कभी बेची आइसक्रीम, कभी बनी इंश्योरेंस एजेंट, बॉयफ्रेंड ने दिया धोखा मजबूरियों से लड़कर बनी Sub Inspector

सच है विपत्ति जब आती है, कायर हो की दहलाती है.

सूरमा नहीं विचलित होते, क्षण एक नहीं धीरज खोते.

बचपन में हिंदी की किताब में हम में से अनेकों लोगों ने ये पक्तियां जरुर पढ़ी होंगी. इन पक्तियों का मतलब भी हमें बाखूबी मालूम होगा. अगर नहीं तो चलिए हम आपको बता देते हैं. इन पक्तियों का आशय है कि, जब भी कोई विपत्ति या विपदा आती है तो कायर और डरपोक इंसान उसने आगे झुक जाते हैं. जबकि जो हिम्मत वाले होते हैं, जज्बें और हौसलें वाले होते हैं. वो इंसान न तो किसी भी विपरीत परिस्थिती के आगे झुकते हैं न ही रुकते हैं.

ठीक इसी तरह की एक संघर्ष भरी कहानी है तिरुवनंतपुरम के कांजीरामकुलम की रहने वाली एनी शिवा (Annie Siva) की. जिन्होंने अपनी जिंदगी में अनेकों विपदाऐं देखी. अनेकों परेशानियों का सामना किया. हाँ मगर इन सबके बावजूद वो कभी रुकी नहीं. यही वजह है कि, आज एनी शिवा (Annie Siva) अपनी मेहनत हौसलें और जुनून के दम पर ही सब इंस्पेक्टर बन चुकी हैं.

Sub Inspector Annie Siva की संघर्ष भरी दास्तां

Sub Inspector Annie Siva

Annie Siva की संघर्ष की दास्तां उस समय शुरु हुई. जिस समय महज़ 18 साल की उम्र में उन्होंने घर के विरुद्ध कदम उठाया. Annie Siva ने अपने कॉलेज के पहले ही साल में अपने बॉयफ्रेंड के साथ रहने की योजना बनाई. जिसके चलते उन्होंने अपने घर से बगावत कर ड़ाली. दूसरी ओर दोनों अपने बॉयफ्रेंड के साथ रहते हुए  Annie Siva ने एक बेटे को जन्म दिया. हालांकि जन्म के महज़ 6 महीने के अंदर ही एनी के पार्टनर ने उन्हें छोड़ दिया.

जिसके चलते Annie Siva पूरी तरह से बेसहारा हो गई. बॉयफ्रेंड छोड़कर जा चुका था. परिवार वाले एनी के खिलाफ थे. ऐसे में एनी अपने नन्हे से बेटे को लेकर अपनी दादी के घर के पीछे बनी झोपड़ी में रहने लगी.

Sub Inspector Annie Siva

इस दौरान Annie Siva की मदद न तो उनके परिवार वालों ने की न ही किसी इंसान ने. मजबूर हालातों से लड़ते हुए उन्होंने लोगों के घर-घर जाकर डिलीवरी का काम शुरु किया. उस दौरान उन्होंने करी पाउडर, साबुन बेचे. इतना ही नहीं Annie Siva ने इंश्योरेंस एजेंट का भी काम किया. साथ ही त्योहारों के समय वेंडर्स का काम किया. आईसक्रीम और लाइम जूस तक बेचा. साथ ही छात्रों के लिए प्रोजेक्ट, रिकॉर्ड्स तक का काम करवाया. ताकि आमदनी होती रही. जिंदगी बेहतर गुजरती रहे. हालांकि इन सबके बीच Annie Siva ने कभी पढ़ाई नहीं छोड़ी. तमाम दुश्वारियों और मुश्किलातों के बाद भी एनी पढ़ती रहीं.

Annie Siva ने समाजशास्त्र से ग्रेजुएशन किया. कोई निश्चित ठिकाना न होने की वजह से, उन्होंने अनेकों बार अपना ठिकाना बदला. समाज को दिखाने की खातिर और समाज के प्रश्नों पर अंकुश लगाने की खातिर Annie Siva ने अपने बाल भी कटवा लिए. क्योंकि वो चाहती थी कि, उन्हें उनके बेटे शिवासूर्य का लोग पिता या बड़ा भाई समझे.

इस सब दुश्वारियों के बीच अपने पढ़ाई को आगे जारी रखते हुए Annie Siva ने तीरुवनंथपूरम की एक कोचिंग सेंटर में एडमिशन लिया. जहां साल 2014 में पहली बार उन्होंने पहली बार महिला पुलिस की परीक्षा दी. हालांकि उन्हें पहली सफलता साल 2016 में मिली. जहां Annie Siva पहली बार महिला पुलिस बनी. फिर साल 2019 में उन्होंने अपनी पढ़ाई के ही दम पर SI (Sub Inspector) की परीक्षा पास की. जिसके चलते 25 जून 2021 को वर्कला पुलिस स्टेशन में पहली बार Annie Siva की बतौर Sub Inspector पोस्टिंग हुई.

हाल ही में Annie Siva ने अपनी फेसबुक वाल पर अपनी कहानी शेयर करते हुए लिखा था कि, “जब तमाम मुश्किलों का सामना कर एक औरत कुछ बनती है तो समाज उस पर दया दिखाकर उसके बारे में झूठी बातें फैलाता है. इसलिए मैं और मेरा बेटा बड़े भाई और छोटे भाई की तरह रहते हैं.”

ये हकीकत है कि, हमारे समाज में महिलाओं को लेकर हमेशा से भेदभाव होता रहा है. महिलाऐं हमेशा से दुत्कारी जाती रही हैं. हालांकि उसके बाद भी हर ओर उन्होंने अपने आप को परिपक्क बनाय़ा है. ठीक इसी तरह एनी शिवा भी हैं. जिन्होंने अपनी मेहनत और हौसलें के दम पर खुद के साथ अपने बेटे को पालते हुए ये मुकाम हासिल किया.

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