इन चीजों को अपनाकर आप ‘सिंगल यूज प्लास्टिक’ को कह सकते हैं गुड बॉय

2 अक्टूबर को गांधी जयंती है। लेकिन इस बार की गांधी जयंती कुछ ज्यादा खास हो सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि देश की नरेन्द्र मोदी सरकार जो लगातार कड़े और बड़े फैसले ले रही है, उसने यह तय कर लिया है कि, इस बार गांधी जयंती पर भारत से सिंगल यूज प्लास्टिक को गुड बॉय तो कहलवा ही देंगे। हालांकि, इस बारे में ऐसा कुछ बताया नहीं है कि सिंगल यूज प्लास्टिक में कौन-कौन सी स्पेसिफिक चीजें शामिल की जाने वाली हैं जिनका बनना, बिकना और उपयोग करना तीनों ही बंद होने वाला है। लेकिन कई लोगों का कहना है कि सिर्फ पॉली बैग ही नहीं बल्कि प्लास्टिक के कप, प्लेट, कटोरों से लेकर पानी के बोतल तक का नंबर आ सकता है। यानि इन्हें बैन किया जा सकता है।

ये चीजें बैन होने से जाहिर सी बात है कि किसी को भी दिक्कत होगी। क्योंकि हम इनके आदि जो हो चुके हैं और आदत तो अचानक से छूटेगी नहीं। ऐसे में सरकार के इस फैसले का थोड़ा बहुत विरोध तो जरूर होगा। वहीं इस विरोध में इन सिंगल यूज प्लास्टिक को बनाने वाली कंपनियां भी शामिल होंगी। हालांकि सरकार ने कहा है कि, एक बार में बैन नहीं कर दिया जाएगा। लेकिन फिर भी प्लास्टिक का यूज आज नहीं तो कल छोड़ना तो होगा ही।

ये बात तो हम सब जानते ही हैं कि, प्लास्टिक बायोडिग्रेडेबल नहीं है। यही कारण है कि, यह हमारे आसपास कई सालों से पड़ा हुआ है। धीरे—धीरे इसका ढ़ेर बढ़ते—बढ़ते हमारे घरों तक पहुंच आया है। इस प्लास्टिकमय हो चुकी दुनिया में अब तो हवा और पानी भी प्लास्टिक से भर गए हैं। हम सांस लेते समय भी प्लास्टिक ले रहे हैं और खाते समय भी प्लास्टिक खा रहे हैं। ऐसे में यह बात तो साफ है कि, प्लास्टिक हमारे साथ—साथ हमारे पर्यावरण के लिए भी आज एवेंजर्स के थानोस के बराबर का विलेन बन गया है। जो कभी भी दुनिया के लिए बड़ी तबाही ला सकता है।  

लेकिन हमारे पास कुछ उपाय हैं जिसे करके हम इससे बच सकते हैं। मोदी सरकार ने 2 अक्टूबर को प्लास्टिक बैन करने की बात कही है। ऐसे में हमारे लिए बड़ी चुनौती ये है कि, सिंगल यूज प्लास्टिक पर हम अपनी निर्भरता कैसे कम करें? यह सवाल आपको सता तो जरूर रहा होगा। तो घबराइए नहीं इसका उपाय हमारी भारतीय परंपरा में ही छिपा हुआ है। अगर याद नहीं आ रहा तो कुछ उपाए हम आपको बता देते हैं।

Single Use Plastic- अगर प्लास्टिक के कटोरे और प्लेट बंद हुए तो?

अक्टूबर से आगे के महीनों में पर्व—त्योहारों से लेकर शादियों तक की धूम रहती है। इन सभी फंक्शनों में प्लास्टिक एक आम-सी यूज होने वाली चीज है। दावतों में प्लास्टिक की प्लेट, ग्लास, कटोरों की डिमांड आज के दिनों में काफी बढ़ गई है। ऐसे में अगर आप शादी में खाना या पूजा का प्रसाद बांटने के बाद अगले दिन उसी जगह को देखेंगे तो आपको सिर्फ प्लास्टिक के ढ़ेर दिखेंगे। सालों से हमारे घरों की पूजा और शादियों जैसे फंक्शनों का जुड़ाव प्रकृति से रहा है। लेकिन इंडस्ट्रियलाइजेशन के बाद प्लास्टिक ने इनकी जगह ले ली।

पत्तल की ओर वापस चलिए
अब याद करिए पहले के दावतों में क्या होता था। पहले गांवों में दावतों का खाना परोसने के लिए पुरइन, अरबी या केले के पत्तों का इस्तेमाल करते थे। धीरे-धीरे इसकी जगह प्लास्टिक और फोम की प्लेटों ने ले ली। लेकिन यह बदलाव हमारी सेहत के साथ ही पर्यावरण के लिए भी खतरा बन गया। ऐसे में उपाय तो यही है कि, फिर से पत्तलों की ओर लौटा जाए। कुछ लोगों के लिए यह बात स्टैण्डर्ड की हो सकती है तो बता दें कि आज के पत्तलों का स्टैण्डर्ड काफी हाई है।

भारत में पत्तल बनाने के कारोबार जहां बंद होने के कगार पर हैं तो वहीं जर्मनी में एक Leaf Republic नाम की कंपनी के डिज़ाइनर और इंजीनियर्स ने भारतीय पत्तलों से प्रभावित होकर एक मशीन बनाई है जो शानदार आकार और साइज के पत्तल और दोना बनाती है। तो दुनिया जहां भारत से पर्यावरण बचाने की सीख ले रही है वहीं हम लोग प्लास्टिक के चक्कर में अपने ही वातावरण को गंदा कर रहे हैं।

Single-Use Plastic- ग्लास और कप का भी उपाय है  

प्लास्टिक के कप और ग्लास भी बंद होते हैं तो इसके लिए भी हमारे पास कई विकल्प हैं। पहला ये कि स्टेनलेस स्टील के ग्लास का उपयोग किया जा सकता है या फिर पेपर ग्लास भी मार्केट में उपलब्ध हैं। तो वहीं कप या कॉफी मग की बात करें तो ये सब ज्यादातर चीनी मिट्टी या प्लास्टिक फाइबर से बने होते हैं। फाइबर कप बायोडिग्रेडेबल नहीं होता जबकि चीनी मिट्टी के कप भी नेचर में घुलने में काफी समय लेते हैं। लेकिन इनके बदले में सबसे बेहतर उपाय है कि आप बैम्बू कप का इस्तेमाल करें। आजकल इसका बहुत क्रेज है। स्टारबक्स जैसी कंपनियां भी बैम्बू कप ऑफर करती है। यहां सबसे खास बात यह है कि आप अपने लिए एक कप को बुक करके रख सकते हैं।

कप की बजाए कुल्ल्हड़ का इस्तेमाल हाल ही के दिनों में बढ़ा है। इसे और प्रोत्साहित करने की जरूरत है। साथ ही लोग भी इसके इस्तेमाल को ज्यादा तवज्जो दें तो प्लास्टिक कपों की आदत काफी जल्दी छूट जाएगी।

Single Use Plastic

प्लास्टिक बैग्स का रिप्लेसमेंट
प्लास्टिक का सबसे ज्यादा उपयोग कैरी बैग के तौर पर होता है। मार्केट से कुछ भी खरीद कर लाना हो तो हम अक्सर खाली हाथ ही निकल लेते हैं क्योंकि हमे पता है कि दुकानदार तो फ्री में प्लास्टिक के बैग्स में सामान पैक करके दे ही देगा। फल, सब्जी, मांस—मछली की खरीददारी कर पॉली बैग में ही इसे लेकर आने की आदत हमे और आपको लगी हुई है। इसके रिप्लेसमेंट में सरकार की ओर से जुट बैग यूज करने की सलाह तो दी जाती है। लेकिन मार्केट में इसके बदले 2 से 10 रूपये एक्स्ट्रा वसूले जाते हैं। ऐसे में हमे जुट बैगों के रीयूज पर ध्यान देना होगा।

कपड़ों के दुकानों पर कई सारे जुट बैग दुकानदार फ्री में देते हैं। ऐसे में एक आम आदमी इन बैग्स का इस्तेमाल कई तरह से कर सकता है। इन जुट के बैग्स को आप धो कर सुखा भी सकते हैं। ऐसे में मांस—मछली लाने के लिए भी आप इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। तो सीधा सा फंडा है कि, फ्री में मिलने वाले जुट के थैलों को अभी से इकट्ठा करना शुरू कर दीजिए और इसे यूज करने की आदत भी डाल लीजिए।

बाल्टियों का क्या करें

आम तौर पर प्लास्टिक की बाल्टियां कई सालों तक चलती हैं। लेकिन इनका भी एक समय होता है। ऐसे में आप इन बाल्टियों को अपने घर के गार्डन में गमलों की तरह यूज कर सकते हैं या फिर इन बेकार बाल्टियों का इस्तेमाल कूड़ा फेंकने के लिए भी किया जा सकता है। वहीं प्लास्टिक की बाल्टियों की बजाए मेटल बाल्टी का उपयोग किया जा सकता है।

तो ये कुछ ऐसे सजेशन थे जिन्हें आप अपनाकर इनकी आदत खुद को लगा सकते हैं। ये बात तो आपको पता ही है कि सिर्फ 21 दिनों तक किसी काम को रिपीट करने से उसकी आदत लग जाती है। तो बस अभी से रियूज और रिप्लेस प्लास्टिक एंड यूज बायोडिग्रेडेबल प्रोडक्टस की पॉलिसी को अपनाने की कोशिश में लग जाइए। ताकि 2 अक्टूबर को मोदी सरकार प्लास्टिक पर बैन लगाने की घोषणा भी करे तो अब आपको कोई टेंशन न हो। 

आम तौर पर प्लास्टिक की बाल्टियां कई सालों तक चलती हैं। लेकिन इनका भी एक समय होता है। ऐसे में आप इन बाल्टियों को अपने घर के गार्डन में गमलों की तरह यूज कर सकते हैं या फिर इन बेकार बाल्टियों का इस्तेमाल कूड़ा फेंकने के लिए भी किया जा सकता है। वहीं प्लास्टिक की बाल्टियों की बजाए मेटल बाल्टी का उपयोग किया जा सकता है।

तो ये कुछ ऐसे सजेशन थे जिन्हें आप अपनाकर इनकी आदत खुद को लगा सकते हैं। ये बात तो आपको पता ही है कि सिर्फ 21 दिनों तक किसी काम को रिपीट करने से उसकी आदत लग जाती है। तो बस अभी से रियूज और रिप्लेस प्लास्टिक एंड यूज बायोडिग्रेडेबल प्रोडक्टस की पॉलिसी को अपनाने की कोशिश में लग जाइए। ताकि 2 अक्टूबर को मोदी सरकार प्लास्टिक पर बैन लगाने की घोषणा भी करे तो अब आपको कोई टेंशन न हो। 

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