कटे-छटे कपड़ों से फैशनेबल कपड़े बनाती है ये अनोखी कंपनी

कभी किसी दर्जी की दुकान पर गए हैं? आप कहेंगे कि, कैसा सवाल है। वहां तो आना-जाना लगा ही रहता होगा क्योंकि, कपड़े जो सिलवाने होते हैं। खैर आप अगर कभी दर्जी के पास कपड़ा लेकर जाते हैं तो वो कपड़े मीटर के हिसाब से चौकोरा होता है। लेकिन दर्जी उसे काटकर आपके लिए शर्ट या कुर्ता बना देता है। लेकिन इन कपड़ों को तैयार करने में रेडिमेड कपड़ो के जो वेस्ट निकलते हैं। उसका क्या होता है? इस बारे में कभी आपने सोचा है। शायद नहीं, कई बार आपने दर्जी के दुकानों के पीछे या उसके आसपास के किसी खास इलाके में कपड़ों वाले कचरे का ढ़ेर तो देखा ही होगा।

असल में कपड़ा कई मायनों में पॉल्यूशन का बड़ा एजेंट है। हमारा देश दुनिया की सबसे बड़े टेक्सटाइल इंडस्ट्री में से एक है। टेक्स्टाइल वेस्ट हमारे देश में तीसरा सबसे बड़ा कचरा है जिसके रीयूज को लेकर कुछ सोचा नहीं जाता है। यह कपड़ा जब लैंडफिल में जाता है। तो यह मीथेन जैसा ग्लोबल हाउस गैस छोड़ता है। मुख्य रूप से कपड़ों को डिकंपोज होने में 30 से 40 साल लगते हैं। लेकिन अगर वह पोलिस्टर या सिंथेटिक फाइबर हो तो उसे 100 साल भी लग जाता है।

इसके अलावा कपड़ों को बनाने में यूज होने वाले कैमिकल जो सीधे वाटर बॉडिज में छोड़ दिए जाते हैं, उससे पानी सरफेस वाटर के साथ ही ग्राउंड वाटर भी दूषित होता है। वहीं कपड़ों को बनाने में वेस्ट होने वाले पानी की बात करें तो एक टी-शर्ट बनाने में करीब 2720 लीटर पानी लगता है।

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Doodlage- जो फाइबर वेस्ट से बनाती है फैशनेबल कपड़े

इतनी बातें जानने के बाद कई लोग कहेंगे कि, अब क्या कपड़ा पहनना छोड़ दे! जी नहीं हम यह नहीं कह रहे। हम कुछ विकल्प तलाशने की बात कह रहे हैं। जैसा कि, दिल्ली की एक फैशन और लाइफस्टाइल कंपनी डूडलेज कर रही है। आज के लीनीयर फैशन के दौर में यह कंपनी कुछ अलग और थोड़ा हटकर कर रही है। कंपनी दुनिया के महंगे ब्रांडो में से तो हैं, लेकिन साथ ही यह एकलौती ऐसी कंपनी है जो फ्रयब्रिक वेस्ट से अपने प्रोडक्टस बनाती है। यानि की यह कंपनी मौजूदा फैशन उद्योग को एक मायने में चुनौती दे रही है।

कंपनी के इस तरीके को अपनाने को लेकर कंपनी की क्रिएटिव डायरेक्टर कृति तुला कहती हैं कि, कपड़ों को बनाने में निकलने वाला 73 फीसद कचरा रीयूज नहीं होता और यह लैंडफील में फेंक दिया जाता है। इस वेस्ट को रीयूज करने के आइडिया से ही ‘डूडलेज’ दुनिया के सामने आया। कृति तुला और उनकी टीम इन बेकार हो चुके कपड़ों को अपनी क्रिएटीविटी की बदौलत एक अलग ही रंग और रूप देतीं हैं। जिससे ये फैशन की दुनिया में भी अपना एक अलग मुकाम बनाती है।

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Doodlage- अपने आप में खास है इसका हर प्रोडक्ट

वहीं कंपनी में बनने वाले कपड़ों से भी जो वेस्ट क्लोथ्स निकलते हैं उसे भी कंपनी डंप करने के नहीं फेकती बल्कि इससे वो कैरी बैग और पर्स वगैरह भी बनाती है। इस तरह से यह कंपनी अपने आप में जीरो क्लोथ वेस्ट प्रोडयूसिंग कंपनी है। कंपनी के नाम ‘डूडलेज़’ के बारे में बताते हुए कृति तुला ने कहा कि ‘आर्ट को रिप्लीकेट किया जा सकता है लेकिन डूडल एक ही होता है। वहीं वो कहती हैं कि हर डूडल अपनी तरह का इकलौता होता है ठीक उसी तरह से डूडलेज का हर प्रोडक्ट अपने आप में अनोखा है।

सच में यह अनोखा है क्योंकि यह एक ब्रांड तो है ही लेकिन उससे भी बड़ी बात है कि यह कपड़े उस वेस्ट से बने हैं जिसपर हमारा या आपका किसी का भी ध्यान नहीं जाता है। कपड़े के वेस्ट का रीयूज कई मायनों में हमारे एनवायरमेंट को अलग—अलग तरीके के पॉल्यूट होने में बचाता है। साथ ही हमे यह भी बताता है कि, कपड़े एक खरीदें अच्छा खरीदें और नए कपड़े खरीदने से पहले एक बार जरूर सोच लें कि, क्या आपको उस कपड़े की सच में जरूरत है?

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