आम आदमी की प्रेम कहानी सुनाता बुलंद शहर का ‘मिनी ताजमहल’

प्यार की कहानियां किसे नहीं लुभातीं हैं। हर किसी को इन कहानियों में इंट्रेस्ट होता है, फिर चाहे उन्हें जिंदगी में कभी प्यार हुआ हो या नहीं हुआ हो। लेकिन प्यार को लेकर कहा जाता है कि, इसे करना तो बेहद आसान है पर निभाना मुश्किल। लाखों में एक होते हैं जिन्हें सच्ची मोहब्बत होती है और उनके न रहने के बाद भी उनकी कहानियां दुनिया में अमर हो जाती हैं। दुनिया उनके प्रेम संबंधो की मिसालें देती है, और उनके नाम की कसमें खाईं जाती हैं। हमारे देश में ऐसी कई प्रमी जोड़ियां हुईं। लेकिन जब भी प्यार के धरोहर के बारे में बात आती है लोगों के मन में सबसे पहला नाम ‘ताजमहल’ का आता है। ताजमहल दुनियाभर में प्यार की मिसाल है, जो आज भी मुगल बादशाह शाहजहां और उनकी पत्नी मुमताज की लव स्टोरी को दुनिया में जिंदा रखे हुए है। लेकिन कहने वाले बहुत कुछ कहते हैं। कई उनके प्यार को उतना ईमानदार भी नहीं मानते।

Mini Taj Mahal

ऐसा इसलिए भी हो सकता है क्योंकि यह प्रेम कहानी बादशाह की थी और हमारे किस्से कहानियों में हर नायक और नायिका राजशाही ही होते हैं। ऐसे में आम लोगों की प्रेम कहानी को दुनिया में लोगों की जुबां तक नहीं पहुंच पाती। शाहजहां के पास सबकुछ था तो उसने ताजमहल बनवाया और बनाने वालों के हाथ तक कटवा दिए। ताकि कोई फिर ताज जैसा कुछ न बना सके। ऐसे में उनकी प्रेम कहानी तो अमर ही होनी थी। लेकिन जो आम इंसान था वो कैसे बयां करता कि, उसकी भी एक प्रेम कहानी है जो बादशाह से किसी भी मामले में कम नहीं थी। उस दौर में शायद वह आम आदमी ऐसा कुछ सोचता भी तो कर न पाता। लेकिन अब न राजा रहे ना वो दौर रहा। अब तो आम से आम इंसान भी अपनी प्रेम कहानी खुल कर बयां कर सकता है। फिर चाहे उसका तरीका एक और ताज बना कर ही जाहिर करना क्यों न हों।

जी हां,  नया ताज। एक ताज है जिसे शाहजहां ने बनवाया था, लेकिन एक और ताज है जो यूपी में ही है, लेकिन आगरा में नहीं और न ही इसे बनवाया किसी शाही इंसान ने है। यह ताज है मकबरा यादगारे मोहब्बत ताजममुली बेगम जिसे दुनिया छोटे ताज़ के नाम से भी जानती है। साल 2015 में इस ताज महल को जिसने बनवाया था वह बुंदेलखंड के पोस्ट ऑफिस में कभी पोस्टमास्टर हुआ करते थे। न तनख्वा इतनी थी और न हैसियत की आगरा के जैसा ताज खड़ा करते, लेकिन अपनी प्रेम कहानी का एक चिन्ह वो दुनिया में छोड़ कर जाना चाहते थे और वो भी अपनी बेगम के प्यार के लिए। इस पोस्ट मास्टर का नाम है फैजुल हसन कादरी।

Mini Taj Mahal- फैजुल हसन कादरी और ताजममुली बेगम की कहानी

फैजुल हसन कादरी ने अपने जीते जी यह मिनी ताजमहल बनवाया था। आज वे भी इस दुनिया में नहीं हैं। लेकिन अपने जीते जी अपनी प्रेम कहानी को वो अमर कर गए। इस मिनी ताज महल को बनाने और अपनी बेगम के बारे में बताते हुए फैजुल ने कहा था कि उनकी पत्नी उनके मामू की लड़की थी। वे बताते हैं कि, जब वो शादी करके आईं थी तो उसे रोटी बनाना नहीं आता था। मैने उसे बनाना सिखाया और धीरे—धीरे वो इस काम में इतनी ट्रेंड हो गई कि, किचेन से मेरी छुट्टी हो गई। फैजुल बताते हैं कि, उन्होंने अपनी बेगम को पढ़ना सिखाया। उसके लिए रोमांटिक और डिटेक्टीव स्टोरिज वाली किताबें खरीद कर लाते थे। दोनो साथ में फिल्में देखने भी जाते थे। इस बारे में फैजुल ने एक इंटरव्यू में बताते हुए कहा था कि, उस समय आमदनी कम थी ऐसे में वो अपनी बेगम के साथ सबसे सस्ती वाली टिकट जो साढ़े पांच आने की आती थी। लेकिन सिनेमा देखते थे। वे दोनों अक्सर तस्वीर महल थियेटर में जाया करते थे।

फैजुल और उनकी बेगम के प्रेम की कोई निशानी नहीं थी। यानि उनका कोई बच्चा नहीं था। ऐसे में ताजममुली फैजुल को यही कहती थी कि, उनके मरने के बाद कोई उन्हें याद नहीं रखेगा। शायद अपनी बेगम की यही बात फैजुल को लग गई और मिनी ताज बनाने की नींव उनके मन में तभी पड़ गई। फैजुल की बेगम की मौत थ्रोट कैंसर के कारण हुई। उस एक पल के बारे में बताते हुए वे कहते हैं कि, वो उस आखिरी समय में मुझसे कुछ कहना चाहती थी, लेकिन मै समझ ही नहीं पाया और वो मुंह से बोल नहीं पाई।

Mini Taj Mahal

Mini Taj Mahal- कैसा है मिनी ताज और कैसे बनवाया गया

फैजुल ने इस मिनी ताज को बनाने के लिए कुल 15 लाख खर्च किए हैं। इसके लिए उन्होंने अपनी जमीन बेंची और अपनी पत्नी के जेवर भी बेंचे। उन्हें इसके निर्माण के लिए उस वक्त के यूपी सीएम अखिलेश यादव ने भी मदद देने की बात कही थी। लेकिन फैजुल ने किसी से भी एक पैसा तक नहीं लिया। खुद ही इसे बनवाया और लोगों के साथ मिलकर बनाया। उनके इस ताजमहल की नींव 10 फीट गहराई में है और 12 इंच चौड़ी है। वहीं इसकी दिवारें 15 इंच की हैं और जमीन से इसकी ऊंचाई 15 फीट है। फैजुल ने इसी में अपनी पत्नी की कब्र बनवाई थी और उसके बगल में अपने लिए भी जगह छोड़ी थी, जहां उन्हें बाद में दफनाया गया है। हालांकि फैजुल का यह ताजमहल पूरी तरह से बन नहीं पाया। उन्होंने अपनी आखिरी जमीन अपने मरने से पहले लड़कियों के स्कूल बनवाने के लिए डोनेट कर दी थी। 

बुलंदशहर में खेतों के बीच खड़ा यह मिनी ताज महल भले ही देखने में अधूरा हो…. लेकिन फैजुल और ताजममुली की प्रेम कहानी की दास्तां इस इमारत को एक अलग ही खूबसूरती देती है जो शाहजहां के ताजमहल की खूबसूरती से थोड़ी भी कम नहीं है। यह ताज आम आदमी के प्रेम की निशानी है। 

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