कभी रिक्शा चलाकर करते थे गुजारा, आज बन गए दो स्कूलों के मालिक

जब इंसान कुछ करने का पक्का इरादा रख लेता है, तो कोई भी मुश्किल उसे रोक नहीं पाती। जब हमारा हौसला बुलंद होता है तो दुनिया का कोई भी लक्ष्य नामुमकिन नहीं रहता और ऐसे में जब इंसान पर विपरीत परिस्थिति आती है तो उसको अपनी हिम्मत और अपनी काबिलियत का पता चलता है।

कुछ ऐसी ही कहानी है एक कैब ड्राइवर की जिसका सपना आर्थिक तंगी की वजह से टूट गया था। मगर फिर कुछ ऐसा हुआ जिसने उस शख़्स की ना सिर्फ़ जिंदगी बदली बल्कि उसके सोचने का नज़रिया भी बदल दिया। ये कहानी है पश्चिम बंगाल के रहने वाले गाजी जलाउद्दीन नाम के शख्स की है। जिनका जन्म सुंदरवन इलाके के ठाकुरचाक गांव में हुआ था। वो बेहद गरीब किसान परिवार से थे। मगर गाजी पढ़ने में बहुत होनहार थे क्लास में अव्वल ही आते थे। लेकिन पैसे की तंगी ने इनको कक्षा 2 तक भी पहुंचने नहीं दिया। इसलिए उन्होंने अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी। पढ़ाई तो दूर की बात है इनकी गरीबी का अंदाजा इस बात से भी लगाया सकता है के इनको खाने के लिए कई दिनों तक इंतज़ार करना पड़ता था। कई दिन तो भूखे पैट सिर्फ पानी पीकर अपना गुजारा करना पड़ता था।

Gaji Jalauddin- रिक्शा छोड़कर जब गाजी ने पकड़ा ड्राइविंग का रास्ता

तकलीफों का सामना करते करते गाजी 13 साल के हो गए। फिर इन्होने कोलकाता के बाजार में सामान का ठेला खींचने का काम शुरू कर दिया। मगर ये काम ज्यादा चला नहीं तो ठेला खींचने का काम छोड़ कर कोलकाता के इंटाली बाजार में रिक्शा चलाने का काम शुरू किया। रिक्शा चलाने के दौरान ही गाज़ी ने धीरे-धीरे Driving भी सीख ली और फिर कैब ड्राइविंग करना शुरू कर दिए।

18 साल की उम्र में गाजी ने ड्राइविंग सीख ली और Taxi ड्राइवर बन गए। मगर ड्राइवर बनने के बाद भी गाज़ी सोचा करते थे कि जिन तकलीफो का सामना उन्होंने किया वो उनके गांव के बच्चों को ना करना पड़े इसके लिए वो क्या करें। इसलिए उन्होने अपने गांव के आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों की मदद करने के बारे में सोचा।

Gaji Jalauddin

गरीब, बेसहारा और आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों की मदद के हेतु से इन्होने सुंदरवन ड्राइविंग समिति’ नाम से एक संगठन की स्थापना की, इनका संगठन अपने गांव के लोगों को Free में ड्राइविंग सिखाता है। इस संगठन का मकसद है कि लोग कुछ हुनर सीख जायें तो उन्हें अपना रोजगार मिल जाये और वो अपनी ज़िंदगी को अच्छे से गुज़ार पाएं और उन्हें किसी तरह की कोई तकलीफ ना हो और उनके बच्चे भी पढ़ लिख पाएं और कम से कम भूखे तो ना सोएं।

Gaji Jalauddin- बच्चों के अच्छे भविष्य के लिए खोलें

गाज़ी ने दूसरों से भी अपील की कि वो लोग भी आगे दूसरे लोगो को ड्राइविंग सिखाएं इस तरह ड्राइविंग स्कूल की Chain चलने लगी और अब इनके ड्राइविंग स्कूल में 300 युवक है जो टैक्सी चलाकर पैसे कमा रहे हैं। यही नहीं गाजी ने अपनी बचाई हुई रकम से 1998 में अपने दोनों बेटों के नाम से स्कूल की स्थापना की। जो 2 Teachers और 22 Students से शुरू हुई।

अब इनके स्कूल में बच्चे भी बढ़ गए और इनके ड्राइविंग स्कूल में डोनेशन भी अच्छा आने लगा इसलिए इन्होने अपनी ड्राइविंग स्कूल के डोनेशन की मदद से 2012 तक पूरी एक बिल्डिंग अपने स्कूल के लिए खरीद ली और अब ना सिर्फ इस स्कूल में बच्चे बढ़े हैं बल्कि शिक्षा का स्तर भी सुधरा है और इस स्कूल में अब 12 कक्षाएं, 2 शौचालय और एक मिड डे मील रूम मौजूद हैं।  स्कूल में 21 शिक्षक और करीब 450 बच्चे पढ़ते हैं। ये स्कूल आज भी गरीब बच्चों को शिक्षा देता है और गाज़ी का ड्राइविंग स्कूल इन बच्चों के पिता को मुफ्त ड्राइविंग सिखाते हैं जिससे अब इस गाँव में सब आत्मनिर्भर बन रहे हैं और किसी को गाज़ी की तरह भूखा नहीं सोना पड़ता है।

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