इस ट्रेन में रिर्जव रहेगी बाबा भोले की सीट, कई इंटरेस्टिंग फैसिलिटीज़ भी हैं

भारत, वो देश जहां की संस्कृति दुनिया भर के लोगों को अपनी ओर खींचती है, जो सबसे पुरानी है और सबसे ज्यादा संमृद्ध भी। भारत की इसी संस्कृति का बड़ा हिस्सा है यहां का धार्मिक परिवेश। धर्म के कारण ही यहां पर लोगों की एक कनेक्टिविटी है और यह कनेक्टिविटी ही आज की 21वीं शताब्दी में ‘रिलिजियश टूरिज्म़’ के नाम से जानी जाती है। भारत में हर साल लोग तीर्थ यात्राओं पर निकलते हैं और इसमें उनका सबसे बड़ा साधन बनती है भारतीय रेल। कई लोग कहते भी है कि अगर भारत दर्शन करना है तो यहां की ट्रेनों में सफर करिए। भारत में जहां ट्रेने रोज की सवारी है तो वहीं टूरिज्म के लिए भी इसमें कई फैसिलिटीज़ हैं। ‘रिलीजियस टूरिज्म’ की बात करें तो हमारे देश में कई सारी ट्रेन इसी पर्पस से शुरू की गई हैं। जिसमें चार धाम यात्रा के लिए ट्रेन है।

लेकिन देश में जब से मोदी सरकार आई है तब से ही ‘रिलीजियस टूरिज्म’ को एक बड़ा इनकम सेक्टर बनाने पर जोर दिया जा रहा है और इसी कड़ी में सरकार की ओर कई सारी ट्रेनें चलाई जा रही है, सर्किट्स डेवलप की गईं हैं… जैसे बुद्धा सर्किट, जैन सर्किट और रामायण सर्किट…। इसके जरिए सरकार टूरिज्म में कई क्रांतिकारी कामों को कर रही है। इसी बीच एक ट्रेन चर्चा में है… जिसका नाम है “काशी-महाकाल एक्सप्रेस”।

Kashi-Mahakal Express

Kashi-Mahakal Express : काशी विश्वनाथ से महाकाल के धाम तक की यात्रा

रविवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस नई ‘रिलीजियस टूरिज्म’ बेस्ड काशी विश्वनाथ से महाकाल ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना। ट्रेन दिखने में जीतनी सुंदर है उतनी ही इसके अंदर की फैस्लिटिज लाजवाब हैं जो लोगों को इससे सफर करने के लिए आकर्षित करती है। तेजस एक्सप्रेस, दिल्ली लखनऊ एक्सप्रेस, मुबई – अहमदाबाद और हमसफर जैसी ट्रेनों के बाद अब मोदी सरकार ने इस नई ट्रेन को हरी झंडी दिखाई है। यह ट्रेन जहां काशीविश्वनाथ, महाकाल मंदिर उज्जैन और ओमकालेश्वर मंदिर इंदौर जैसे ज्योर्तिलिंगों के दर्शन यात्रियों को कराएगी, तो वहीं यह ट्रेन आपको भोपाल, कानपुर, अलहाबाद और इंदौर जैसे एजुकेशनल हब और इंडस्ट्रीयल हब तक भी यात्रियों को पहुंचाएगी।

इस ट्रेन के जरिए द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से तीन ज्योतिर्लिंग के दर्शन के लिए यात्रियों को कई सारे स्पेशल पैकेज आॅफर किए गए हैं। ट्रेन सप्ताह में तीन दिन चलेगी। इसके अलावा यह ट्रेन दो सप्ताह में एक बार सुल्तानपुर—लखनऊ रुट और प्रयागराज रूट से सप्ताहिक तौर पर चलेगी। 20 फरवरी से यह ट्रेन कमर्शियल तौर पर शुरू हो रही है। यात्रि ट्रेन नंबर 82401,82402, 82403 और 82404 में अपनी यात्रा के लिए टिकट बुक करा सकेंगे।

अन्य फीचर्स :—

  • इस ट्रेन में सफर करने के लिए रेलवे की साइट और आईआरसीटी के मोबाइल एप से टिकट बुक करा सकते हैं। वहीं आईआरसीअीसी एजेंट्स से भी टिकट बुक कराई जा सकती है। इस सबके अलावा प्राइवेट टृरिज्म एप के जरिए भी टिकट यात्रि बुक कर सकते हैं। वहीं सिक्योरिटी पर्सनल्स इस ट्रेन में अपनी लीव टिकट और ड्यूटी ज्वाइनिंग की टिकट भी करा सकेंगे। इन ट्रेनों में रिर्जव टिकट 120 दिन पहले ही ली जा सकेगी। लेकिन ट्रेन में कोई कनशेसन टिकट नहीं है। यानि 5 साल की उम्र से बड़े बच्चे का फुल टिकट लगेगा।
  • इस ट्रेन का टिकट हवाई जहाज की तरह होगा, मतलब फिक्स नहीं होगा। फेस्टिव सीजन या किसी बिजी टाइम में आपको ट्रेन के टिकट के लिए ज्यादा पैसे देने पड़ सकते हैं। वहीं इस ट्रेन में कोई प्रीमियम कोटा और तत्काल कोटा नहीं होगा। सिर्फ दो तरह का कोटा होगा एक जेनरल कोटा और दूसरा फॉरेन कोटा।
  • इस ट्रेन में सीनियर सिटीजन, दिव्यांग और महिलाओं के लिए सीट रिर्जव रहेंगे। दोनों ट्रेनों में सीनियर सिटीजन के लिए 20, दिव्यांगों के लिए 6 और महिलाओं के लिए 6 सीटें हैं। नीचें की सीटें सीनियर सीटीजन और दिव्यांगों के लिए होंगी वहीं एक पूरी 6 बर्थ वाली बे महिलाओं के लिए हर बोगी में रिर्जव होगी।
  • इस ट्रेन में सफर करनेवाले यात्रि का 10 लाख तक का एक्सिडेंटल बीमा भी होगा। वहीं इसमें ऑनबोर्ड इन्फोटेनमेंट की भी सुविधा है। अगर ट्रेन कैंसिल हो जाती है तो आपको ऑटोमेटिक रिफंड मिल जाएगा।
  • बात खाने की करें तो इस ट्रेन मेें सर्व किए जाने वाले खाने की बहुत चर्चा है। दरअसल धार्मिक यात्रा के लिए ट्रेन है तो खाना भी शुद्ध शाकाहारी ही होगा। तो इस बात का ट्रेन में खास तौर पर ख्याल रखा जाएगा। इसके अलावा आपको ट्रेन में उन जगहों की लोकल पाकवान भी टेस्ट करने का मौका मिलेगा जिन जगहों से यह ट्रेन गुजरेगी। सिर्फ इतना ही नहीं ट्रेन में जो वेंडर आपको खाना देने आएंगे वे भी एक दम धार्मिक वेश-भूषा में होंगे।
Kashi-Mahakal Express

Kashi-Mahakal Express : भोले बाबा की रिर्जव सीट और विवाद

अब सबसे अहम और स्पेशल फीचर की बात करते हैं जिसकी सबसे ज्यादा चर्चा है। यह फीचर है ट्रेन में भगवान शिव के का मंदिर। दरअसल इस ट्रेन में भगवान भोलेनाथ के लिए एक सीट रिर्जव की गई है। बी 5 कोच में सीट नंबर 64 को बाबा भोले के लिए रिर्जव किया गया है। ताकी ट्रेन में जो लोग भी धार्मिक यात्रा के लिए पहुंचे उन्हें धार्मिक वातावरण दिया जा सके। इसके अलावा ट्रेन में भजन-कीर्तन करने का भी प्रबंधन किया गया है। हालांकि अभी यह परमानेंट नहीं है, लेकिन विचार चल रहा है कि इसे परमानेंट कर दिया जाए।

ट्रेन में इस रिर्जव सीट की खबर ने कइ्र लोगों का ध्यान इसकी ओर खींचा है वहीं इसपर विवाद भी हुआ है। एआईएमआईएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने ट्विटर पर संविधान की प्रस्तावना की फोटो डालकर सरकार के सेकुलर नेचर पर सवाल खड़े किए है। लेकिन हम अपनी तरफ से तो ओवैसी साहब को इतना ही कहना चाहेंगे कि हर चीज़ को हिन्दू-मुस्लिम के चश्में से देखने के बजाए समान्य नजरिए से देखें।

जिस संविधान की वो दुहाई दे रहे हैं उसी संविधान में सेक्यूलरिज्म को लेकर व्याख्या की गई है। हमारे देश में धर्म पूरी तरह से स्टेट से अलग नहीं है और इसके बहुत से पक्षों का इस्तेमाल देश हित में होता है। स्टेट का काम वेलफेयर करने का होता है और धार्मिक ट्रेने शुरू करना धर्म से नहीं वेलफेयर से जुड़ा है। बात जहां तक ट्रेन में भोले बाबा के रिर्जव सीट की रही, तो यह बस उसी वेलफेयर स्कीम का एक एक्सटेंशन भर है।

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