कोरोना महामारी के खिलाफ एकजुट गांव वालों ने बनाई सड़क

देश में इस समय कोरोना वायरस का प्रकोप हर तरफ है. यही वजह है कि, देश में आए दिन मामले बढ़ते जा रहे हैं. जिससे पूरे देश में इस वायरस का प्रकोप रुकने का नाम नहीं ले रहा है. उसके बावजूद भी सरकारें और कोरोना वार्रियर्स सभी इससे ड़ट कर मुकाबला कर रहे हैं. इनके अलावा इस लड़ाई में हर एक जिम्मेदार नागरिक भी भागीदार हो रहा है. जो इस समय अपने घरों में रहकर इस लड़ाई को रोकने में अपनी भूमिका निभा रहा है. इस बीच जहाँ देश भर के लोग अपना पूरा समय अपने घरवालों के बीच गुजार रहे हैं तो न जानें कितने ही लोग इस समय रसोई में अपनी मनपसंद चीजें बना रहे हैं. प्रकृति खुद से फिर से बना रही है. अपने आपस में अपनी दूरियां मिटा रहे हैं और सभी काम इस समय इंटरनेट के जरिए किया जा रहा है.

लेकिन एक गांव है, जिसने इस कोरोना जैसी भयावह बीमारी के बीच एकजुट होकर वो कर दिखाई, जो न तो सरकार का कोई नेता कर पा रहा था….और न ही प्रशासन. उत्तराखंड के नैनतील में एक गाँव मौजूद है. जिसका नाम है खाड़की….जहां 40 परिवार रहते हैं. इस गाँव में काफी साल पहले प्रशासन ने एक सड़क बनाई थी. जोकि शिलौटी से जुड़ती थी. ताकि गाँव के लोगों को दूसरे गांव में जाने में आसानी, उनसे संपर्क बना रहे. साथ ही गांव किसी के संपर्क से कटे नहीं. लेकिन धीरे-धीरे वक्त गुजरता गया. कभी बारिश, तो कभी भूस्खलन और बारिश के समय के बाद उग आई झाड़ियों के चलते. ये रास्ता पूरी तरह टूट गया. उसके बाद भी लोग मजबूरन इसी रास्ते से गुजरते रहे. क्योंकि उनके पास इसके अलावा और कोई रास्ता ही नहीं है. यही वजह रही कि, गांव के सभी सदस्यों ने मिलकर कई बार प्रशासन से सरकार से यहां तक की यहां के नेताओं से भी बात की और उनसे कहा कि, इस रोड़ का कुछ समाधान निकाला जाए. रास्ता फिर बनाया जाए.

गांव वालों ने बनाई सड़क

गाँव के लोगों ने प्रशासन से मांगी मदद

लेकिन भारत की लचर प्रणाली कहें, या यहां के नेताओं की कुछ न करने की चाहता. किसी ने भी खाड़की गांव के रोड़ के बारे में कुछ नहीं किया. फिर देश भर में देश के प्रधानमंत्री ने बढ़ते कोरोना वायरस के प्रकोप को रोकने के लिए लॉकडाउन कर दिया. पिछले एक महीने से ज्यादा का वक्त गुजर गया. सभी लोग अपने अपने घरों में बंद हैं, इस बीच गांव के सभी सदस्यों ने इकट्ठा होकर इस रोड़ को खुद से बनाने की सोची….और इतने दिनों में वो कर दिखाया. जिसकी कल्पना शायद ही गांववालों ने भी आज से एक महीने पहले की हो.

पहाड़ पर गांव वालों ने बनाई सड़क

गांव के सभी सदस्यों ने मिलकर अपने गांव खाड़की से तीन किलोमीटर लंबे रास्ते, जोकि दूसरे गांव शिलौटी से उसे जोड़ता था. उसका फिर से कायाकल्प कर दिया.

गांव के एक सदस्य विनोद कुमार आर्य की मानें तो, “हमने गांव के करीब 25 लोगों को जमा किया और सड़क की खस्ताहालात पर बात कि, साथ ही हमने ठाना क्यों न हम सभी इस पर काम करें और इस ठीक कर दें. जिसके बाद हमने खुद को छोटी-छोटी टीमों में बांट दिया और सड़क पर काम करना शुरू कर दिया. इस दौरान हमने घरेलू उपकरणों का इस्तेमाल किया. क्योंकि लॉकडाउन में ज्यादा कुछ मिलना संभव नहीं था. साथ में जंगली जानवरों का डर था. लेकिन हमने मिलकर ये प्रयास किया और एक बार फिर हमारे गाँव के पास बेहतर रोड़ है.

सोशल डिस्टेंसिंग का भी रखते थे ख्याल

गांव वालों ने बनाई सड़क

वहीं गांव के लोगों की मानें तो उनका कहना है कि, हमने इस काम को खत्म करने में लगभग 1 महीने का वक्त लगा दिया. जिसके बाद हम सबने 3 किलोमीटर की सड़क बनाई. जोकि 2 मीटर चौड़ी भी है. इस दौरान हम सबने सोशल डिस्टेसिंग का भी पालन किया. हमने आज हमारी मेहनत रंग लाई है. सड़क पूरी तरह से सपाट हो गई है. जिस पर मोटरसाईकिल और गाड़ी भी चलाई जा सकती है.

वहीं गाँव के इस जज्बे के बाद नैनीताल के जिला मजिस्ट्रेट सविन बंसल की ने भी गांव के लोगों की तारीफ करते हुए कहा कि, कोरोना वायरस का प्रकोप रूकने के बाद हम गांववालों की मदद के लिए जाएंगें. साथ गांव की सड़क को एक बार फिर से पक्का किया जाएगा.

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