आज भी ज़िंदा हैं 90 के दशक का वो ‘रावण’

90 के दशक की रामायण याद है! रामानंद सागर की वो ही रामायण जिसके टीवी पर आते ही सड़कें खाली हो जाती थी। लोग अपने-अपने टीवी सैटों के आगे बैठ जाते थे। उस ज़माने में इस शो की टीआरपी मिल्खा सिंह से भी तेज़ दौड़ती थी। आज के समय में भी जब बात रामानंद सागर के रामायण की आती है तो एक-एक किरदार हमारे दिमाग में आ जाते हैं। क्योंकि जिन्होंने भी ये किरदार निभाए हैं वो आज तक भी दिमाग में बसे हुए हैं। ऐसा ही एक किरदार था रावण।

रामानंद सागर की रामायण में रावण का किरदार अरविंद त्रिवेदी ने निभाया था। गरजती आवाज़ और पहाड़ सा शरीर वाले उस रावण की छाप अरविंद त्रिवेदी पर ऐसी पड़ी कि लोग आज भी उन्हें रावण के नाम से ही जानते हैं। रामायण में रावण के किरदार और इसके ऑडिशन से जुड़ी एक बेहद दिलचस्प किस्सा भी है। दरअसल रामानंद सागर ने रावण के किरदार के लिए करीब 300 कलाकारों का ऑडिशन लिया था।

Arvind Triwedi  ने बखूबी निभाया था रामायण में रावण का किरदार

अरविंद जैसे ही रावण के आवतार में आए तो वहां बैठे सभी लोग उन्हें देखकर भौचक्के रह गए। क्योंकि सच में अरविन्द रावण की तरह लग रहे थे। जैसे की रावण का किरदार जीवंत हो चला हो। जिसके बाद रामानंद सागर ने तभी के तभी ये ऐलान कर डाला कि तुम ही मेरे रावण बनोगे। फिर हुआ कुछ ऐसा कि कुछ ही दिनों में अरविंद सुपरस्टार बन गए। अरविंद लंका नरेश के रोल में ऐसे खपे की रामायण के इतर भी उन्हें खलनायकों के रोल मिलने लगे। मगर टीवी के ये रावण असल ज़िंदगी में राम के बहुत बड़े भक्त हैं।

Arvind Triwedi – आज भी रामायण के हर किरदार को किया जाता है याद

अब उम्र के इस पड़ाव में आकार अरविंद अपना ज्यादा से ज्यादा समय भक्ति अराधना में लगाते हैं। उस समय अपनी कद-काठी, भारी आवाज़ से लोगों के दिलों में राज करने वाले टीवी के रावण अरविंद त्रिवेदी अब काफ़ी कमजोर हो गए हैं। 82 साल के हो चुके अरविंद अब ज़्यादातर समय घर पर ही रहते हैं। वो रावण का चेहरा और आज के अरविंद त्रिवेदी का चेहरा बिलकुल बदल चुका है। जिन लोगों को उनका रावण का रूप याद है वो इन्हें अब पहचान भी नहीं पाएंगे।

अरविंद ने रामायण के बाद विश्वामित्र नाम का धाराहवाहिक में भी काम किया। अरविंद त्रिवेदी ने रंगमंच पर काफ़ी दिनों तक काम किया। अरविंद त्रिवेदी ने रामायण के अलावा गुजरात और हिंदी की करीब 300 फ़िल्मों में भी काम किया हुआ है। लेकिन 90 के दशक में ही अरविंद ने टीवी सीरिल्स से दूरी बनाकर राजनीति में हिस्सा ले लिया था। इतना ही नहीं उन्होंने लोकसभा के चुनाव भी जीते। आज चाहे रामायण का वो समय गुज़र चुका हो मगर आज भी रामायण और इसके किरदारों को याद किया जाता है।

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