लिए उड़ना चाहता था. बचपन से थिएटर का शौक पाले विपुल ने जब पढ़ाई छोड़ने की बात अपने पापा से कही तो विपुल के पापा राजी हो गए. वो भी इसलिए क्योंकि विपुल ने उन्हें पढ़ाई छोड़ने की वजह दी थी, हालांकि इस दौरान विपुल को खुद नहीं पता था की आगे उन्हें करना क्या है. जिसके बाद विपुल ने आजाद पंछी की तरह उड़ना शुरू किया. बिना सोचे समझे एक रास्ता चुना और उसी रास्ते की डगर पर चल दिए. जेब में पैसा नहीं, रातों का ठौर ठिकाना नहीं, आगे हासिल क्या होगा मालूम नहीं. लेकिन अपने ख्बावों की भनक थी. जो कामयाबी की मिसाल कहती थी.

सपने देखने के बजाए उन्हें जीना सीखो- Vipul Singh

वो कहते हैं न कि, अपेक्षाऐं उस वक्त और बढ़ जाती हैं. जिस समय आपके अपने किसी मुकाम पर पहुंच गए हो और अपनी ही तरह वो आपसे भी उसकी उम्मीद लगा लें. हालांकि जब आप अपने सपने देखने की बजाए उन्हें जीने लगो तो किसी का विरोध भी आपको आगे बढ़ने से रोक नहीं पाता. अगर आज के समय की बात करें तो, यूनिवर्सिटी के कैंपस से लेकर पॉश इलाके में आज कहीं न कहीं हमको कुछ लोग जीन्स, कुर्ते और गले में अंगोछे डाले मिल जाएगें. जो खुद को थिएटर आर्टिस्ट कहकर लोगों के बीच चीख-चीखर भीड़ इकट्ठा करेगा और समाज में पल रही बुराईयों के प्रति वहां मौजूद इंसान को जागरूक करेगें. हालांकि, आज विपुल ये काम अकेले कर रहे हैं.

यही नहीं अपने बचपन में 3 साल तक ठीक से बोल और चल न पाने के चलते, जिस समय डॉक्टरों ने कह दिया था की ये 9 साल से ज्यादा नहीं जी पाएगा. उसके बाद से लेकर अब तक विपुल समाज में उन बुराईयों के खिलाफ बोलते रहे हैं जो वाकई सोचने वाले विषय हैं.

चाहे बात बनारस के मडुआडीह की उन झोपड़ियों में रहने वाले शख्स उस शख्स की जो हर रोज दारु पीकर अपनी पत्नी को मारता था, या फिर उस औरत कि, जिसे अपनी नाबालिक बेटी की शादी करानी थी या फिर किसी की भी विपुल से मिलने के बाद आज के समय में उनका नजरिया इस कदर बदल गया है कि, अब वो इंसान दारु नहीं पीता साथ ही अपनी पत्नी पर हाथ नहीं उठाता, यही नहीं वो मां जो अपनी नाबालिग बेटी की शादी कराना चाहती थी, वो अब शादी नहीं कराना चाहती.

Solo Play करते हैं Vipul Singh

आज समाज के नजरिये को बदलने के लिए विपुल पदयात्रा का भी सहारा ले रहे हैं, जिसमें विपुल ने दो बार लंबी पदयात्रा की. जिसमें उन्होंने 21 फरवरी 2016 को भोपाल से जम्मू तक की पैदल यात्रा की थी और 27 सौ किलोमीटर की इतनी लंबी यात्रा को विपुल ने महज 95 दिन में पूरा कर लिया था. अपनी इस यात्रा के दौरान विपुल ने समाज में पल रही तमाम बुराईयों से लेकर महिलाओं के परियड्स, बालविवाह, दहेज प्रथा पर नुक्कड़ नाटक किया.

इसके अलावा विपुल ने साल 2017 में वुमन ट्रैफिकिंग को रोकने के लिए कोलकाता से दिल्ली तक का सफर किया था. विपुल खुद कहते हैं कि, आज तक दुनिया में किसी भी इंसान ने इतने सारे नुक्कड़ नाटक नहीं किए हैं. मैंने शहर से लेकर देहात तक दोनों जगहों की बात की है. हर जगह की समस्याओं को नाटक के जरिए परफार्म किया है. हां, इस दौरान मैंने गांव में जाकर बहुत कुछ सीखा है. वहां की संस्कृति से लेकर सभ्यता तक मैंने बहुत कुछ सीखा है. आज जहां शहरी लोग खुश दिखाई नहीं देते वहीं गांव के लोग आज भी आपस में खुश रहते हैं. आज के समय में विपुल कहीं भी जाने आने के लिए लोगों की मदद लेते हैं. अपने प्ले से मिले पैसे से ही खाना खाते हैं और स्टेशन से लेकर रोड़ पर रात गुजारते हैं.

इसी तरह एक यात्रा के दौरान उन्हें कुछ चोरों ने पकड़ लिया था. उस समय विपुल कठेराव गांव जा रहे थे. क्योंकि वहां पानी की काफी समस्या है. रास्ते में मिले इन चोरों ने विपुल से उनका पर्स, मोबाइल छीन लिया था. हालांकि विपुल ने चोरों से कहा की मुझे मेरे दो कुर्ते दे दीजिए, मेरे मोबइल नंबर से कुछ नंबर नोट कर लेने दीजिए और बातों ही बातों में विपुल ने चोरों को बताया की वो कठेराव गां जा रहे हैं, वहां की पानी की समस्या पर नुक्कड़ नाटक करने और इत्तेफाक की बात रही थी कि, उन चोरों में दो लोग उसी गांव के थे. जिसके बाद वो चोर उन्हें अपने गांव ले गए और जहां उन्होंने उन्हें खाना खिलाया, और विपुल ने लगातार तीन दिनों तक नुक्कड़ नाटक किया और जल की बर्बादी से लेकर जल संरक्षण के लिए उन्होंने लोगों को जागरूक किया. इस दौरान उन्होंने तीन दिनों में 40 बार नुकक्ड़ नाटक किया

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