ओलंपिक्स में भारत को मेडल दिलाएंगे ये ‘उसैन बोल्ट’

ओलंपिक्स में गोल्ड जीतना हर खिलाड़ी का सपना होता है। वहीं हर देश भी चाहता हैं कि उसके यहां कुछ ऐसे खिलाड़ी तैयार हो जो ओलंपिक्स में सबसे ज्यादा मेडल्स जीतकर आएं और देश का नाम ऊंचा कर सकें। हाल ही के दिनों में ओलंपिक्स खेलों को लेकर भारत में सरकार का फोकस भी बढ़ा है। यही कारण है कि भारतीय खिलाड़ी भी लगातार शानदार अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं।

स्प्रिंट रनिंग की बात करें तो इस बार की मेंडल सेनसेशनल डिंग एक्सप्रेस हिमा दास से ओलंपिक्स में भारत को बड़ी उम्मीद हैं। स्प्रिंट रनर के तौर पर हिमा दास का इस साल का प्रदर्शन शानदार रहा है। लेकिन आज हम बात हिमा दास की नहीं करने जा रहे हैं। बात हम करेंगे भारत में उसैन बोल्ट जैसे धावकों के बारे में, जिनका सपना सिर्फ एक है कि वे भारत के लिए ओलंपिक्स का मेडल लेकर आएं।


भारत की अफ्रीकी मूल वाली कम्युनिटी

अभी तक अगर ओलंपिक्स में स्प्रिंट रनिंग की प्रतियोगिता पर एक नजर डालें तो इनमें ज्यादातर लोग अफ्रीकी मूल के ही रहे हैं। मौजूदा वक्त के तेज धावक उसैन बोल्ट भी अफ्रीकी मूल के हैं। अफ्रीकी मूल के लोंगो के बारे में ऐसा माना जाता है कि उनमें एक नेचुरल स्ट्रेंथ होता है। ऐसे में एक कसक होती है कि कास भारत के पास भी ऐसा कोई होता, तो आप जान लीजिए की भारत के पास भी उसी मूल के लोग हैं, जिस मूल से दुनिया के सबसे तेज धावक उसैन बोल्ट आते हैं। भारत के गुजरात से लेकर कर्नाटक तक ऐसी ही अफ्रीकी मूल के लोग रहते हैं, जिन्हें कभी अफ्रीका से भारत पुर्तगाली लेकर आए थे । लेकिन आज ये अफ्रीकी मूल के लोग पूर्ण रुप से भारतीय हैं।

Bridges of Sports के साथ सिद्दी बच्चे कर, ओलंपिक्स की तैयारी

Bridges of Sports
रविकिरण सिद्दी ने स्प्रिंट रनर

भारत में अफ्रीकी मूल के जो लोग रहते हैं वे सिद्दी कम्यूनिटी के हैं। आज के दिनों में इस सिद्दी कम्यूनिटी से आनेवाले 16-17 साल के बच्चे 2024 के ओलंपिक्स में मेडल जीतने की तैयारी करने में जुटे हैं। इस तैयारी में उनकी मदद एक एनजीओ ब्रिज टू स्पोर्टस कर रहा है। हाल ही में इसी कम्यूनिटी के एक बच्चे ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा था। 17 साल की उम्र वाले रविकिरण सिद्दी ने स्प्रिंट रनिंग के मामले में सबको चौंकाया है। ऐसी उम्मीद है कि अच्छी ट्रेनिंग की बदौलत रविकिरण सिद्दी आने वाले वक्त में उसैन बोल्ट के 100 मीटर का रिकॉर्ड तोड़ सकता है।

रविकिरण जैसे कई और बच्चे जो सिद्दी कम्यूनिटी के कई ऐसे बच्चे हैं जिनकी काबलियत को देखते हुए भारत सरकार ने भी इस कम्यूनिटी में इंट्रेस्ट दिखाया है। Bridges of Sports आज के डेट में करीब 300 से ज्यादा सिद्दी एथलीट बच्चों को ट्रेनिंग दे रहा है। Bridges of Sports की मानें तो इन बच्चों में अलग की एक दिली तमन्ना है कि वे एथलीट बनें। शायद, वो दिन दूर नहीं जब ओलंपिक में अफ्रीकी मूल के भारतीय, भारत को पदक दिलाऐंगे.

कौन हैं सिद्दी लोग..?

पूरे भारत में सिद्दी कम्यूनिटी के लोंगो की संख्या लगभग 50,000 के करीब है। इन लोंगों को पुर्तगाली शासक स्लेव के तौर पर अफ्रिका से भारत लेकर आए थे। ज्यादातर सिद्दी मुस्लिम होते हैं, जबकि हिन्दु धर्म और अन्य धर्मों को मानने वालों की संख्या भी बड़ी है। कर्नाटक में रहने वाले सिद्दी लोग साउथ इस्ट अफ्रीका के बंटू लोंगो के वंशज हैं।  

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