कब शुरू हुआ Prostitution, जानिए इसका इतिहास और कुछ जरूरी बातें-

Prostitution यानि की वेश्यावृति, दुनिया के सबसे पुराने प्रोफेशन में से एक माना जाता है। आज इसे लेकर हमेशा इस बात पर डिबेट होती है कि, यह गलत है या सही? लीगल है या इल-लीगल? और अगर एक बड़े ग्रुप की राय ली जाए कि, प्रॉस्टिट्यूशन गलत है या सही? तो जवाब यही आएगा कि यह गलत है। लेकिन बावजूद यह कारोबार कई पीढ़ियों से लगातार फलता-फूलता आ रहा है। एक आंकड़े की मानें तो वेश्यावृति भारत में हर साल 8 बिलियन कमा कर देने वाला बड़ा बाजार है। वहीं भारत में 2 मिलियन के करीब Prostitutes हैं और 2,75,000 के करीब वेश्यालय है। वहीं एक और स्टडी की मानें तो भारत में करीब 10 मिलियन के करीब महिलाएं कर्मशियल वेश्यावृति से जुड़ी हुई हैं। जिनके टारगेटेड क्लाइंट ट्रक डाइवर, पलायन कर के आए मजदूर और ऐसे मर्द होते हैं, जो अपने परिवार से कई सालों से दूर हैं।

ये तो आज के दिनों में Prostitution के बारे में था। लेकिन जैसा कि, हमने कहा कि, यह दुनिया के सबसे पुराने कारोबारों में से एक है तो आपके मन में एक सवाल तो आया होगा कि आखिर कितना पुराना? तो चलिए जानते हैं कि आखिर प्रॉस्टिट्यूशन का इतिहास लगभग कितने साल पुराना है? और इसका प्रारंभिक रुप कैसा था?

Prostitution का इतिहास

वेश्यावृति के इतिहास की बात करें तो दुनिया की दृष्टि में इसका इतिहास करीब 2400 ईसा पूर्व का है। लेकिन बात भारत की करें तो यहां पर इसका इतिहास कुछ लोग वैदिक काल से मानते हैं तो, कुछ लोग 300 ईसा पूर्व से इसका इतिहास बताते हैं। वहीं कुछ इतिहासकारों की मानें तो यह परंपरा मुगलों के दरबार के समय से है। जब उनके दरबार में ‘तवायफों’ का आना जाना हुआ करता था। इतिहासकारों की अलग-अलग राय है, लेकिन एक बात साफ है कि भारतीय इतिहास से प्रॉस्टिट्यूशन नाम की संस्था का एक अटूट संबंध रहा है।

वैदिक काल और वेश्यावृति

इतिहासकार मानते हैं कि भले ही शुद्धता पर आधारित नैतिक व्यवहार महिलाओं के लिए वैदिक काल में तय किए गए थे। लेकिन वैदिक भारतीय शराब और औरतों के शौकीन थे काफी बार, ऋग्वेद इस तथ्य की ओर इशारा करता है कि वैदिक काल में वेश्यावृत्ति मौजूद थी।

पुराणों की बात करें तो इनमें उन महिलाओं के बारे में जिक्र मिलता है, जिनके संबंध एक से ज्यादा मर्दो संग होते थे। इसके अनुसार जिस महिला ने दो पुरुषों के साथ अपना पलंग साझा किया हो उसे कुलता कहा जाता था, तीन के साथ को दर्शिनी, चार पुरूषों संग पुंगसाचल और पांच पुरूषों संग संबंध वाली औरत को वेश्या कहा जाता था। जिन महिलाओं ने पांच से अधिक की संख्या में लोगों के साथ संबंध बनाए हो उसे महावेश्या की संज्ञा दी गई थी।

मौर्य काल और गुप्ता काल में वेश्यावृति

कौटिल्य ने अपने प्रसिद्ध ग्रन्थ ‘अर्थशस्त्र’ में वेश्याओं के बारे में भी जिक्र किया है। उन्होंने वेश्याओं के लिए नियम और उनका लेखा-जोखा होने की बात कही है। उनके अनुसार उस समय वेश्याओं के व्यवहार और जीवन जीने को लेकर एक कोड ऑफ कंडक्ट बनाया गया था। अन्य लोगों की तरह ही इनके पास भी कुछ अधिकार, विशेषाधिकार होते थे और कुछ कर्तव्य भी निर्धारित किए गए थे।

कौटिल्य की मानें तो एक गणिकाधिकारी की भर्ती के लिए प्रतिवर्ष 1000 कर्णपदों की सैलरी तय की जाती थी। कौटिल्य ने यह भी बताया है कि 4 तरह से महिलाएं प्रॉस्टिट्यूट बनती थी।

  • या तो वो एक वेश्या की बेटी हो तब
  • या तो उन्हें जंग में जीता गया हो
  • या तो उन्हें खरीदा गया हो
  • या फिर कोई ऐसी लड़की जिसे एडलटरी के लिए सजा दी गई हो

जो महिलाएं अपना सौंदर्य खो देती थीं उन्हें नर्स के काम में या किचन के काम में लगा दिया जाता था। वहीं कुछ महिलाओं को स्पाई/जासूस के रूप में तैनात किया जाता था। विष कन्या नाम की औरतें भी इसी काम का एक हिस्सा हुआ करती थीं। इस काल में प्रॉस्टिट्यूट महिलाओं को कोई हानि नहीं पहुंचा सकता था न ही उनके बच्चों संग जबरदस्ती कर सकता था, ऐसा करने पर कड़ी सजा का प्रावधान था।

गुप्त काल में प्रॉस्टिट्यूशन

प्राचीन भारत का स्वर्ण युग भी वेश्याओं की स्थिति के लिए उतना अच्छा नहीं था। इसी समय में मंदिर की देवदासी प्रथा काफी हद तक दिखाई देने लगी थी। वात्स्यायन के कामसूत्र और संस्कृत काव्य साहित्य में गणिकाओं के राजा के दरबारों में नाचने—गाने का जिक्र है। इस काल में गणिकाओं की सुंदरता, उपलब्धि, बुद्धि के लिए प्रशंसा तो होती थी लेकिन दूसरी ओर समाज में उनका सम्मान इसलिए नहीं था, क्योंकि वो पैसों की खातिर तन का व्यापार करती थी।

इस दौरान के काव्यों में साधारण वेश्याओं का भी जिक्र मिलता है। जिसके जीवन में कोई चमक-धमक नहीं होती थी। कामसूत्र में इन गणिकाओं द्वारा सीखे जाने वाले गुणों जैसे गायन, नृत्य कलाएं, पेंटिंग, कथा और चुटकुले, आदि का भी जिक्र था।

मध्य काल में प्रॉस्टिट्यूशन

तीसरी शताब्दी में पवित्र महाकवि कालीदास के संस्कृत काव्यों में उज्जैन और महाकाल के प्रसिद्ध मंदिरों से जुड़ी महिलाओं का जिक्र आता है। इस दौरान मंदिर से पवित्र महिलाओं का जुड़ना आम होता था। इस वर्ग में वे लड़कियां होती थी, जिन्होंने अपनी सारी जिंदगी भगवान की सेवा करने का फैसला किया होता है। यह एक तरह से इसाई धर्म के वर्जिन और नन प्रथा की तरह था।

दक्षिण भारत से लेकर उत्तर भारत में इन लड़कियों को तब सम्मान दिया जाता था। ये महिलाएं मुख्य रूप से सिंगर और डांसर होती थी, जो पूजा के समय अपनी कला का प्रदर्शन करती थी। लेकिन धीरे-धीरे यह परंपरा दूषित हो गई। पुजारियों ने अपनी इच्छा पूर्ति के लिए इन धार्मिक प्रणालियों का दुरुपयोग किया। धर्म की आड़ में गुप्त वेश्यावृत्ति विकसित हुई।

मुस्लिम शासकों के काल में वेश्याओं को मान्यता मिली। औरंगज़ेब को अगर छोड़ दें तो इस काल में वेश्यावृत्ति एक पेशे के रूप में शाही संरक्षण के तहत पनपा। इसी दौरान ‘तवायफ’ और ‘मुजरा’ जैसे शब्द आम हुए। उप-महाद्वीप में मुगल युग के दौरान, वेश्यावृत्ति का एक स्ट्रांग कनेक्शन कला प्रदर्शन से था। मुगलों ने वेश्यावृत्ति को संरक्षण दिया जिसने नाच-गाने को उसके उच्च स्तर तक पहुंचाया।

Prostitution

Prostitution- जब वेश्यावृति बन गया दलदल

मुगलों का शासन खत्म होने के साथ ही उनके दरबार की तवायफें बेराजगार हो गईं। ऐसी महिलाओं को कोई देखने वाला नहीं था, न ही सामाज में इनके लिए कोई रोजगार था। ऐसे में इनके पास एक ही ऑप्शन था और वो था ‘ट्रेड ऑफ सेक्स’। ब्रिटिस काल में राज्य की ओर से इन महिलाओं की ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया। ऐसे में देह व्यापार कमर्शियल रूप से फलने-फूलने लगा। इस तरह हमें पता चलता है कि, प्रॉस्टिट्यूशन भारत के इतिहास में बहुत पुराने काल से चला आ रहा है और यह किसी न किसी रूप में हमारे सभ्य समाज का हिस्सा रहा है। आज के समय की बात करें तो प्रॉस्टिट्यूट को हम उनके काम करने के तरीकों के आधार पर बांट कर देख सकते हैं। जैसे-

  • Brothel Prostitutes यानि रेड लाइट एरिया : यहां की महिलाएं एक खास जगह पर बने चकलों या रेडलाइट एरिया में रहकर देह व्यपार करती हैं। ये यहां कमीशन बेसिस पर sexual service देतीं हैं।
  • Call Girl Prostitutes: ये Prostitutes मुख्य रूप से इंडिपेंडेंट होती हैं और ये अपने कस्टमर्स को डायरेक्ट या मिडिलमैन के जरिए उपलब्ध होती हैं।
  • Street Prostitutes: इस तरह के Prostitutes  सड़कों पर ही अपने कस्टमर से डील कर उनके बताएं जगहों तक जाने को तैयार होती हैं।
  • Other Types: इनके अलावा कई चीजों की आड़ में आज के दिनों में सेक्स रैकेट चलाए जाते हैं, जैसे कि message parlors, amusement centers, dance clubs आदि।

अब बात प्रॉस्टिट्यूशन के कारकों की

प्रॉस्टिट्यूशन के कई कारक हैं। इन कारकों के कारण कई सारी लड़कियां और महिलाएं देह व्यपार के क्षेत्र में आ जाती हैं। इसमें सबसे बड़ा कारण है अपहरण जिसे हम ह्यूमन ट्रैफिकिंग भी कहते हैं। ज्यादातर किडनैपर्स महिलाएं या कप्लस होती हैं। यह अपने आप में बहुत बड़ी समस्या है। वहीं दूसरा बड़ा कारण है देवदासी परंपरा का आज भी चलना। ऐसा माना जाता है कि भारत के प्रॉस्टिट्यूशन में इस परंपरा का 10 % हिस्सा है। वहीं चाइल्ड प्रॉस्टिट्यूशन का 20 % हिस्सा इसी से जुड़ा है। तीसरा बड़ा कारण है रेप। रेप के बाद हमारा समाज महिलाओं पर ही सारा दोष मढ़ देता है। समाज उस महिला को अपनाता नहीं है जो रेप का शिकार हुई हो। ऐसें में इन लड़कियों के पास सबसे आसान काम प्रॉस्टिट्यूशन होता है। एक स्टडी के अनुसार रेप से पीड़ित 6% महिलाएं या लड़कियां प्रॉस्टिट्यूशन में आ जाती हैं।

प्रॉस्टिट्यूशन का चौथा बड़ा कारण है शादी। हालांकि इसे बड़ा कारण नहीं मान सकते लेकिन पुणे की बात करें तो यहां प्रॉस्टिट्यूशन से जुड़ी 15% महिलाएं शादी के जरिए ही इसमें आईं हैं। शादी का झांसा देकर प्रॉस्टिट्यूट में महिलाओं को ढ़केलने की कई घटनाएं आए दिन सामने आती हैं। पांचवा बड़ा कारण है प्रॉस्टिट्यूट की बेटी होना। प्रॉस्टिट्यूट के बच्चों को समाज उसी नजरिए से देखता है, जिस नजरिए से प्रॉस्टिट्यूट को, यही कारण है कि, प्रॉस्टिट्यूशन से किसी भी तरीके से जुड़ी 98% महिलाओं के बच्चों के पास इसके अलावा और कोई दूसरा काम नहीं होता। इसके अलावा और भी कई सेक्शुअल फैक्टर्स हैं जिसके कारण महिलाओं को प्रॉस्टिट्यूशन की ओर बढ़ना पड़ता है।

क्या प्रॉस्टिट्यूशन लीगल होना चाहिए?

कड़े कानून के होने के बाद भी कई कारणों से प्रॉस्टिट्यूशन भारत में आज भी सबसे तेजी से बढ़ने वाली इंडस्ट्री बनी हुई है। इस लिए शायद कहा जाता है कि भारत में प्रॉस्टिट्यूशन इललीगल होते हुए भी लीगल है। कई लोगों का मानना है कि भारत में प्रॉस्टिट्यूशन को लीगल कर देना चाहिए। इससे सरकार के पास इससे जुड़े लोगों का एक निश्चित डाटा उपलब्ध हो सकेगा। साथ ही इससे जुड़ी महिलाओं को प्रॉपर मेडिकल ट्रीटमेंट मिल सकेगा, जिससे एड्स जैसी बिमारियों पर भी रोक लग सकेगी। ये लोग मानते हैं कि इसे लीगल करने से कई तरह के क्राइम पर रोक लगेगी वहीं अगर इसे इललीगल या बैन किया जाएगा तो इससे अपराध ही बढ़ेंगे।

लेकिन इसके साथ ही कई सारे सवाल भी खड़े होते हैं, जिसका जवाब शायद नहीं हैं। जैसे कि इस काम को लीगलाइज करने का असल तात्पर्य क्या है? क्या इसका मतलब यह है कि स्ट्रीट प्रॉस्टिट्यूशन या अन्य तरह के धंधों की आड़ में चलने वाले सेक्स रैकट भी सही ठहरा दिए जाएं? प्रॉस्टिट्यूशन लीगलाइज होने से ट्रैफिंकिंग रूकेगा यह 100 फीसदी सही बात नहीं है।

ऐसे में हम कह सकते हैं कि भारत में वेश्यावृत्ति का Criminalization, Decriminalization या इसे Legitimize करने से कोई ठोस निष्कर्ष नहीं निकलेगा। बल्कि इसका एक सही समाधान तभी हो सकेगा जब सामाज में इसके प्रति एक जागरूकता और समाज सबकी आइडेंटिटी और उसके यूनीकनेस को स्वीकार करेगा। फिर चाहे किसी खास व्यक्ति की पहचान उसकी सेक्सुअल काम से ही क्यों न जुड़ी हो।

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