अगर किताबें हैं आपकी बेस्ट फ्रेंड, तो रायपुर का ‘नालंदा परिसर’ आपके लिए जन्नत है

नालंदा, भारत में क्या दुनिया में कोई ऐसा पढ़ा लिखा इंसान नहीं होगा जिसने इस नाम को नहीं सुना होगा। अगर हम हिस्ट्री ऑफ ऐजुकेशन की बात करें तो नालंदा इसका सबसे गोल्डन पिरियड है। जहां पूरी दुनिया का ज्ञान समाहित होता था। नालंदा भारत के इतिहास के गोल्डन पीरियड का हिस्सा रहा है। यानि 5वीं सदी में इसकी ख्याति बिहार और भारत से बाहर पूरी दुनिया में थी। यहां दुनियाभर के 10,000 से ज्यादा बच्चे पढ़ा करते थे और उन्हें पढ़ाने के लिए 2000 टीचर थे। यह दुनिया का सबसे पहला बड़ा आवासीय विश्वविद्यालय था। यानि उस समय भारत विश्वगुरू था और वो केवल अपने ज्ञान की बदौलत। 12वीं और 13वीं शताब्दियों में जब यहां आक्रमण हुए तो दिल्ली में अलाउद्दीन खिलजी का राज हो गया। उसी की सेना के एक सिरफिरे सेनापति बख्तियार खिलजी ने नालंदा में अपने आक्रमण में जमकर तबाही मचाई, सब तहस-नहस कर दिया। उसने नालंदा यूनिवर्सिटी में आग लगवा दी, जिससे इसकी लाइब्रेरी में रखीं बेशकीमती किताबें जलकर राख हो गईं। कहते हैं यहां कि लाइब्रेरी में इतनी किताबें थीं कि, आग कई महीनों तक लगी रही।

यह नालंदा की कहानी थी। नालंदा में लगी आग से भारत का एक बड़ा ज्ञानभंडार तबाह हो गया। लेकिन शिक्षा के प्रति हमारी सोच और चाहत कम नहीं हुई। एक ओर जहां बिहार में नालंदा यूनिवर्सिटी के खंडहरों के पास ही नई नालंदा यूनिवर्सिटी की शुरुआत हो गई है (हांलांकि पूरा कैंपस अभी तैयार नहीं हुआ है) लेकिन नालंदा के नाम पर ही देशभर के कई हिस्सों में ऐसी लाइब्रेरियों को तैयार किया गया है, जहां बच्चों को पुरानी नालंदा यूनिवर्सिटी के जैसे ही वातावरण दिया जा सके और वो भी आधुनिक युग की तकनीकों के साथ। ऐसी ही एक लाइब्रेरी छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में स्थित है जिसे हाल ही में साल 2018 में स्टूडेंट्स के लिए खोल दिया गया है। रायपुर में बनी इस लाइब्रेरी का नाम वैसे तो ‘नालंदा परिसर’ है लेकिन इसे ‘यूथ टावर’ के नाम से भी जाना जाता है। 2 जून 2018 को इस नालंदा परिसर का उद्घाटन छत्तीसगढ़ के तत्कालिक मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने किया था।

Nalanda Parisar

नालंदा परिसर की खासियत

उद्घाटन के समय मुख्यमंत्री रमन सिंह ने कहा था कि, हमने पुरानी नालंदा यूनिवर्सिटी का रिवाइवल किया है, सच कहें तो नालंदा परिसर में पहुंचकर किसी को भी ऐसा ही लगेगा कि, नई नालंदा कुछ ऐसी ही होती। स्मार्ट सिटी रायपुर प्रोजेक्ट में ऑक्सी रीडिंग जोन के तहत बनाए गए नालंदा परिसर में आपको हर तरह का वातावरण मिलेगा जहां बैठकर पढ़ना आसान होगा। 6 हेक्टेयर में फैला और फुल इको ओपेन रिडिंग जोन वाला नालंदा परिसर छत्तीसगढ़ के अनेकों खूबसूरत सिंबल्स में से एक है। जो ट्रडिशन को एक मोर्डन टच देता है। राजधानी रायपुर के बीचो—बीच बने इस स्टडी सेंटर में हर रोज 1700 से ज्यादा स्टूडेंट्स आते हैं। यह लाइब्रेरी 24/7 खुला रहता है। तीन फ्लोर के इस टावर के हर फ्लोर पर किताबों का भंडार है। जानकारी के अनुसार, यहां लगभग 50,000 किताबें हैं। यानि की अगर आप किताबों वाले कीड़े है तो आपके लिए तो यह जगह जन्नत है।

अन्य पब्लिक लाइब्रेरियों से नालंदा परिसर दिखने में तो अलग है ही साथ ही, यह शायद पहली ऐसी लाइब्रेरी है जिसे फूल ऑन स्टूडेंट्स के कंफर्ट को ध्यान में रखकर बनाया गया है। टावर के शीशे हिट रेजिस्टेंस वाले है तो वहीं इसकी छत थर्मल इंसुलेशन वाली है। जिसके कारण इसके अंदर का टेम्परेचर नॉर्मल रहता है, जिसमें बच्चे पढ़ाई कर सकते हैं। टावर के बाहर मौजूद 50 तरह के पेड़ों से भरा गार्डन, इसके स्टडी एरिया को दोगुना कर देता है। यहां डे लाइट में तो पढ़ाई कर ही सकते हैं साथ ही रात में पढ़ाई के लिए भी सोलर पॉवर्ड लैंम्पस की व्यवस्था है।

Nalanda Parisar

नालंदा परिसर में रखा गया है स्टूडेंट्स की हर जरूरत का ख्याल

इस ऑक्सी जोन में स्टूडेंट्स की हर जरूरत का ख्याल रखा गया है। यहां चौबीसों घंटे फ्री वाई—फाई की सुविधा है, इनडोर और आउटडोर रीडिंग जोन है, लाइब्रेरी है, ई—लाइब्रेरी है, रिप्रोग्राफी सेक्शन है, डिस्कशन सेक्टर है बुक स्टेार है, स्टेशनरी स्टोर है और कम्प्यूटर सेंटर है। इसके साथ ही इस कैंपस में मेडिकल स्टोर, स्पोर्ट और इलेक्ट्रॉनिक शॉप, एटीएम और कैफेटेरिया की व्यवस्था है। यह पहली लाइब्रेरी है जो फुली ऑटोमेटिक है। यहां हर बच्चे को एक—एक रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिटी कार्ड दिया जाता है जिसके जरिए वो इस कैंपस में एंट्री ले सकते हैं और खुद से किताब भी ईशु करा सकते हैं। 

नालंदा परिसर भारत का पहला ऑक्सी रीडिंग ज़ोन है जो स्टूडेंट्स को पढ़ने के लिए एक फुल फैसिलिटी वाली जगह उपलब्ध कराता है। सच में मौजूदा दौर में भारत में फिलहाल ऐसी फैसिलिटी वाली लाइब्रेरी कही नहीं है। यह जगह आज प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले गरीब छात्रों के लिए भी वरदान बन गई है। सच में यह हिस्ट्री रीक्रिएटिंग हैं। तो अगर किताबें आपकी भी बेस्ट फ्रेंड है तो ‘नालंदा परिसर यानि की यूथ टावर आपका ही इंतजार कर रही है।

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