‘असीरगढ़ का किला’ जिसे भेद नहीं पाया अकबर

भारतीय इतिहास को खंगालें तो, आपको कई रोचक चीजें मिलेंगी जो आपके अंदर की एक्साइटमेंट को बढ़ा देगी। राजाओं—महाराजाओं की कहानियों से लेकर कई अनकहे और अनसुलझे रहस्यों की परतें भारतीय इतिहास में दबी हुई हैं। जिनके रहस्य को आज तक सुलझाया नहीं जा सका है। बात जब ऐतिहासिक किलों की होती है तो यह रोमांच और भी बढ़ जाता है, क्योंकि देशभर में ऐसे कई किले हैं जिनके अंदर हमारे इतिहास के कई अनसुलझे रहस्य दबे पड़े है। फिर चाहे बात किले की बनावट से जुड़ी हुई हो या फिर किले के घटने वाली कोई रहस्यमयी घटना से। ये कहानियां ही आज भी इन किलों तक दुनियाभर के लोगों को खींचकर ले आती हैं। आज हम आपको मध्य भारत में स्थित एक ऐसे ही किले के बारे में बताने जा रहे हैं जिसके आगे अकबर तक को हार माननी पड़ी वहीं इसका रहस्यमयी इतिहास महाभारत काल के जुड़ा हुआ है। इस किले ने भारत के हर काल को बड़े करीब से देखा है। यह है असीरगढ़ का रहस्यमयी किला।

मध्यप्रदेश के बुरहानपुर से 20 किमी की दूरी पर सतपुरा की पहाड़ियों पर असीरगढ़ का किला स्थित है। इस जगह पर ही नर्मदा और ताप्ती नदी का संगम है। ऐसे में यह जगह दक्कन के पठार की ओर जाने का मुख्य मार्ग है। मुगल काल में यह जगह ‘दक्कन की चाबी’ मानी जाती थी। लेकिन चाबी को पाना इतना आसान नहीं होगा। इस किले को जिस किसी ने भी ताकत से जीतने की कोशिश की वह नाकाम ही रहा। खुद मुगल बादशाह अकबर भी असीरगढ़ के किले को जीतने के ख्वाब में 6 महीने इसके नीचे खड़ा रहा लेकिन इसे भेद नहीं पाया।

यह किला तीन भागों में डिवाइड है, ऊपरी हिस्से को असीरगढ़, बीच का कमरगढ़ और निचले हिस्से को मलयगढ़ के नाम से जानते हैं। किले का निर्माण कब हुआ इस बारे में आज तक कोई इतिहासकार भी सटीक अंदाजा नहीं लगा सका है।

Asirgarh Fort

Asirgarh Fort- जब 6 महीने तक किले के नीचे खड़ा रहा अकबर

इस किले के बारे में कहा जाता है कि, यहां कभी सूफी संत रहा करते थे। उनके पास अहिर राजा अशा अहिर  पहुंचा था। जिसके पास हजारों पालतू जानवर थे। उसने संत से जगह पर रहने की अनुमति ली और यहीं पर फिर किला बनवाया ताकि अपने पशुओं की रक्षा कर सकें। बाद में इस किले पर नासिर खां ने चालाकी से कब्जा कर लिया। उसके बाद उसी के वंशज आदिल शाह फारूखी का कब्जा इसपर रहा। जिसने मुगल साम्राज्य को टैक्स देने से मना कर दिया। इसपर पूरे भारत में अपना साम्राज्य बढ़ाने में लगा मुगल बादशाह अकबर उससे लड़ने के लिए अपनी सेना के संग किले के पास पहुंच गया। फारूखी ने पूरे किले की सुरक्षा का ऐसा बंदोबस्त कर दिया कि, अगले 10 सालों तक वहां के लोग किले में आराम से रह सकते थे। जब 6 महीने बीतने के बाद भी अकबर किले को भेद नहीं पाया तो उसने फारूखी को बातचीत के लिए बुलाया और इसी बहाने उसे घायल कर कैद कर लिया। इस तरह यह किला मुगल राज के हाथ लग गया।

Asirgarh Fort- अंग्रेजों ने दी थी तीन क्रांतिकारियों को फांसी

आर्कियोलॉजी विभाग की मानें तो 1857 में इस जेल में तीन क्रांतिकारियों रूर सिंह, पहाड़ा सिंह, मुलुक सिंह को बंदी बनाकर रखा जिन्हें बाद में फांसी दी गई। हाल ही में हुई खुदाई में किले के नीचे जेल, लोहे की खिड़की, दरवाजे और चार बैरक बने हुए मिले। खुदाई में रानी का महल भी मिला जो अंडरग्राउंड में है और इसमें 100 बाय 100 में बना हुए 20 कमरे हैं। 20 फीट गहराई में बने इस महल को ईंटों की जुड़ाई से बनाया गया है। इसके अंदर स्वीमिंग पूल भी है। 60 एकड़ में फैले इस किले में पांच तालाब हैं और गंगा व जमुना नाम के दो कुंड जो सालभर पानी से भरे रहते हैं। यह कैसे संभव है यह बात आज तक कोई नहीं जान पाया। वहीं यहां एक मंदिर और एक मस्जिद भी है।

Asirgarh Fort- 'अश्वथामा' आज भी यहां करते है पूजा

Asirgarh Fort

इस किले का वो राज जो सबसे ज्यादा रोमांचित करता है और लोगों को इसकी ओर खींचता है वह राज है महाभारत की कहानी के पात्र अश्वथामा। कहते हैं कि यह जगह अश्वथामा के पूजा करने की जगह है। दरअसल यहां इस किले में भागवान शिव का गुप्तेश्वर मंदिर है। मंदिर के चारों ओर गहरी खाइयां हैं, माना जाता है कि मंदिर के अंदर से ही इन जगहों पर जाने का कोई रास्ता है। कहा जाता है कि साल में हर बार पूर्णिमा और अमावस्या को यहां अश्वथामा पूजा करने के लिए पहुंचते हैं। मंदिर में पूजा करने से पहले वे यहीं के कुंड में स्नान करते हैं। यह बात कितनी सच है इस बारे में दावा तो नहीं किया जा सकता लेकिन मंदिर में दिखने वाले कुछ संकेत और आस पास के रहनेवाले लोगों के दावे इस बात को सही ठहराते हैं। अश्वथामा के बारे में कहा जाता है भगवान श्री कृष्ण के श्राप के कारण वह अभी भी दुनिया में भटकते रहते हैं। उन्हें देखने का दावा कई बार देश के कई हिस्सों में लोग कर चुके हैं। ऐसी मान्यता है कि, पिछले 5000 सालों से वे हमेशा इस मंदिर में पूजा करने आते हैं।

मध्यप्रदेश की सतपुरा की पहाड़ियों पर 750 फुट की ऊंचाई पर खड़ा असीरगढ़ किला भारत के एंसियेंट, मिडाइवल और आधुनिक इतिहास की कहानियों को सुनाने के लिए आज भी खड़ा है और आगे भी आनेवाली पीढ़ियों को यह अपने रहस्यमयी और गौरवशाली इतिहास के कारण अपनी ओर खींचता रहेगा

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